नोटबंदी के बीच संभलकर करें ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, पैसे उड़ाने की फिराक में हैकर्स
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देश धीरे-धीरे डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। ज्यादातर लोग नकद भुगतान के बजाय ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधी भी और ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। सिमैंटेक के नॉर्टन ने बृहस्पतिवार को सालाना नॉर्टन साइबर सिक्योरिटी इनसाइट्स रिपोर्ट के भारत से जुड़े नतीजे जारी किए।
यह रिपोर्ट 21 बाजारों में 18 साल से अधिक उम्र के 20,907 गैजेट यूजर्स पर किया गया ऑनलाइन सर्वे है। रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ते ई-ट्रांजेक्शन को देखते हुए हैकर्स ने भी अपनी तरफ से कोशिशें बढ़ा दी हैं और भारतीय उपभोक्ता इस मामले में लापरवाही बरत रहे हैं।
रिपोर्ट में पाया गया कि सालभर में साइबर अपराध का शिकार हुए लोगों का अभी भी लापरवाही बरतना जारी है। 79 फीसदी उपभोक्ता जानते हैं कि ऑनलाइन माध्यमों पर अपनी सूचनाओं की सुरक्षा करनी चाहिए लेकिन फिर भी वे पासवर्ड साझा करते रहते हैं। इसके अलावा हर 5 में से 1 उपभोक्ता के पास कम से कम एक ऐसा उपकरण है, जिसकी सुरक्षा का इंतजाम नहीं किया गया है।
नॉर्टन बाय सिमैंटेक के कंट्री मैनेजर रितेश चोपड़ा ने कहा कि एक ओर जहां उपभोक्ता उदासीन बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर हैकर अपनी धार पैनी कर रहे हैं और लोगों की असावधानी का फायदा उठाने के लिए अपने तरीकों में बदलाव कर रहे हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण कदम उठाने की जरूरत है।
भारतीयों को रास आता है सार्वजनिक वाई-फाई
बात जब सार्वजनिक वाई-फाई की हो तो 27 फीसदी भारतीय उपभोक्ता हवाई अड्डों, कॉफी की दुकानों आदि जगहों पर उपलब्ध सार्वजनिक वाई-फाई कनेक्शन का नियमित तौर पर उपयोग करते हैं।
लगभग 59 फीसदी उपभोक्ता मानते हैं कि सार्वजनिक वाई-फाई से वित्तीय जानकारी ऑनलाइन दर्ज करना किसी सार्वजनिक जगह पर अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड नंबर को जोर-जोर से पढ़ने से ज्यादा जोखिम भरा है। 70 फीसदी का कहना है कि ईमेल देखने, दस्तावेज भेजने और आने-जाने के दौरान अकाउंट में लॉग-इन करने के लिहाज से सार्वजनिक वाई-फाई उपयोगी है।
सर्वे में शामिल आधे लोगों का मानना है कि सार्वजनिक वाई-फाई पर अपना अकाउंट खोलने या निजी जानकारी डालने के बाद वे साइबर चोरों की जद में आ सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद वह ऐसा करते हैं।
भारतीयों के रैंसमवेयर का शिकार होने का ज्यादा खतरा
33 फीसदी भारतीय या तो रैंसमवेयर (पैसा ऐंठने के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर) का खुद शिकार हुए हैं या फिर इससे प्रभावित लोगों के बारे में जानते हैं।
तकरीबन 83 फीसदी पीड़ितों पर ऐसे हमले पिछले एक साल के दौरान हुए हैं, जो इस संकट के लगातार बढ़ने का संकेत देता है।
इनमें से 27 फीसदी पीड़ितों को अपनी हैक की गई फाइलों को प्राप्त करने के लिए वास्तविक तौर पर फिरौती देनी पड़ी है। इसके बावजूद हमले के शिकार 26 फीसदी पीड़ित फिरौती देने के बाद भी अपनी फाइलें प्राप्त नहीं कर सके।
एहतियात के उपाय
- मजबूत व यूनीक पासवर्ड लगाएं और हर तीन माह पर बदलें
- अनचाहे संदेशों व अटैचमेंट्स को खोलने व अनायास आई लिंक पर क्लिक करने से बचें
- महत्वपूर्ण डाटा का रखें बैकअप
- अपने सभी उपकरणों को उन्नत, मल्टी प्लेटफॉर्म सॉल्यूशन से सुरक्षित बनाएं
- असुरक्षित सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क्स में व्यक्तिगत सूचनाओं (ऑनलाइन बिल भुगतान, सोशल मीडिया अकाउंट में लॉग इन करना, क्रेडिट कार्ड से
भुगतान आदि) को साझा करने से बचें
- नेटवर्क कनेक्टेड उपकरण जैसे, राउटर आदि को इंस्टॉल करते समय डिफॉल्ट पासवर्ड को बदलना याद रखें और वायरलेस कनेक्शंस को भी वाई-फाई कोड से सुरक्षित बनाएं