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हबीबगंज से रानी कमलापति: किसी भी रेलवे स्टेशन का नाम कैसे बदला जाता है, जानिए क्या है प्रक्रिया
Mon, 15 Nov 2021 06:40 PM IST
प्रतिभा ज्योति
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Mon, 15 Nov 2021 06:40 PM IST
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रानी कमलापति रेलवे स्टेशन
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भोपाल में रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया। इस स्टेशन का नाम पहले हबीबगंज रेलवे स्टेशन था, जिसे बदलकर अब रानी कमालपति स्टेशन कर दिया गया है। स्टेशन एयरपोर्ट जैसी वर्ल्ड क्लास सुविधाओं के साथ तैयार किया गया है। पीएम मोदी ने उद्घाटन के बाद कहा कि नाम बदलने से स्टेशन का महत्व बढ़ा है।मध्य प्रदेश जनसंपर्क के मुताबिक, इस स्टेशन का निर्माण 1905 में किया गया था। उस समय इस स्टेशन को शाहपुर के नाम से जाना जाता था। 1979 में इसका नाम हबीबगंज कर दिया गया। रानी कमलापति गोंड समुदाय की रानी थीं। उनके नाम पर ही हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति स्टेशन रखा गया है। रानी ने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए जलसमाधि ले ली थी।
स्टेशनों के नाम क्यों बदले जाते हैं?
हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति किए जाने से पहले भी देश के कई स्टेशनों के नाम बदले गए हैं। 2014 के बाद से, कई स्टेशनों को नए नाम दिए गए हैं। जैसे मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलककर 2018 में पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन कर दिया गया। इसी साल इलाहाबाद स्टेशन को भी नया नाम प्रयागराज मिला। जुलाई 2021 में पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के मंडुवाडीह स्टेशन का नाम बदलकर बनारस कर दिया गया है। इसी तरह इस साल दिवाली पर फैजाबाद जंक्शन स्टेशन का नाम भी बदलकर अयोध्या कैंट स्टेशन रखा गया है।
भारतीय रेलवे
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SELF
भारतीय रेलवे को हर साल ऐतिहासिक कारणों या स्थानीय भावनाओं का हवाला देते हुए स्टेशनों के नाम बदलने के लिए नागरिक समाज समूहों, राजनीतिक दलों और अन्य लोगों के कई अनुरोध मिलते रहते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने झांसी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर 'वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन' करने के लिए केंद्र को एक प्रस्ताव भेजा हुआ है।
ऐसे में स्वभाविक तौर पर लोगों के जेहन में एक सवाल अक्सर उठता होगा कि क्या स्टेशन के नाम को बदलने का फैसला रेलवे खुद करती है और करती है तो किस आधार पर?
रेलवे नहीं, राज्य सरकार करती है फैसला
दरअसल किसी भी रेलवे स्टेशन के नाम बदलने का फैसला राज्य सरकार करती है। भले ही रेलवे केंद्र सरकार से संबंधित है लेकिन नाम बदलने का फैसला संबंधित राज्य सरकार के विवेक पर छोड़ दिया गया है। स्टेशनों के नाम बदलना पूरी तरह से राज्य का विषय है।
राज्य सरकार कैसे बदलती है स्टेशन का नाम
ऐतिहासिक महत्व के धरोहर की परंपरा को जीवित रखने या लंबे समय से चली आ रही लोगों की मांग को पूरा करने के लिए राज्य सरकार किसी रेलवे स्टेशन का नाम बदलती है। जानकार बताते हैं कि ऐसा सियासी कारणों से भी किया जा सकता है और यह होता रहा है। जैसे 1996 में, जब इतिहास और स्थानीय भावनाओं को ध्यान रखते हुए मद्रास शहर का नाम आधिकारिक तौर पर 'चेन्नई' रखा गया तो रेलवे स्टेशन का नाम भी मद्रास से बदलकर चेन्नई कर दिया गया।
ऐसे में स्वभाविक तौर पर लोगों के जेहन में एक सवाल अक्सर उठता होगा कि क्या स्टेशन के नाम को बदलने का फैसला रेलवे खुद करती है और करती है तो किस आधार पर?
रेलवे नहीं, राज्य सरकार करती है फैसला
दरअसल किसी भी रेलवे स्टेशन के नाम बदलने का फैसला राज्य सरकार करती है। भले ही रेलवे केंद्र सरकार से संबंधित है लेकिन नाम बदलने का फैसला संबंधित राज्य सरकार के विवेक पर छोड़ दिया गया है। स्टेशनों के नाम बदलना पूरी तरह से राज्य का विषय है।
राज्य सरकार कैसे बदलती है स्टेशन का नाम
ऐतिहासिक महत्व के धरोहर की परंपरा को जीवित रखने या लंबे समय से चली आ रही लोगों की मांग को पूरा करने के लिए राज्य सरकार किसी रेलवे स्टेशन का नाम बदलती है। जानकार बताते हैं कि ऐसा सियासी कारणों से भी किया जा सकता है और यह होता रहा है। जैसे 1996 में, जब इतिहास और स्थानीय भावनाओं को ध्यान रखते हुए मद्रास शहर का नाम आधिकारिक तौर पर 'चेन्नई' रखा गया तो रेलवे स्टेशन का नाम भी मद्रास से बदलकर चेन्नई कर दिया गया।
हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम गोंड रानी कमलापति पर रखने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र को लिखी चिट्ठी।
- फोटो :
Amar Ujala
प्रक्रिया क्या है
राज्य सरकार जिस भी स्टेशन का नाम बदलना चाहती है, उसकी मंजूरी लेने के लिए इन मामलों के नोडल मंत्रालय, गृह मंत्रालय को अपना प्रस्ताव भेजती हैं। गृह मंत्रालय इस पर अपनी मंजूरी देने से पहले रेल मंत्रालय को भी लूप में रखता है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रस्तावित नए नाम वाला कोई अन्य स्टेशन भारत में कहीं भी मौजूद न हो। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय, डाक विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग से अनापत्ति लेता है और उसके बाद किसी स्थान या स्टेशन का नाम बदलने पर अपनी सहमति देता है।
हबीबगंज रेलवे स्टेशन के उद्घाटन से महज कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम आदिवासी रानी रानी कमलापति के नाम पर रखने का अनुरोध किया था। पत्र में सरकार ने तर्क दिया कि रेलवे स्टेशन का नाम बदलने से रानी कमलापति की विरासत और बहादुरी का सम्मान होगा। राज्य के परिवहन विभाग के पत्र में कहा गया कि स्टेशन का नाम बदलना केंद्र सरकार के 15 नवंबर को आदिवासी नेता और स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की याद में 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाने के निर्णय के अनुसार है।
कोड की तलाश शुरू होती है
एक बार जब राज्य सरकार सभी नियत प्रक्रियाओं का पालन कर लेती है और भारतीय रेलवे को नाम बदले जाने की सूचना देती है तब भारतीय रेलवे का काम शुरू हो जाता है। रेलवे संचालन के उद्देश्य से स्टेशन "कोड" की तलाश की जाती है। इसी कोड को टिकट प्रणाली में फीड किया जाता है ताकि कोड के साथ स्टेशन का नया नाम इसके टिकटों और ट्रेन की दूसरी जानकारियों में दिखाई दे।
राज्य सरकार जिस भी स्टेशन का नाम बदलना चाहती है, उसकी मंजूरी लेने के लिए इन मामलों के नोडल मंत्रालय, गृह मंत्रालय को अपना प्रस्ताव भेजती हैं। गृह मंत्रालय इस पर अपनी मंजूरी देने से पहले रेल मंत्रालय को भी लूप में रखता है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रस्तावित नए नाम वाला कोई अन्य स्टेशन भारत में कहीं भी मौजूद न हो। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय, डाक विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग से अनापत्ति लेता है और उसके बाद किसी स्थान या स्टेशन का नाम बदलने पर अपनी सहमति देता है।
हबीबगंज रेलवे स्टेशन के उद्घाटन से महज कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम आदिवासी रानी रानी कमलापति के नाम पर रखने का अनुरोध किया था। पत्र में सरकार ने तर्क दिया कि रेलवे स्टेशन का नाम बदलने से रानी कमलापति की विरासत और बहादुरी का सम्मान होगा। राज्य के परिवहन विभाग के पत्र में कहा गया कि स्टेशन का नाम बदलना केंद्र सरकार के 15 नवंबर को आदिवासी नेता और स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की याद में 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाने के निर्णय के अनुसार है।
कोड की तलाश शुरू होती है
एक बार जब राज्य सरकार सभी नियत प्रक्रियाओं का पालन कर लेती है और भारतीय रेलवे को नाम बदले जाने की सूचना देती है तब भारतीय रेलवे का काम शुरू हो जाता है। रेलवे संचालन के उद्देश्य से स्टेशन "कोड" की तलाश की जाती है। इसी कोड को टिकट प्रणाली में फीड किया जाता है ताकि कोड के साथ स्टेशन का नया नाम इसके टिकटों और ट्रेन की दूसरी जानकारियों में दिखाई दे।