H3N2 Flu: मास्क हटाया तो हो सकते हैं इन्फ्लूएंजा के शिकार, इन तीन वजहों से छह माह में बढ़े 200 फीसदी केस
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विस्तार
कोरोना महामारी के दो साल बाद एक बार फिर फ्लू के मामले अचानक से बढ़ गए हैं। सभी राज्यों में फ्लू के केस सामने आ रहे हैं। इस फ्लू की लहर के पीछे सबसे बड़ा कारण मास्क नहीं लगाना और इन्फ्लूएंजा वायरस है। नवंबर 2022 से फ्लू के मामले 200 फीसदी तक बढ़ गए हैं। हालांकि फरवरी 2023 के मध्य से संक्रमण के मामलों में कमी देखी जा रही है। इस वायरस के संक्रमण के बढ़ने के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं। इनमें नवंबर से जनवरी के दौरान सर्दी का मौसम, वातावरण में प्रदूषण और वायरस संक्रमण का प्रसार बढ़ना शामिल है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद का कहना है कि देश में एक और कोरोना वायरस के मामले तो कम हो रहे हैं, लेकिन सर्दी-खांसी और बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह इन्फ्लूएंजा वायरस की वजह से हो रहा है। बीते दो-तीन महीनों से इन्फ्लूएंजा वायरस के A सबटाइप H3N2 के कारण बुखार और सर्दी-खांसी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। H3N2 के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। जबकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कहना कि अभी मौसमी बुखार फैल रहा है जो पांच से सात दिन तक रहता है। बुखार तो तीन दिन में चला जा रहा है, लेकिन सर्दी-खांसी तीन हफ्तों तक रह रही है। प्रदूषण के कारण भी 15 साल से कम और 50 साल से ज्यादा की उम्र के लोगों में सांस की नली में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं।
इन तीन कारणों से तेजी से फैल रहा है वायरस
अमर उजाला से चर्चा में सफदरजंग अस्पताल के प्रोफेसर, निदेशक कम्यूनिटी मेडिसिन डॉ. जुगल किशोर कहते हैं कि वायरस हमेशा से ही हमारे आसपास रहे हैं। लेकिन लोगों द्वारा मास्क पहनने की वजह से पिछले दो साल से इसका प्रसार घट गया था। लोगों की भीड़ और मास्क नहीं पहनने से अब वायरस को फैलने का मौका मिल गया है। इस वायरस से सभी आयु वर्ग के लोग इससे संक्रमित हो रहे हैं। चिकित्सकों के पास बड़ी संख्या में सांस संबंधी तकलीफ के साथ बच्चे और बुजुर्ग पहुंच रहे हैं। इस वायरस के संक्रमण के मामले बढ़ने के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं। इनमें नवंबर से जनवरी के दौरान सर्दी का मौसम, वातावरण में प्रदूषण और वायरस संक्रमण का प्रसार बढ़ना शामिल है। फ्लू के मामले अक्तूबर-नवंबर से आने शुरू हो गए थे और उसके बाद यह थमा नहीं। शुरुआत में लोगों को गले के खराश की शिकायत होती है और बाद में खांसी की समस्या शुरू हो जाती है। यह कई तरह के वायरस का संयोजन प्रतीत होता है।
यह वायरस हमारे आसपास ही रहते हैं मौजूद
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड के दौरान लोगों के बीच वायरस को लेकर जागरूकता बढ़ने से लोग वायरोलॉजी और इसके स्वरूपों के विशिष्ट नामों के बारे में सजग हुए हैं। ये वायरस लंबे समय से हमारे आसपास है और लोग इससे संक्रमित होते रहे हैं। आज वायरस के स्वरूप में बदलाव हुआ है। लेकिन टीके का मौजूदा फॉर्मूलेशन इस फ्लू को नियंत्रित करने में कारगर नहीं हो रहा है। हालांकि संक्रमण के व्यापक स्तर पर प्रसार को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन टीके के नए फॉर्मूलेशन ला सकता है। WHO ने भी इन्फ्लूएंजा टीके के लिए वायरस के कुछ स्वरूप को चिह्नित किया है। यह अभी की तुलना में दो साल पहले काफी असरदार था। यह सामान्य फ्लू था, लेकिन इसमें लगातार म्यूटेट हो रहा है। WHO नए स्वरूप को लेकर जल्द दिशा निर्देश जारी कर सकता है।
पिछले साल इसलिए कम आए थे मामले
डॉक्टरों का कहना है कि लोगों में इन्फ्लूएंजा के टीके को लेकर जागरूकता की कमी है। इस तरह के टीके को हर साल लेना होता है। ताकि बीमारी से बचा जा सके। आज शिक्षित लोगों के बीच भी इस टीकाकरण के बारे में जानकारी कम है। टीके लगने के बाद भी लोग फ्लू से संक्रमित हो सकते हैं, लेकिन इसकी गंभीरता अपेक्षाकृत कम हो सकती है। अक्तूबर-नवंबर में सर्दियां शुरू होते ही इस टीके को लेना सबसे मुफीद समय होता है। पिछले साल भी इसी समय कोरोना वायरस का ओमीक्रोन स्वरूप का प्रसार हुआ था। इसलिए इस सामान्य फ्लू के मामले कम नजर आ रहे थे।
ये है इन्फ्लूएंजा वायरस
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को हेल्थ एक्सपर्ट्स के साथ H3N2 इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामलों पर एक बैठक की। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि देश में कोरोना के मामले कम हुए हैं, लेकिन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं। यह फ्लू कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे बचने के लिए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनने की सलाह दी है। पिछले दो महीने से राजधानी दिल्ली समेत भारत के कई हिस्सों में इन्फ्लूएंजा के मामले बढ़ रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मौसमी इन्फ्लूएंजा वायरस चार टाइप- A, B, C और D का होता है। इनमें A और B टाइप से मौसमी फ्लू फैलता है। हालांकि, इनमें इन्फ्लूएंजा A टाइप को महामारी का कारण माना जाता है। इन्फ्लूएंजा टाइप A के दो सबटाइप होते हैं। एक होता है H3N2 और दूसरा- H1N1। वहीं, इन्फ्लूएंजा टाइप B के सब टाइप नहीं होते, लेकिन इसके लाइनेज हो सकते हैं। टाइप C को बेहद हल्का माना जाता है और खतरनाक नहीं होता। जबकि, टाइप D मवेशियों में फैलता है।
आईसीएमआर के मुताबिक, कुछ महीनों में कोविड के मामले कम हुए हैं, लेकिन H3N2 के मामले में बढ़ोतरी हुई है। सर्विलांस डेटा बताता है कि 15 दिसंबर के बाद से H3N2 के मामले बढ़े हैं। सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन से पीड़ित आधे से ज्यादा लोग H3N2 से संक्रमित मिले हैं।
इस तरह बचे इन्फ्लूएंजा फ्लू से
- फेस मास्क पहनें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
- हाथों को नियमित रूप से पानी और साबुन से धोते रहें।
- नाक और मुंह छूने से बचें।
- खांसते या छींकते समय नाक और मुंह को अच्छी तरह कवर करें।
- खुद को हाइड्रेट रखें, पानी के अलावा फ्रूट जूस या अन्य पेय पदार्थ लेते रहें।
- बुखार आने की स्थिति में पैरासिटामोल लें।
इस तरह फैलता है ये वायरस
चूंकि ये वायरल बीमारी है, इसलिए किसी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में ये आसानी से फैल सकता है। WHO के मुताबिक, भीड़ भाड़ वाली जगहों पर ये आसानी से फैल सकता है। इन्फ्लूएंजा से संक्रमित कोई व्यक्ति जब खांसता या छींकता है, तो उसके ड्रॉपलेट हवा में एक मीटर तक फैल सकते हैं और जब कोई दूसरा व्यक्ति सांस लेता है तो ये ड्रॉपलेट उसके शरीर में चले जाते हैं और उसे संक्रमित कर देते हैं। किसी संक्रमित सतह को छूने से भी ये वायरस फैल सकता है। लिहाजा, खांसते या छींकते समय मुंह को ढंकना जरूरी है। साथ ही बार-बार अपने हाथ भी धोते रहना चाहिए।