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गुजराती अखबार को महंगा पड़ा अप्रैल फूल बनाना, खबर सच होने पर हो रही परेशानी

Sat, 12 Nov 2016 08:26 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 12 Nov 2016 08:26 PM IST
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Gujarati newspaper faces awkward situation when Apirl fool day news becomes realty
ban note

गुजरात के राजकोट से प्रकाशित एक सांध्य दैनिक में अप्रैल फूल दिवस पर 500 और 1000 के नोटों को अमान्य करने के संबंध में छपी खबर सौ फीसदी सच निकली। अखबार ने एक अप्रैल को मजाक में छपी खबर में कहा था कि सरकार 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद कर देगी। 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक यही घोषणा की। इसके बाद से सांध्य दैनिक के दफ्तर में लगातार फोन की घंटी बज रही है।

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सांध्य दैनिक में छपी खबर में कहा गया था कि राजग सरकार ने काला धन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने का निर्णय किया है। 8 नवंबर को देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने भी नोटों को अमान्य घोषित करते हुए बिल्कुल यही बातें कही थी। सांध्य दैनिक अकीला की संपादकीय टीम अब लोगों को जवाब देते-देते परेशान हो उठी है। उसका कहना है कि यह खबर 1 अप्रैल 2016 के अंक में अप्रैल फूल पर होने वाले मजाक के तौर पर प्रकाशित की थी।
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मंगलवार की रात पीएम की ओर से घोषणा किए जाने के बाद सांध्य दैनिक में प्रकाशित खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई  और इसके बाद से अखबार के दफ्तर में फोन आने का सिलसिला शुरू हो गया।  अखबार के मालिक और संपादक किरीट गनात्रा का कहना है कि उन्होंने एक अप्रैल को मजाक के रूप में इस खबर को प्रकाशित किया था। इसका हकीकत से कोई लेना देना नहीं था। यह बस संयोग की बात है कि छह महीने के बाद खबर सच साबित हो गई। 

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गुजरात में मजाक के रूप में एक खबर प्रकाशित करना एक परंपरा 

Gujarati newspaper faces awkward situation when Apirl fool day news becomes realty

गौरतलब है कि गुजरात में यह परंपरा है कि सभी स्थानीय अखबार अप्रैल फूल दिवस पर मजाक के रूप में एक खबर प्रकाशित करते हैं। अगले दिन के अंक में यह स्पष्ट किया जाता है कि फलां खबर मजाक के तौर पर छापी गई है।

पाठक भी इस बात से परिचित है और वे इस तरह की खबर का भरपूर आनंद लेते हैं। बहरहाल, अखबार में अप्रैल फूल दिवस पर मजाक के तौर पर यह खबर छपी और लोग उसे पढ़ने के बाद भूल गए, लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा 500 और 1000 के नोटों को अमान्य किए जाने की घोषणा के साथ ही अखबार के दफ्तर में फोन आने का सिलसिला शुरू हो गया।

लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर अखबार को यह खबर कैसे मिली थी। इसके बाद अखबार ने 10 नवंबर के अंक में स्पष्टीकरण छापा कि यह खबर अप्रैल फूल दिवस पर मजाक के तौर पर प्रकाशित की गई थी। उन्हें कहीं से भी कोई सूचना नहीं मिली थी और न ही यह खबर किसी सूचना पर आधारित थी। 

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