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यूक्रेन संकट: गोलियों का शिकार हुए भारतीय ने मांगी मदद, कहा- मौत के बाद विमान भेजने का कोई फायदा नहीं होगा

Fri, 04 Mar 2022 06:06 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 04 Mar 2022 06:06 PM IST
सार

भारतीय नागरिक हरजोत सिंह 27 फरवरी को यूक्रेन में गोलियों का शिकार हो गए थे। उनका कीव के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा है कि मुझे भारतीय दूतावास की ओर से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। 

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Harjot Singh Indian stranded in Ukraine seeks help as he sustained multiple bullet injuries in Kyiv amid war with Russia news in Hindi
कीव के अस्पताल में इलाज करा रहे हरजोत सिंह - फोटो : एएनआई

विस्तार

रूस के हमले के बाद यूक्रेन में हालात गंभीर हो गए हैं। यहां कई भारतीय नागरिक भी फंस गए थे। इन्हें निकालने का अभियान चलाया जा रहा है और कई को निकाल भी लिया गया है। लेकिन, अभी भी कुछ लोग यहां फंसे हुए हैं और उन्हें किसी से मदद भी नहीं मिल पा रही है। 

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ऐसे ही एक भारतीय नागरिक हैं हरजोत सिंह। हरजोत के साथ समस्याएं अधिक हैं क्योंकि वह यहां गोलीबारी का शिकार हो गए थे और बुरी तरह घायल हो गदए थे। उनका यूक्रेन की राजधानी कीव के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। 
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उन्होंने एक वीडियो संदेश में भारतीय दूतावास की ओर से कोई मदद न मिलने की बात कही है। हरजोत सिंह ने कहा, 'मैं भारतीय दूतावास से संपर्क करने की कोशिश कर रहा हूं, रोज वह कहते हैं कि कुछ करेंगे, लेकिन अब तक कोई मदद नहीं मिल पाई है।'
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27 फरवरी को गोलियों का शिकार हुए थे हरजोत, दो मार्च आया था होश
हरजोत सिंह ने बताया कि वह गोलीबारी का शिकार 27 फरवरी को हुए थे। उन्होंने कहा कि हम तीन लोग एक कैब में थे और अपने तीसरे चेकप्वाइंट की ओर जा रहे थे। यहां पहुंचने पर सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए हमें वापस लौटने के लिए कह दिया गया। 


उन्होंने आगे कहा कि चेकप्वाइंट से वापस लौटते समय हम पर कई गोलियां चलाई गईं। मुझे गोलियां लगीं और मैं बेहोश हो गया और इसके बाद मुझे दो तारीख को अस्पताल में होश आया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने मुझे बताया कि मैं 3-4 घंटे तक सड़क पर पड़ा रहा था। मेरा काफी खून बह गया था। अब मेरी तबीयत पहले से काफी अच्छी है।

हरजोत सिंह ने कहा, 'मौत के बाद अगर आप चार्टर्ड विमान भी भेज देंगे को उसका कोई फायदा नहीं होगा। भगवान ने मुझे दूसरा मौका दिया है और मैं इसे जीना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि मैंने दूतावास से अनुरोध किया है कि मुझे यहां से निकाला जाए, मुझे व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, दस्तावेजों के काम में मेरी मदद की जाए।' 

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