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गुप्तेश्वर पांडेय से पहले भी कई नौकरशाह आए हैं सियासत में, कोई डिप्टी सीएम बना, तो कोई केंद्र में मंत्री
Thu, 24 Sep 2020 02:31 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 24 Sep 2020 02:31 PM IST
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Gupteshwar Pandey
- फोटो : Facebook/Gupteshwar (For Reference Only)
नौकरशाहों का राजनीति में आना कोई नई बात नहीं है। गुप्तेश्वर पांडेय के उदाहरण से यह मामला फिर से ताजा हो गया है। इसके पहले भी कई आईएएस और आईपीएस भारतीय राजनीति में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। इनमें से कुछ ने राजनीति की सीढ़ियों पर बहुत तेजी से ऊपर चढ़े तो, कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें राजनीति रास नहीं आई। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में बिहार पुलिस के डीजी स्तर के दो पूर्व अधिकारी ताल ठोकने की तैयारी में नजर आ रहे हैं।
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बिहार में इस साल के आखिर तक विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गुप्तेश्वर पांडेय का कार्यकाल 28 फरवरी, 2021 तक था। लेकिन 5 महीने पहले ही पद छोड़ने देने वाले पांडेय के राजनीति में हाथ आजमे की चर्चा जोरों पर है। वे किस राजनीतिक दल में शामिल होंगे और चुनाव लड़ने या नहीं उसे लेकर उन्होंने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि उन्होंने बुधवार को कहा कि वे अभी किसी पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं और जब वह ऐसा करेंगे तो सभी को बता देंगे।
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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि वे किसी राजनीतिक दल में नहीं हैं और आगे भी किसी दल से जुड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है। जहां तक समाज सेवा की बात है, वे राजनीति में गए बिना भी ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा, मेरी सेवानिवृत्ति का सुशांत सिंह राजपूत मामले से कोई लेना-देना नहीं है। मैंने केवल एक असहाय पिता की मदद की है। उन्होंने आगे कहा कि मैंने देश की सेवा में तीन दशक से अधिक का समय बिताया है और कोई भी मेरी ईमानदारी पर उंगली नहीं उठा सकता।
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इस बीच मीडिया से बातचीत में गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा, "बिहार की जनता मुझसे बहुत प्यार करती है। मेरे पास 12 सीटों से चुनाव लड़ने का ऑफर है। मैं कहीं से भी चुनाव लड़ सकता हूं और जीत हासिल कर सकता हूं। लोगों द्वारा चुनाव लड़ने को वीआरएस से जोड़कर देखा जा रहा है, जो गलत है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि किन पार्टियों की तरफ से ये ऑफर दिए गए हैं।"
तीन पूर्व डीजीपी आ चुके हैं सियासी अखाड़े में
गुप्तेश्वर पांडेय से पहले बिहार के तीन पूर्व डीजीपी सियासी अखाड़े में उतर चुके हैं। पूर्व डीजीपी आशीष रंजन सिन्हा ने नालंदा से चुनाव लड़ा था, जहां से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। सीवान के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई के लिए चर्चा में रहे पूर्व डीजीपी डीपी ओझा ने भी चुनाव राजनीति में किस्मत आजमा चुके हैं। ओझा ने बेगूसराय सीट से सीपीआई(एमएल) के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा। हालांकि वे भी चुनावी राजनीति में सफल नहीं हो सके और अब सियासत से दूर रहते हैं।
सुनील कुमार
सुनील कुमार 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। इसी साल जुलाई में पुलिस भवन निर्माण निगम के डीजी के पद से सेवानिवृत्त हुए सुनील कुमार जनता दल (यूनाइटेड), जदयू में शामिल हो गए हैं। इस बार वे विधायकी का चुनाव लड़ सकते हैं। गोपालगंज से ताल्लुक रखने वाले पूर्व डीजीपी सुनील कुमार के भाई अनिल कुमार कांग्रेस के विधायक हैं।
विष्णु दयाल राम
बिहार में 1980 के दशक में आंख फोड़वा कांड ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थी। इसको लेकर राजनीति भी खूब हुई। इस कांड में तेजाब डालकर 30 से ज्यादा अपराधियों के आंख फोड़ने की घटना सामने आई थी। इनमें से ज्यादातर वारदातें भागलपुर की हैं। इन्हें लेकर भागलपुर के एसपी विष्णु दयाल राम पर आरोप लगे और सीबीआई जांच हुई। लेकिन सबूतों के अभाव में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। बताया जाता है कि प्रकाश झा ने साल 2003 में अपनी फिल्म गंगाजल इसी घटना पर आधारित कर बनाई थी। अब विष्णु दयाल राम झारखंड के पलामू से सांसद हैं।
1973 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे विष्णु दयाल राम दो बार झारखंड के डीजीपी रह चुके हैं। एक बार 2005 से 2006 और दूसरी बार 2007 से 2010 तक। बिहार के बक्सर जिले से संबंध रखने वाले विष्णु नौकरी से सेवानिवृत्ति के लगभग चार वर्षों बाद 2014 में भाजपा में शामिल हो गए। 2014 लोकसभा चुनावों में वे झारखंड की पलामू सीट से सांसद बने। इसके बाद 2019 में वे लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए। विष्णु कई संसदीय समितियों के सदस्य रह चुके हैं।
डीके पांडेय
डीके पांडेय 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं और सीआरपीएफ के एडीजी रह चुके हैं। 2015 से मार्च 2019 तक वे झारखंड के डीजीपी रहे। सेवानिवृत्ति के बाद अक्तूब 2019 में डीके पांडेय ने भाजपा का दामन थाम लिया। उन्हें झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास का करीबी माना जाता है। बीते झारखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने निरसा सीट से दावेदारी की थी लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी।
आरके सिंह
बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी आर के सिंह 2014 के लोकसभा चुनाव में सियासत के मैदान में उतरे। आर के सिंह केंद्रीय गृह सचिव रह चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद बिहार के आरा लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए। आर के सिंह 2019 लोकसभा चुनाव में आरा से भाजपा की टिकट पर फिर विजयी हुए और इस समय केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
केपी रमैया
2014 के लोकसभा चुनाव में बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी केपी रमैया भी प्रत्याशी के तौर पर मैदान में थे। केपी रमैया वीआरएस लेकर चुनाव में उतरे थे। सासाराम लोकसभा सीट से जदयू की टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन हार का सामना करना पड़ा।
आरएस पांडेय
पूर्व नौकरशाह आरएस पांडेय भी बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं। वे इस समय बगहा से भाजपा के विधायक हैं। बताया जाता है कि पांडेय लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया।
युमनाम जयकुमार सिंह
1976 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे युमनाम जयकुमार सिंह 2007 से 2012 तक मणिपुर के डीजीपी रहे। सेवानिवृत्ति के लगभग 5 वर्षों बाद वे सियासत के अखाड़े में कूद गए। 2017 में उरिपोक सीट से चुनाव जीतने के बाद एन वीरेन सिंह की सरकार में उन्होंने सीधे उप-मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल कर ली। अभी वे उरिपोक विधानसभा क्षेत्र से नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के विधायक हैं। जून के महीने में अपनी ही सरकार के खिलाफ बागी तेवर दिखाने वाले 9 विधायकों की वजह से राज्य की एनडीए सरकार अल्पमत में आ गई थी। हालांकि भाजपा ने किसी तरह सरकार बचा ली लेकिन युमनाम को पद से हटा दिया। एनपीपी ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से बर्खास्त कर दिया है।
प्रकाश मिश्रा
प्रकाश मिश्रा 1977 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। वे 2012 से 2014 तक ओडिशा के डीजीपी रहे। सिंतबर 2014 में विजिलेंस का आरोप लगाकर उन्हें डीजीपी के पद से हटा दिया गया। इस मामले में जमकर सियासत हुई। हालांकि कोर्ट ने जून 2015 में प्रकाश मिश्रा को आरोपों से मुक्त किया। सेवानिवृत्ति के बाद 2019 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें कटक सीट से टिकट दिया, लेकिन वे सियासत के अखाड़े में नाकाम हुए।
विकास नारायण राय
विकास नारायण राय 1977 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। विकास नारायण राय हरियाणा के डीजीपी रह चुके हैं। वे 2012 में सेवानिवृत्त हुए। विकास 2014 में आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए।