गुवाहाटी: भारतीय सेना के इंजीनियरों ने प्लास्टिक कचरे के प्रयोग कर किया सड़क निर्माण
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केंद्र सरकार ने एकल प्रयोग प्लास्टिक को प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही वह लोगों से भी अनुरोध कर रही है कि वह प्लास्टिक का कम से कम प्रयोग करें। वहीं, सरकार के इस अभियान के तहत गुवाहाटी स्थित नारंगी सैन्य स्टेशन ने एकल प्रयोग प्लास्टिक के कचरे से सड़क का निर्माण किया है।
Guwahati: Indian Army's Military Engineer Services is undertaking a pilot project at Narangi Military Station for road construction utilising plastic as partial substitute to bitumen. Approx 1.24 MT of waste plastic has been used to construct a road using the technology. pic.twitter.com/HG64T1XPih
— ANI (@ANI) November 29, 2019विज्ञापन
प्लास्टिक कचरे को कम करने, पुनः प्रयोग और पुनर्चक्रण करने के केंद्र सरकार के अभियान में देखते हुए नारंगी सैन्य स्टेशन ने एक टैक्नोलिजी का प्रयोग किया। इसके तहत डामर की जगह प्लास्टिक के 1.24 मीट्रिक टन कचरे से सड़क का निर्माण किया गया। इस अभियान को भारतीय सेना की सैन्य इंजीनियर सेवा द्वारा किया गया।
इस तकनीक में, कटे हुए प्लास्टिक कचरे को गर्म कोलतार के साथ मिलाकर सड़क का निर्माण किया जाता है। यह पर्यावरण हितैषी तकनीक है, जिसका उद्देश्य एक तरफ प्लास्टिक कचरे के खतरे को कम करना है और दूसरी ओर सड़कों के टिकाऊपन में सुधार करना है।
सड़क निर्माण में प्लास्टिक का उपयोग करने की परियोजना अपशिष्ट प्लास्टिक को कम करने, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण करने की एक पहल है। बेकार प्लास्टिक का उपयोग करके निर्मित सड़क लंबे समय तक चलती है। साथ ही निर्माण और रखरखाव के लिए सस्ता भी है और यह हमारे महासागरों और खाली पड़े मैदानों में जाने वाले प्लास्टिक की मात्रा को काफी कम कर देता है। सड़क निर्माण में अपशिष्ट प्लास्टिक का उपयोग प्लास्टिक कचरा प्रबंधन की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक को सुलझाने में काफी मदद कर सकता है।