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भारतीय महिला का उत्पीड़न: पीड़िता का आरोप- चीनी एयरपोर्ट पर अफसरों ने कहा- अरुणाचल भारत का नहीं, पासपोर्ट अवैध

Mon, 24 Nov 2025 06:40 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 24 Nov 2025 06:40 PM IST
सार

भारत की एक महिला ने दावा किया कि चीन में हवाई अड्डे पर भारतीय पासपोर्ट के चलते उसका उत्पीड़न किया गया और उसे जापान जाने में देर कराई गई। हवाई अड्डे के अधिकारियों ने महिला के भारतीय पासपोर्ट को अमान्य बताया और अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा बताया। 

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Harassment of Indian woman Chinese airport officials told her Arunachal is not part of India
प्रेमा वांगजोम थोंगडोक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई/वीडियो ग्रैब

विस्तार

अरुणाचल प्रदेश की निवासी प्रेमा वांगजोम थोंगडोक ने दावा किया कि चीन के आव्रजन (इमिग्रेश) अधिकारियों ने भारतीय पासपोर्ट होने के चलते शंघाई पुडोंग हवाई अड्डे पर उनका उत्पीड़न किया। चीनी अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट को अमान्य बताया और उन्हें जापान जाने में देर कराई। उन्हें 18 घंटों तक रोककर रखा गया। थोंगडोक ने बताया, जब मैंने उनसे सवाल पूछने की कोशिश की और मुद्दा समझाना चाहा तो उन्होंने कहा, अरुणाचल भारत का हिस्सा नहीं है और मेरा मजाक उड़ाने लगे। वे हंसते हुए कह रहे थे - तुम्हें चीनी पासपोर्ट के लिए आवेदन करना चाहिए, तुम चीनी हो, भारतीय नहीं। 
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'तुम्हें चीनी पासपोर्ट लेना चाहिए, तुम चीनी हो..'
उन्होंने बताया, मैं पिछले करीब 14 साल से ब्रिटेन में रह रही भारतीय नागरिक हूं और मैं (21 नवंबर को) लंदन से जापान जा रही थी, जिसका ट्रांजिट (थोड़े समय के लिए ठहराव) शंघाई में था। चीन के एक आव्रजन अथिकारी ने  आकर मुझे कतार से अलग कर दिया। मैंने पूछा कि क्या हो रहा है, तो उसने कहा- अरुणाचल प्रदेश भारत का नहीं, चीन का है। आपका वीजा मान्य नहीं है। आपका पासपोर्ट अवैध है।
 


जब मैंने फिर से पूछने की कोशिश की कि समस्या क्या है, तो उन्होंने कहा, अरुणाचल भारत का हिस्सा नहीं है और मेरा मजाक उड़ाने लगे, हंसने लगे और कहने लगे- तुम्हें चीनी पासपोर्ट लेना चाहिए, तुम चीनी हो, भारतीय नहीं। 

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'अपमानजनक था अधिकारियों का व्यवहार'
उन्होंने कहा, मैंने पहले भी कई बार शंघाई से ट्रांजिट किया है और कभी कोई समस्या नहीं हुई। मैं बहुत देर तक अपने परिवार से संपर्क भी नहीं कर पाई। उन्होंने आगे कहा, चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस के कर्मचारियों और दो अन्य आव्रजन अधिकारी आपस में अपनी भाषा में बात कर रहे थे। वे 'अरुणाचल' कहकर इशारा कर रहे थे और हंस रहे थे और कह रहे थे कि यह चीन है, भारत नहीं। एयरलाइन कर्मचारियों और आव्रजन अधिकारियों का यह बेहद अपमानजनक और सवाल खड़े करने वाला व्यवहार था।  

सूत्रों के अनुसार, उसी दिन घटना के बाद चीनी पक्ष के सामने कड़ा कूटनीतिक विरोध दर्ज किया गया। शंघाई में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने भी मामले को स्थानीय स्तर पर उठाया और फंसी हुई यात्री को पूरी मदद प्रदान की। एक सूत्र कहा, यात्री को हास्यास्पदकारणों से रोका गया। अरुणाचल प्रदेश निर्वादित भारतीय क्षेत्र है और इसके निवासी भारतीय पासपोर्ट लेकर यात्रा करने का पूर्ण अधिकार रखते हैं। 

सूत्र ने यह भी कहा कि चीनी अधिकारियों की यह कार्रवाई नागर विमानन से जुड़े शिकागो और मॉन्ट्रियल कन्वेंशन का उल्लंघन करती है। सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्ष सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन चीनी पक्ष की ऐसी कार्रवाइयां प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं पैदा करती हैं। 



पीड़िता की मां ने क्या कहा?
पीटीआई से बातचीत में उनकी मां सांग छॉम थोंगडोक ने कहा कि पेमा ने खौफनाक अनुभव झेला। लेकिन वह 'बहुत समझदार और मजबूत' हैं और दबाव में नहीं झुकीं। उन्होंने कहा, जब यह समस्या आई, तो उन्होंने सबसे पहले अपने दिवंगत पिता के दोस्त से दिल्ली में संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें चीन में भारतीय दूतावास से जुड़ने में मदद की और उन्होंने मदद करके उन्हें चीन से बाहर यात्रा करने में सक्षम बनाया। वह फिलहाल बैंकॉक, थाईलैंड में हैं। 

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजु और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू को पत्र लिखा है। थोंगडोक ने कहा कि उनकी बेटी ने राष्ट्रीय राजधानी में अपने प्रारंभिक वर्ष बिताए, दिल्ली विश्वविद्यालय के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से बी.कॉम की पढ़ाई की और उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन गईं।

उन्होंने कहा, मेरी बेटी करीब 10 साल से ब्रिटेन में रह रही हैं। लेकिन वह भारतीय नागरिक हैं। वह एक वित्तीय कंपनी में काम करती हैं और अक्सर यात्रा करती हैं। लेकिन पहले कभी किसी हवाई अड्डे पर इस तरह की समस्या का सामना नहीं किया।  थोंगडोक ने कहा कि परिवार के पास राष्ट्रीय राजधानी में एक फ्लैट भी है और उनके पति की 2021 में कोविड-19 से मृत्यु के बाद वह अपना समय अपने पैतृक स्थान और दिल्ली में बिताती हैं। 

यह घटना उस पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें चीन अरुणाचल प्रदेश पर लंबे समय से और कई बार दावा करता है, जिसे वह 'दक्षिण तिब्बत' कहता है। भारत ने लगातार इन दावों को खारिज किया है और कहा है कि यह राज्य देश का अभिन्न और अटूट हिस्सा है। बीजिंग अक्सर कूटनीतिक और प्रशासनिक उकसावे के जरिये अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश करता है, जिसका भारत कड़ा विरोध करता है।

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