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Gujarat High Court: चार पुलिसकर्मियों को 14 दिन की जेल, खेड़ा पिटाई के मामले में कोर्ट की अवमानना पर सख्ती
Thu, 19 Oct 2023 06:28 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Thu, 19 Oct 2023 06:28 PM IST
सार
न्यायमूर्ति ए एस सुपेहिया और न्यायमूर्ति गीता गोपी की खंडपीठ ने चारों पुलिसकर्मियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया और उन्हें सजा के तौर पर 14 दिन जेल में बिताने का आदेश दिया।
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गुजरात हाईकोर्ट
- फोटो : SOCIAL MEDIA
विस्तार
खेड़ा के एक गांव में अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ सदस्यों की सार्वजनिक पिटाई मामले में गुजरात हाईकोर्ट सख्त दिखाई दे रहा है। मामले से जुड़े अदालत की अवमानना के लिए चार पुलिस कर्मियों को गुजरात हाईकोर्ट ने 14 दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाई। न्यायमूर्ति ए एस सुपेहिया और न्यायमूर्ति गीता गोपी की खंडपीठ ने चारों पुलिसकर्मियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया और उन्हें सजा के तौर पर 14 दिन जेल में बिताने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति सुपेहिया की अगुवाई वाली पीठ ने इन पुलिसकर्मियों को आदेश मिलने के 10 दिनों के भीतर अदालत के न्यायिक रजिस्ट्रार के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया ताकि उन्हें जेल भेजा जा सके।
लेकिन पुलिसकर्मियों को राहत देते हुए उच्च न्यायालय ने आरोपियों को फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति देने के अपने आदेश के कार्यान्वयन पर तीन महीने की अवधि के लिए रोक लगा दी।
बता दें ये चार पुलिसकर्मी इंस्पेक्टर ए वी परमार, सब इंस्पेक्टर डी बी कुमावत, हेड कांस्टेबल के एल डाभी और कांस्टेबल आर आर डाभी हैं। हाईकोर्ट ने उनकी पहचान के बाद उनके खिलाफ आरोप तय किए थे और घटना की जांच के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), खेड़ा द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में उनकी भूमिका निर्दिष्ट की गई थी।
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सुनवाई के दौरान पुलिसकर्मियों की ओर से पेश वकील प्रकाश ने अदालत से इन पुलिसकर्मियों के सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए नरम रुख दिखाने का आग्रह किया। शिकायतकर्ताओं के वकील आई एच सैयद ने इसका विरोध करते हुए कहा, अगर इस तरह के कृत्य को मुआवजे, जुर्माना या माफी के माध्यम से माफ कर दिया जाता है, तो यह अदालत की गरिमा को कम करेगा। यह गलत मिसाल भी कायम करेगा।
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लेकिन पुलिसकर्मियों को राहत देते हुए उच्च न्यायालय ने आरोपियों को फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति देने के अपने आदेश के कार्यान्वयन पर तीन महीने की अवधि के लिए रोक लगा दी।
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बता दें ये चार पुलिसकर्मी इंस्पेक्टर ए वी परमार, सब इंस्पेक्टर डी बी कुमावत, हेड कांस्टेबल के एल डाभी और कांस्टेबल आर आर डाभी हैं। हाईकोर्ट ने उनकी पहचान के बाद उनके खिलाफ आरोप तय किए थे और घटना की जांच के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), खेड़ा द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में उनकी भूमिका निर्दिष्ट की गई थी।
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सुनवाई के दौरान पुलिसकर्मियों की ओर से पेश वकील प्रकाश ने अदालत से इन पुलिसकर्मियों के सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए नरम रुख दिखाने का आग्रह किया। शिकायतकर्ताओं के वकील आई एच सैयद ने इसका विरोध करते हुए कहा, अगर इस तरह के कृत्य को मुआवजे, जुर्माना या माफी के माध्यम से माफ कर दिया जाता है, तो यह अदालत की गरिमा को कम करेगा। यह गलत मिसाल भी कायम करेगा।