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Hindi News ›   India News ›   Haryana: Displeasure with central paramilitary forces in Sainik Welfare Board files not reached from CAPF Headquarters

छलावा: सैनिक कल्याण बोर्ड में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से बेरुखी, सीएपीएफ मुख्यालयों से नहीं पहुंचीं फाइलें 

Fri, 09 Jul 2021 03:42 PM IST
सुरेंद्र जोशी जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली  Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 09 Jul 2021 03:42 PM IST
सार

कॉन्फेडरेसन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वैलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि हरियाणा में दो लाख जवानों के परिवारों के साथ छलावा हो रहा है। पांच साल पहले राज्य में सैनिक विभाग और अर्धसैनिक कल्याण की स्थापना की गई, लेकिन इसके पास अब तक पूर्व सैनिकों का रिकॉर्ड ही नहीं पहुंचा है। 
 

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Haryana: Displeasure with central paramilitary forces in Sainik Welfare Board files not reached from CAPF Headquarters
सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों एवं उनके परिजनों के कल्याण के लिए प्रयासरत कॉन्फेडरेसन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि हरियाणा में दो लाख पैरामिलिट्री परिवारों के साथ छलावा हो रहा है। 

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एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि वे छलावा शब्द का प्रयोग इसलिए कर रहे हैं कि राज्य में पांच साल पहले 'सैनिक विभाग और अर्धसैनिक कल्याण, हरियाणा सरकार' की स्थापना की गई, लेकिन अभी तक 'सीएपीएफ' मुख्यालयों से जवानों व उनके परिजनों का रिकॉर्ड तक विभाग के पास नहीं पहुंच सका है। कोई रिटायर्ड पर्सन या शहीद परिवार, सैनिक विभाग के पास जाता है तो जवाब मिलता है, अभी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। इस बाबत प्रक्रिया चल रही है। इतना ही नहीं, उन्हें यह कहकर झटका देने का प्रयास किया लाता है कि यहां पर तो 'सेना' से जुड़े कर्मियों को लेकर ही बात होती है। 
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खास बात यह है कि, 'सैनिक विभाग और अर्धसैनिक कल्याण, में अधिकांश पदों पर हरियाणा सरकार का स्टाफ या सेना के रिटायर्ड अफसर कार्यरत हैं। इनमें केंद्रीय अर्धसैनिक बलों का प्रतिनिधित्व न के बराबर है।  रणबीर सिंह बताते हैं, राष्ट्र के लिए गौरव की बात है कि हरियाणा छोटा राज्य होने के बावजूद सेना हो या अर्ध-सेना, सबसे ज्यादा भागीदारी रखता है। अंतरराष्ट्रीय खेलों में भी सबसे ज्यादा पदक इसी राज्य के खाते में आते हैं। 
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27 दिसंबर 2016 को हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य बना, जहां सैनिकों के साथ अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड की स्थापना हुई। 14 नवंबर 2019 को ओमप्रकाश यादव को सामाजिक न्याय के साथ साथ सेना व अर्धसैनिक कल्याण मंत्रालय का कार्यभार दिया गया। चूंकि राज्य एवं जिला स्तर पर पहले से ही सैनिक कल्याण बोर्ड कार्यरत थे, इसलिए सरकार ने उनके साथ ही 'अर्धसैनिक कल्याण' को जोड़ दिया।  

बोर्ड में पूर्व अर्धसैनिकों की मौजूदगी नहीं

इन कल्याण बोर्डों में पूर्व अर्धसैनिकों की उपस्थिति जीरो है। अगर सीआरपीएफ बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी या सीआईएसएफ का शहीद परिवार या सेवानिवृत अर्धसैनिक अपने पेंशन, पुनर्वास या अन्य भलाई संबंधित मुद्दों को लेकर उपरोक्त कल्याण बोर्ड में गुहार लगाते हैं तो रटा रटाया सा जवाब मिलता है कि यहां सिर्फ सेना के मामले सुने और निपटाएं जाते हैं। वजह, उपरोक्त बोर्ड में केंद्रीय सुरक्षा बलों का कोई प्रतिनिधि ही नहीं है। अर्धसैनिक बलों से संबंधित कोई रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है। कल्याण के नाम पर बने बोर्डों में सेना के सफाई कर्मचारी, ड्राइवर, चपड़ासी, क्लर्क, हवलदार, सूबेदार, कप्तान से लेकर कर्नल तक रिटायर्ड सैनिक पदस्थ हैं। इन्हें वेतन भत्ते हरियाणा सरकार द्वारा प्रदान किए जाते हैं। इसके बावजूद सैनिक-अर्धसैनिक कल्याण विभाग में रिटायर्ड पैरामिलिट्री फोर्स कर्मियों की उपस्थिति नहीं है। 

सरकार के पास ही रिकॉर्ड नहीं
रणबीर सिंह कहते हैं, क्या हमें यह हक भी नहीं है कि कल्याण बोर्ड में हमारे रिटायर्ड अर्धसैनिकों को समाहित किया जाए। इससे हमारे पैरामिलिट्री फोर्स के परिवारों का लेखा जोखा अप-टू-डेट करने में मदद मिलेगी। अब गंभीर सवाल पैदा होता है कि क्या नाम पट्टिका बदलने से ही कल्याण संभव है। साल 2018-19 में 128.81 करोड़, 2019-20 में 211.30 करोड़ ओर 2020-21 के बजट में सेना तथा अर्धसेना मंत्रालय को कल्याण के लिए 143 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे। हरियाणा सरकार बताए कि बजट में मिली इस भारी भरकम राशि में से पैरामिलिट्री परिवारों के किन मुद्दों पर और कितनी राशि खर्च की गई है। देश वासियों को यह जानकर ताज्जुब होगा कि हरियाणा सरकार के पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। राज्य में कितने शहीद परिवार, सेवारत एवं सेवानिवृत पैरामिलिट्री फोर्स के जवान हैं, जब ये रिकॉर्ड ही नहीं है तो फिर किस मुंह से अर्धसैनिक बलों की भलाई की बात करते हैं। 

सौतेला व भेदभावपूर्ण व्यवहार

उपरोक्त सौतेले भेदभाव व जिला स्तर पर कार्यरत सैनिक कल्याण बोर्डों में सेवानिवृत्त अर्धसैनिकों की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए पांच बार प्रतिनिधि मंडल संबंधित मंत्री ओमप्रकाश यादव से मिल चुका है, नतीजा शून्य रहा। अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड के प्रिंसिपल सेक्रेटरी से चंडीगढ़ में मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा गया। बातचीत का कोई हल नहीं निकला। जिला उपायुक्तों से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक मांग पहुंचाई गई। एसोसिएशन ने अब एलान किया है कि जल्द ही हरियाणा सरकार ने जिला स्तर पर बने अर्धसैनिक कल्याण बोर्डों में दो तिहाई रिटायर्ड अर्धसैनिकों को शामिल नहीं किया तो आने वाले दिनों में एक रणनीति के तहत तमाम जिलों के मुख्यालयों पर शांति पूर्ण विरोध व धरना प्रदर्शन किया जाएगा। 

दूसरी तरफ इस मुद्दे को लेकर पंचकुला स्थित 'सैनिक विभाग और अर्धसैनिक कल्याण, हरियाणा सरकार' के एक अधिकारी से बात की गई तो उनका कहना था, अभी इस पर काम चल रहा है। उन्होंने माना कि मौजूदा समय में रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन बल मुख्यालयों के साथ पत्राचार किया गया है। वेबसाइट को भी अपडेट किया जा रहा है।

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