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चार साल की उम्र में दोनों हाथ कटे तो मां-बाप ने छोड़ा साथ, अब पैरों से लिखी सफलता की दास्तां

Sun, 28 Jul 2019 07:50 PM IST
Trainee Trainee अमित शर्मा , अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा , अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Sun, 28 Jul 2019 07:50 PM IST
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Inspirational Story: handicapped man Sunil Kumar makes painting by foot
सुनिल कुमार - फोटो : अमर उजाला

सुनील कुमार सिर्फ चार साल के थे जब एक हादसे ने उनके दोनों हाथ छीन लिए। मां-बाप को इस घड़ी में उनका साथ देना चाहिए था, लेकिन शायद बच्चे की पूरी जिंदगी में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की हिम्मत उनमें नहीं थी। उन्होंने बच्चे को अस्पताल में उसकी किस्मत पर छोड़ दिया और वहां से चले गये। लेकिन सुनील कुमार की किस्मत में दर-दर की ठोकरें खाने की बजाय कुछ और ही लिखा था। उनकी किस्मत ने उन्हें एक ऐसे आश्रम में पहुंचा दिया जहां ऐसे विशेष बच्चों को जीवन जीने की सीख दी जाती है। यहां सुनील ने अपने पैरों को हाथ बनाने का हुनर सीखा। उन्होंने पैरों की अँगुलियों से न सिर्फ अपने सामान्य कामकाज करना सीखा, बल्कि उन्हीं की मदद से पेंटिंग ब्रश पकड़ना भी शुरू कर दिया। आज वे पैर की अँगुलियों से वो काम कर रहे हैं जो करोड़ों सामान्य लोग भी नहीं कर पाते। अपनी अद्भुत सफलता से सुनील कुमार ऐसे लोगों को प्रेरणा दे रहे हैं जो जिंदगी की परेशानियों के सामने हार मान लेते हैं और गलत राह अपना लेते हैं। 

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Inspirational Story: handicapped man Sunil Kumar makes painting by foot
सुनिल कुमार की चित्रकारी - फोटो : अमर उजाला

सुनील कुमार  ने अमर उजाला को बताया कि वे पंचकुला हरियाणा के आसपास कहीं रहते थे। एक दिन बिजली की चपेट में आकर वे बुरी तरह घायल हो गये। मां-बाप ने इलाज के लिए उन्हें चंडीगढ़ पीजीआई में भर्ती कराया, लेकिन बिजली की चपेट में बुरी तरह आ जाने के कारण उनके दोनों हाथों ने उनका साथ छोड़ दिया। शायद मां-बाप इस परेशानी को उठाने की हिम्मत नहीं दिखा पाए। उन्होंने उन्हें अस्पताल में छोड़ दिया और वहां से चले गये। एक महिला को उन पर दया आई। उन्हीं की मदद से वे मदर टेरेसा हरियाणा साकेत काउन्सिल परिषद में आये। यहीं उनकी जिंदगी ने आकार लेना शुरू कर दिया और आज इस मुकाम तक पहुंची है जहां उन्हें भी खुद पर गर्व महसूस होता है। तब से आज तक यही उनका ठिकाना है। अब सुनील कुमार अपने जैसे लोगों को प्रेरित करना चाहते हैं।

 

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Inspirational Story: handicapped man Sunil Kumar makes painting by foot
सुनिल कुमार की चित्रकारी - फोटो : अमर उजाला

काउन्सिल में आने के बाद उनकी पढ़ाई-लिखाई भी शुरू हुई और जिंदगी की बदली सच्चाई से लड़ाई भी, जो उन्हें खुद के बूते पर लड़नी थी। प्रशिक्षकों की मदद से उन्होंने धीरे-धीरे पैरों की अँगुलियों से पेन पकड़ना और कम्प्यूटर के की-बोर्ड को साधना सीखा। इस तरह उनकी शिक्षा ‘डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन’ तक पहुंची। लेकिन सुनील को कम्प्यूटर से ज्यादा मजा ब्रश और पेंट से चित्र उकेरने में आता था। इसी लगाव ने उन्हें एक चित्रकार बनने को प्रेरित किया और आज वे एक सफल चित्रकार के रूप में पहचान बना चुके हैं। 

 

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सुनिल कुमार - फोटो : अमर उजाला

राष्ट्रपति से मिला पुरस्कार

सुनील की अद्भुत क्षमता धीरे-धीरे उनकी सफलता के राह खोलने लगी। एक बार उन्होंने ‘सेव पांडा’ थीम पर एक विशेष चित्र बनाया। इस चित्र के लिए उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल से विशेष सम्मान भी मिला। सुनील बताते हैं कि इसके बाद उन्होंने इसी को अपनी जिंदगी बना लिया। आज सुनील कुमार की पेंटिंग काफी ऊंची कीमतों में बिकती है जो पांच सितारा होटलों की लॉबी से लेकर सामान्य लोगों के घरों की शोभा बढ़ा रही है। दुनिया पर यही ‘जीत’ उन्हें सुकून दे रही है और जिंदगी जीने का मकसद भी। 

 

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सुनिल कुमार की चित्रकारी - फोटो : अमर उजाला

यहां से मिली मदद  

सुनील कुमार की कला को लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका केपीसिटी फाउंडेशन ने निभाई। फाउंडेशन के एक शीर्ष अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि वे यह नहीं चाहते कि समाज दिव्यांग बच्चों को दया की दृष्टि से देखे, उन पर तरस खाकर उनकी मदद करे। बल्कि वे उनमें ऐसा हुनर विकसित करना चाहते हैं जिनके दम पर वे किसी भी अन्य सामान्य व्यक्ति से मुकाबला कर सकें। मुकेश कुमार के मुताबिक़ सुनील के बनाये चित्रों को वे विभिन्न प्लेटफॉर्म पर रखते हैं। जिन्हें उनकी कला पसंद आती है, वे उसकी उचित कीमत देकर ले जाते हैं। इस समय भी दिल्ली के प्रगति मैदान के हॉल नम्बर 11 में उनकी पेंटिंग्स की एक प्रदर्शनी लगी है। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि देश के बड़े-बड़े होटल और उद्योगपति अपनी इमारतों में सजावट के लिए फाउंडेशन के बच्चों के बनाये चित्रों को खरीदते हैं। वे सुनील कुमार के जैसे बच्चों को इसी तरह आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं।

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