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गुजरात: फैक्ट्रियों पर पड़ रहा है पलायन का असर, नहीं थम रहे उत्तर भारतीयों पर हमले

Tue, 09 Oct 2018 08:55 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर Updated Tue, 09 Oct 2018 08:55 AM IST
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Gujarat: Work in factory is affecting because migrants are leaving state because of hate attacks
गुजरात से पलायन करते गैर राज्य के निवासी - फोटो : pti

गुजरात में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश के लोगों के खिलाफ फैली नफरत कम होने का नाम नहीं ले रही है। प्रवासियों को राज्य से जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है और कई जगहों पर हिंसा का भी सहारा लिया जा रहा है। गैर-गुजरातियों से राज्य छोड़कर चले जाने को कहा जा रहा है। 

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रविवार की रात को आणंद के पास बने बाल अमूल प्लांट में काम करने वाले 8 संविदा कर्मचारियों पर कथित तौर पर हमला किया गया। बाइक सवार हमलावरों ने इन्हें राज्य छोड़ने की धमकी दी। राजस्थान और मध्यप्रदेश के करीब 15 श्रमिकों ने प्लांट में शरण ले रखी है। 
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राज्य में परिस्थिति बदतर होती जा रही है। जिसकी वजह से यूपी और बिहार के मुख्यमंत्रियों ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से फोन पर बातचीत की। अभी तक उत्तर भारतीयों पर गुजरात में हमलों के 56 मामले दर्ज किए गए हैं। हिंसा के मामले में पुलिस 431 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। 
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ज्यादातर घटनाएं हिम्मतनगर की हैं जहां मासूम का दुष्कर्म किया था। इसके अलावा मेहसाणा, गांधीनगर और अहमदाबाद हिंसा प्रभावित जिले हैं। अब वडोदरा, आणंद और पंचमहल, जहां ठाकोर समुदाय की बहुत बड़ी आबादी है उन्होंने भी उत्तर भारतीयों को वापस जाने के लिए मजबूर करना शुरू कर दिया है। पीड़ित मासूम ठाकोर जाति की है। 

बिहार के 47 मजदूरों को बंधक बनाया 

अहमदाबाद की एक फैक्ट्री में बिहार के 47 मजदूरों को बंधक बना लिया गया है और उनके साथ मारपीट की जा रही है। गुजरात से बिहार के शेखपुरा लौटे कुछ मजदूरों ने जिलाधिकारी से उनकी रिहाई की गुहार लगाई है। वहीं, डर की वजह से बीते एक सप्ताह में गुजरात से 20 हजार लोग पलायन कर चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, बंधक बनाए गए सभी मजदूर अहमदाबाद के चाचा बाड़ी गांव की एक फैक्ट्री में काम करते हैं। दुष्कर्म की घटना के बाद ये लोग घर लौटना चाह रहे थे, लेकिन फैक्ट्री संचालक ने सभी को एक कमरे में बंद कर दिया है। उनके साथ मारपीट की जा रही है और उन्हें वापस नहीं आने दिया जा रहा। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन और जिलाधिकारी से रिहाई और सुरक्षा की मांग की है।  

फैक्ट्रियों पर पड़ रहा है पलायन का असर

अहमदाबाद में 100 से ज्यादा प्रवासी अपनी जान बचाकर वापस अपने राज्य चले गए हैं क्योंकि रविवार रात को वस्त्राल में कबीर मंदिर के नजदीक एक मंदिर में आग लगा दी गई थी। आठ लोगों को गैर-गुजरातियों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले संदेश को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। एक टूर ऑपरेटर महिपत सिंह राजावत जोकि गुजरात, एमपी और यूपी में बस चलाते हैं उन्होंने कहा, केवल दो दिनों में लगभग 25,000 लोग वापस अपने राज्य जा चुके हैं। 

प्रवासियों के इस तरह से जाने का सबसे ज्यादा खामियाजा फैक्ट्रियों को भुगतना पड़ रहा है। राज्य की ज्यादातर फैक्ट्रियां प्रवासी मजदूरों पर बहुत ज्यादा निर्भर रहती हैं। त्योहारी मौसम होने के बावजूद इसकी वजह से उत्पादन में 20 प्रतिशत की कमी आई है। साणंद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत शाह ने कहा, यूपी और बिहार के 12,000 से ज्यादा मजदूर उत्तर गुजरात में काम करते हैं। वह सभी अपने गृह राज्य वापस चले गए हैं। केवल साणंद से पिछले कुछ दिनों में 4000 प्रवासी मजदूर पलायन कर चुके हैं। 

हालांकि इस हिंसा का असर सूरत, कच्छ, मोरबी, जामनगर और राजकोट में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों पर नहीं पड़ा है। कुछ लोगों को सरकार की तरफ से सुरक्षा मिलने लगी है। इसी बीच सोमवार को गांधीनगर से पुलिस ने कांग्रेस नेता महोत ठाकोर और उनके चार साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। वह ठाकोर सेना के सदस्य हैं। यह संगठन कांग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर का है। उन्हें प्रवासियों को 24 घंटे के अंदर उवारसद गांव छोड़कर जाने की धमकी देने के वीडियो वायरल होने के बाद गिरफ्तार किया गया है।


पंचमहाल जिले की कालोल जीआईडीसी के 400 श्रमिक घर छोड़कर जा चुके हैं। इलाके की पांच-छह कॉलोनियों में यह लोग लंबे समय से रह रहे थे। कालोल की कंपनियों में काम करने वाले श्रमिक कई दिन से काम पर नहीं जा रहे। वहीं, पाटण औद्योगिक क्षेत्र से 80 लोग सोमवार को पलायन कर गए। थराद, डीसा, वडगाम, दियोदर और पालनपुर से भी गैर गुजरातियों के अपने गृह राज्य लौटने का सिलसिला जारी है। 

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