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'CM' बनने का सपना टूटा, अब शंकर सिंह वाघेला उठा सकते हैं बड़ा कदम

Sat, 22 Jul 2017 10:51 AM IST
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला Updated Sat, 22 Jul 2017 10:51 AM IST
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Gujrat leader shankar singh vaghela expelled from congress party
शंकर सिंह वाघेला - फोटो : ANI
दो दशकों से गुजरात कांग्रेस की धुरी रहे शंकर सिंह वाघेला को पार्टी से निकाल दिया गया है। उन्हें उनके जन्मदिन से ठीक पहले ऐसे वक्त पर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया, जब वो अपने जन्मदिन पर समर्थकों के बीच रैली में संभावित तौर पर खुद के नाम की घोषणा कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर करने वाले थे। पर पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि उन्हें पार्टी से बाहर निकाले जाने के 24 घंटों तक किसी को कोई खबर नहीं हुई, खुद शंकर सिंह वाघेला ने ही कांग्रेस पार्टी से निकाले जाने की सूचना अपने समर्थकों को दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने मुझे जनसभा से 24 घंटे पहले ही पार्टी से निकाल दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस से निकाले जाने के साथ ही मैं अब सक्रिय राजनीति से संन्यास ले रहा हूं। उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।
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वाघेला ने कहा कि मेरी प्रस्तावित जनसभा से ही कांग्रेस डर गई थी, इसीलिए उसने मुझे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया। शंकर सिंह वाघेला ने अपने समर्थकों से कहा,'कांग्रेस पार्टी ने मुझे 24 घंटे पहले ही पार्टी से निकाल दिया, ये सोच कर कि पता नहीं मैं क्या कहता। 'विनाश काले, विपरीत बुद्धि''। 
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शंकर सिंह वाघेला ने गांधीनगर में जन्मदिन सम्मेलन के दौरान कहा कि मुझे सत्ता की लालसा कभी नहीं रही। मैं आरएसएस से जुड़ा रहा हूं। भगवान शिव मेरे प्रेरणास्रोत हैं। भगवान शिव ने मुझे विषपान सिखाया है। वाघेला की रैली में उनके समर्थकों का हुजूम उमड़ा था। ऐसा माना जा रहा था कि वाघेला आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में खुलकर सामने आना चाहते थे, पर गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी के तीखे विरोध की वजह से पार्टी हाईकमान उनपर दांव नहीं खेलना चाहती थी। यही वजह है कि वाघेला ने अपने जन्मदिन पर सम्मेलन के आयोजन की घोषणा की, तो कांग्रेस ने आनन-फानन में उन्हें निकालने का फैसला कर लिया।

गौरतलब है कि शंकर सिंह वाघेला की 40 साल की राजनीति में वे देश की दोनों बड़ी पार्टियों से जुड़े रहे हैं। करीब 6 बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके वाघेला 1977 में पहली बार सांसद बने थे। साल 1995 के गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में वाघेला ने अहम रोल निभाया, पर उन्हें सीएम नहीं बनाया गया। इस बात से नाराज वाघेला ने बीजेपी छोड़कर 1995 में अपनी अलग पार्टी राष्ट्रीय जनता पार्टी बना ली थी। और कांग्रेस के समर्थन से गुजरात के मुख्यमंत्री बने। पर कुछ समय बाद ही उन्हें पद से हटना पड़ा और उन्होंने साल 1997 में राष्ट्रीय जनता पार्टी का कांग्रेस में विलय कर लिया। और खुद को गुजरात कांग्रेस के प्रमुख चेहरे के तौर पर स्थापित कर लिया। मौजूदा समय तक वोे  वाघेला गुजरात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे।

देश की राजनीति में ये अहम भूमिकाएं निभा सकते हैं वाघेला

शंकर सिंह वाघेला अपने जनाधार और आगामी चुनाव में कांग्रेस की मजबूत स्थिति को देखते हुए हाईकमान पर खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने का दबाव डाल रहे थे। पर वो सफल नहीं हुए। पार्टी ने 'बापू' के नाम से मशहूर वाघेला को अकेले खुश करने की जगह भर‍त सिंह सोलंकी और दो पूर्व नेता प्रतिपक्ष शक्ति सिंह गोहिल और अर्जुन मोढवाडिया को नाराज नहीं करने का फैसला लिया। ऐसे में जब पार्टी हाईकमान वाघेला के सामने नहीं झुकी, तो उन्होंने अपने जन्मदिवस पर सम्मेलन करने की घोषणा की। वाघेला इस सम्मेलन में खुद को सीएम उम्मीदवार घोषित कर पार्टी हाई-कमान पर दबाव डालना चाहते थे, पर पार्टी हाई-कमान ने पहले ही बड़ा कदम उठाते हुए उन्हें पार्टी से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया।

शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि वो कांग्रेस से निकाले जाने के बाद किसी पार्टी में शामिल नहीं होंगे।
शंकर सिंह वाघेला की इस घोषणा से उम्मीद जताई जा रही है कि वो पार्टी बनाने की जगह कई पार्टियों को बनाकर गैर कांग्रेसी-गैर भाजपाई मोर्चा बना सकते हैं। ऐसे में वो एनसीपी, जेडीयू के साथ ही गुजरात सरकार की नाक में दम कर देने वाले गुजरात के 3 युवा नेताओं हार्दिक पटेल, अल्‍पेश ठाकुर और जिग्‍नेश मेवानी को साथ ला सकते हैं। हालांकि उन्होंने सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लिया है, पर वो पर्दे के पीछे अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।

शंकर सिंह वाघेला के राजनीति से संन्यास को अमित शाह की नजदीकी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पर्दी के पीछे हुई डील के तहत वाघेला के बेटे को बीजेपी राज्यसभा या किसी सुरक्षित पद पर भेज सकती है। इसके बदले वो गुजरात में कमजोर होती दिख रही बीजेपी के लिए नई मुसीबत नहीं खोलेंगे।
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