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गुजरात: 1600 से अधिक डॉक्टरों का ग्रामीण इलाकों में पहुंचने से इनकार, 49 करोड़ रुपये की होगी वसूली

Wed, 30 Mar 2022 07:21 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर Published by: Amit Mandal Updated Wed, 30 Mar 2022 07:21 PM IST
सार

आंकड़ों से पता चला है कि सबसे अधिक डॉक्टरों ने आदिवासी बहुल दाहोद और छोटाउदपुर जिलों में सेवा करने से इनकार कर दिया है।

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Gujarat govt yet to recover Rs 49 crore from doctors who skipped rural service
डॉक्टरों का ग्रामीण इलाकों में सेवा करने से इनकार - फोटो : istock

विस्तार

गुजरात सरकार ने बुधवार को विधानसभा को सूचित किया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पास हुए 1600 से अधिक एमबीबीएस स्नातक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा नहीं दे रहे हैं, जबकि उन्हें प्रवेश के समय बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने होते हैं। सरकारी कॉलेजों में मेडिकल छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद एक साल के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने का वादा करते हुए एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर करना होता है। सरकार को 40 लाख रुपये देकर डॉक्टर बॉन्ड तोड़ सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्री रुशिकेश पटेल ने प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में कहा कि 2019 और 2021 के बीच 1630 मेडिकल स्नातक ग्रामीण क्षेत्रों में कोर्स पूरा करने के लिए नहीं आए।

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1155 डॉक्टरों से 49.35 करोड़ रुपये की वसूली करनी है
पटेल ने कहा कि इन 1,630 डॉक्टरों में से राज्य सरकार को अभी तक 1,155 डॉक्टरों से 49.35 करोड़ रुपये की वसूली करनी है, जिन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस राशि की वसूली की प्रक्रिया अभी संबंधित अधिकारियों के माध्यम से जारी है। विशेष रूप से पटेल द्वारा सदन में पेश किए गए आंकड़ों से पता चला है कि सबसे अधिक डॉक्टरों ने आदिवासी बहुल दाहोद और छोटाउदपुर जिलों में सेवा करने से इनकार कर दिया है।
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आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान 377 डॉक्टरों ने दाहोद में सेवा करने से इनकार कर दिया, जबकि 242 डॉक्टर छोटाउदपुर नहीं गए। गुजरात के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल ने एक बार विधानसभा में कहा था कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के डॉक्टर भी अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद आदिवासी क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में सेवा देने के लिए तैयार नहीं हैं।

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