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राष्ट्रगान बजने पर खड़ा नहीं हो पाया दिव्यांग तो दी गालियां, कहा 'पाकिस्तानी'
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Mon, 02 Oct 2017 07:46 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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राष्ट्रगान के सम्मान में ना खड़े होने पर एक दिव्यांग शख्स को कथित तौर पर अपशब्द कहे गए। यह मामला गुवाहाटी का है। जिस शख्स के साथ ऐसा हुआ है उनका नाम अरमान अली है। अली 36 साल के हैं। वह शुक्रवार को फिल्म देखने के लिए मल्टीप्लेक्स गए हुए थे। वहीं पर उनके साथ यह सब हुआ।
अरमान खुद शिशू सारथी नाम का एक एनजीओ चलाते हैं। वह एनजीओ दिव्यांग लोगों को सशक्त बनने में मदद करता है। अरमान उसके कार्यकारी निदेशक हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, अरमान हॉल की आगे की सीट पर बैठे हुए थे। फिल्म के शुरू होने पर राष्ट्रगान बजा। अरमान खड़े तो नहीं हो सकते थे इसलिए वह कुर्सी पर ही सीधे होकर बैठ गए।
पढ़ें: राष्ट्रगान के दौरान जरूरी है खड़े होना, क्या कहता है कानून?
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फिर जैसे ही राष्ट्रगान खत्म हुआ तो पीछे बैठे दो लोगों ने उनको कथित रूप से गालियां देना शुरू कर दिया। अरमान के मुताबिक, उनमें से एक ने कहा सामने एक 'पाकिस्तानी' बैठा है। इसके बाद अरमान ने जब पीछे मुड़कर देखा तो वे दोनों अजीब तरह से हंसने लगे। अरमान ने बताया कि अब वह चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को इसके बारे में लिखने वाले हैं।
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अरमान खुद शिशू सारथी नाम का एक एनजीओ चलाते हैं। वह एनजीओ दिव्यांग लोगों को सशक्त बनने में मदद करता है। अरमान उसके कार्यकारी निदेशक हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, अरमान हॉल की आगे की सीट पर बैठे हुए थे। फिल्म के शुरू होने पर राष्ट्रगान बजा। अरमान खड़े तो नहीं हो सकते थे इसलिए वह कुर्सी पर ही सीधे होकर बैठ गए।
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फिर जैसे ही राष्ट्रगान खत्म हुआ तो पीछे बैठे दो लोगों ने उनको कथित रूप से गालियां देना शुरू कर दिया। अरमान के मुताबिक, उनमें से एक ने कहा सामने एक 'पाकिस्तानी' बैठा है। इसके बाद अरमान ने जब पीछे मुड़कर देखा तो वे दोनों अजीब तरह से हंसने लगे। अरमान ने बताया कि अब वह चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को इसके बारे में लिखने वाले हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दी हुई है छूट
demo
- फोटो : demo
नवंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाने को जरूरी किया था। साथ ही सबको खड़े होने के लिए भी कहा गया था। लेकिन बाद में साफ किया था कि दिव्यांग लोगों को खड़े होने की जरूरत नही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को सिनेमा हॉल के अंदर खड़ा होना जरूरी नहीं है।
राष्ट्रगान बजाने की शुरुआत 1960 में हुई थी। यह सैनिकों के सम्मान और राष्ट्रप्रेम की भावना के लिए किया जाता था। लेकिन बाद में शिकायतें मिलीं कि हॉल में राष्ट्रगान बजाना उसका अपमान है। फिर करीब 40 साल पहले सरकार ने इसे बंद करवा दिया था। फिर 2003 में महाराष्ट्र ने इसको दोबारा जरूरी किया था।
सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान को सम्मान दिलाने के लिए भोपाल के श्याम नारायण चौकसे ने 14 साल की लड़ाई लड़ी थी। उन्हीं की पीआईएल पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मूवी से पहले जन गण मन बजाए जाने का ऑर्डर दिया था।
राष्ट्रगान बजाने की शुरुआत 1960 में हुई थी। यह सैनिकों के सम्मान और राष्ट्रप्रेम की भावना के लिए किया जाता था। लेकिन बाद में शिकायतें मिलीं कि हॉल में राष्ट्रगान बजाना उसका अपमान है। फिर करीब 40 साल पहले सरकार ने इसे बंद करवा दिया था। फिर 2003 में महाराष्ट्र ने इसको दोबारा जरूरी किया था।
सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान को सम्मान दिलाने के लिए भोपाल के श्याम नारायण चौकसे ने 14 साल की लड़ाई लड़ी थी। उन्हीं की पीआईएल पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मूवी से पहले जन गण मन बजाए जाने का ऑर्डर दिया था।