{"_id":"6155eff08ebc3e0585183f25","slug":"gujarat-hc-suspends-life-term-awarded-to-dinu-solanki-in-rti-activist-murder-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमित जेठवा हत्याकांड: गुजरात हाई कोर्ट ने पूर्व सांसद दीनू सोलंकी की उम्रकैद की सजा निलंबित की","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अमित जेठवा हत्याकांड: गुजरात हाई कोर्ट ने पूर्व सांसद दीनू सोलंकी की उम्रकैद की सजा निलंबित की
Thu, 30 Sep 2021 10:42 PM IST
Amit Mandal
पीटीआई, अहमदाबाद
पीटीआई, अहमदाबाद
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 30 Sep 2021 10:42 PM IST
सार
निचली अदालत ने जुलाई 2019 में सोलंकी और छह अन्य को जेठवा की हत्या करने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जेठवा की हत्या गुजरात हाई कोर्ट के बाहर गोली मारकर की गई थी।
विज्ञापन
दीनू सोलंकी (फाइल फोटो)
- फोटो : Social Media
विस्तार
आरटीआई कार्यकर्ता अमित जेठवा हत्याकांड मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार को दोषी पूर्व भाजपा सांसद दीनू सोलंकी की उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी। अदालत ने कहा कि उन्हें दोषी ठहराए जाने को सिद्ध नहीं किया जा सकता। सोलंकी को विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
विज्ञापन
सोलंकी को जमानत देते हुए न्यायमूर्ति परेश उपाध्याय ने कहा कि विशेष सीबीआई अदालत का फैसला त्रुटिपूर्ण और अस्थिर था क्योंकि ट्रायल अनुमानों और पूर्वानुमानों, संयोग और शंकाओं पर आधारित था।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि सोलंकी के खिलाफ सुनवाई परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित थी। साक्ष्य आरोपी को दोषी साबित करने के अलावा कई अन्य अनुमानों की तरफ इशारा करते हैं और इसमें आवेदक को गलत तरीके से फंसाने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन
आरटीआई कार्यकर्ता जेठवा की 2010 में गुजरात हाई कोर्ट के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। निचली अदालत ने जुलाई 2019 में सोलंकी और छह अन्य को जेठवा की हत्या करने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जेठवा ने गिर वन क्षेत्र में अवैध खनन का भंडाफोड़ करने का प्रयास किया था।
साबरमती जेल में बंद सोलंकी ने सीबीआई के फैसले को चुनौती दी और अपनी सजा निलंबित करने का आग्रह किया था। हाई कोर्ट ने इस तथ्य को संज्ञान में लिया कि 2010 में भाजपा सांसद रहे सोलंकी को सीबीआई द्वारा जांच अपने हाथ में लेने के बाद 2013 में आरोपी बनाया गया था।
अपराध शाखा द्वारा सोलंकी को क्लीनचिट दिए जाने के बाद गुजरात हाई कोर्ट ने इसकी जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी थी। वर्ष 2009 से 2014 तक गुजरात के जूनागढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुके सोलंकी को उनके चचेरे भाई शिव सोलंकी और पांच अन्य के साथ भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या और आपराधिक साजिश रचने के आरोपों का दोषी माना था।
दरअसल, जेठवा ने आरटीआई के जरिए दीनू सोलंकी की कथित संलिप्तता वाली अवैध खनन गतिविधियों को उजागर करने की कोशिश की थी। जेठवा ने एशियाई शेरों के वास स्थान गिर वन क्षेत्र में अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की थी।
मृतक के पिता भीखाभाई जेठवा के हाई कोर्ट का रुख करने के बाद अदालत ने मामले की नए सिरे से जांच का आदेश दिया था। उन्होंने अदालत से कहा था कि आरोपियों द्वारा दबाव डालने और भयादोहन करने के चलते करीब 105 गवाह मुकर गए।