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Gujarat: पहलगाम हमले में घायल व्यक्ति ने याद किया खौफनाक दिन, पत्नी ने कहा- भगवान शिव से प्रार्थना करने लगी

Fri, 25 Apr 2025 06:01 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भावनगर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भावनगर। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 25 Apr 2025 06:01 PM IST
सार

Gujarat: पहलगाम आतंकी हमले में घायल हुए भावनगर के विनुभाई डाभी और उनकी पत्नी ने बताया कि कैसे हमले के दौरान वे अलग हो गए और उन्होंने आतंकवादी को एक युवक पर गोली मारते देखा। हमले के समय वहां सुरक्षा बलों की मौजूदगी नहीं थी।

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Gujarat man injured in Pahalgam attack recalls nightmare, wife says started praying to Lord Shiva
हमले के बाद सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पहलगाम हमले में घायल हुए गुजरात के भावनगर निवासी विनुभाई डाभी और उनकी पत्नी लीलाबेन ने शुक्रवार को उस खौफनाक घटना को याद किया, जिसमें उन्होंने एक युवक को आतंकवादियों की गोली का शिकार होते हुए देखा। डाभी और उनकी पत्नी उन 20 लोगों के समूह में शामिल थे, जो 16 अप्रैल को आध्यात्मिक गुरु मुरारी बापू के प्रवचन सुनन के लिए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर गए थे। 

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डाभी (55 वर्षीय) ने गुरुवार रात भावनगर में अपने घर पर पत्रकारों को बताया, जब हमें गोलीबारी के बारे में पता चला तो हर कोई दौड़ने लगा। मैं अपनी पत्नी से बिछुड़ गया। जो लोग पीछे रह गए, वे आतंकवादियों की गोली का शिकार हो गए। भागते वक्त एक गोली मेरे दाहिने हाथ में लगी और दूसरी गोली मेरे बाएं कंधे को छूते हुए निकली, जिससे हल्की चोट आई। 
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उन्होंने, जब फिर मेरी मुलाकात पत्नी से हुई, तो मेरी खून से सनी हुई कमीज और गोली के घाव को देखकर वह तीन बार बेहोश हो गईं। हम किसी तरह पहाड़ी से नीचे उतरे, जहां सेना के जवानों ने मुझे अस्पताल पहुंचाया। मैं तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहा। आंसू भरे आंखों से लीलाबेन ने बताया कि जब वह अपने पति से बिछड़ी थीं, तभी उन्होंने एक आतंकवादी को स्मित परमार (20 वर्षीय) को गोली मारते हुए देखा। स्मित और उनके पिता यश परमार उन 26 लोगों में शामिल थे, जिनकी आतंकवादी हमले में मौत हो गई। पिता-पुत्र की जोड़ी भी उन्ही 20 लोगों के समूह का हिस्सा थी, जो यहां से मुरारी बापू के प्रवचन सुनने श्रीनगर गए थे। 


लीलाबेन ने बताया, जब मैं दौड़ रही थी, तभी मैंने देखा कि एक आतंकवादी ने स्मित के सीने में गोली मारी। वह तुरंत जमीन पर गिर पड़ा। वह दृश्य असहनीय था। बाद में पता चला कि उसके पिता को भी गोली मार दी गई। सेना के जवानों ने जीवित बचे लोगों को अस्पताल पहुंचाया और ठहरने की व्यवस्था भी की। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपने पति के हाथ पर खून देखा तो उन्होंने भगवान शिव का नाम लेना शुरू कर दिया। 

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खुशी वाघेला भी मुरारी बापू के प्रवचन सुनने के लिए उसी समूह का हिस्सा थीं। उन्होंने बताया कि उस पहाड़ी पर सेना की मौजूदगी नहीं थी। वाघेला ने पत्रकारों को बताया, दो से तीन आतंकवादियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। लेकिन वहां न तो कोई सेना का जवान था और न ही कोई अन्य सुरक्षा बल। मैंने सुना था कि हाल ही में वहीं से चार पाकिस्तानी आतंकवादी पकड़े गए थे। अगर यह सच है तो वहां सेना की तैनाती होनी चाहिए थी। लेकिन वहां कोई नहीं था। 


 

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