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SC in Bilkis Bano Case: 'गुजरात सरकार ने दोषी के साथ मिलकर किया काम, क्यों नहीं दायर की पुनर्विचार याचिका'

Mon, 08 Jan 2024 03:38 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 08 Jan 2024 03:38 PM IST
सार

SC in Bilkis Bano Case: सर्वोच्च न्यायालय ने बिलकिस बानो मामले में आज सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि गुजरात सरकार की मामले के दोषियों में से एक के साथ मिलीभगत थी। 

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Gujarat govt complicit and acted in tandem with one of the convicts: SC in Bilkis Bano case
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को बिलकिस बानो मामले में दोषियो को सजा में छूट देने के लिए गुजरात सरकार को फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि समय से पहले रिहाई के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाले दोषियों में से एक के साथ राज्य सरकार की मिलीभगत थी और उसने उसके साथ मिलकर काम किया। 

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'पुनर्विचार याचिका क्यों दायर नहीं की'
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि वह यह नहीं समझ पा रही है कि गुजरात सरकार ने 13 मई, 2022 के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका क्यों दायर नहीं की। गुजरात सरकार ने अनुरोध किया था वह नौ जुलाई  1992 की राज्य नीति के अनुसार एक दोषी की समय पूर्व रिहाई की याचिका पर विचार करे। 

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क्या है गुजरात सरकार की माफी नीति 
गुजरात सरकार 1992 में नई माफी नीति लेकर आई थी, जिसके तहत उम्रकैद की सजा पाने वाले और कम से कम 14 साल की सजा काट चुके दोषियों की याचिकाओं पर जेल सलाहकार बोर्ड की अनुकूल राय के बाद विचार किया जा सकता है। 

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तथ्यों को दबाकर शीर्ष अदालत को किया गुमराह
पीठ ने कहा, 'इस अदालत के 13 मई, 2022 के आदेश का लाभ उठाते हुए अन्य दोषियों ने भी माफी के आवेदन दायर किए और गुजरात सरकार ने माफी के आदेश पारित किए। गुजरात सरकार की मिलीभगत थी और उसने इस मामले में प्रतिवादी नंबर 3 (दोषी राधेश्याम शाह) के साथ मिलकर काम किया। तथ्यों को दबाकर इस अदालत को गुमराह किया गया। गुजरात द्वारा शक्ति का इस्तेमाल केवल राज्य की सत्ता पर कब्जा करना था।' 
 

'जनता के भरोसे को बनाए रखना न्यायालय का कर्तव्य'
शीर्ष अदालत ने एक अन्य पीठ के 13 मई, 2022 के अपने आदेश को भी रद्द कर दिया, क्योंकि आदेश 'अदालत के साथ धोखाधड़ी करके' और भौतिक (फिजिकल) तथ्यों को दबाकर हासिल किया गया था। इसमें गुजरात सरकार को दोषियों में से एक की माफी याचिका पर विचार करने के लिए कहा गया था।

उन्होंने कहा, 'अगर दोषी अपनी दोषसिद्धि के परिणामों को दरकिनार कर सकते हैं, तो समाज में शांति और स्थिरता एक छलावा में तब्दील हो जाएगी। यह इस न्यायालय का कर्तव्य है कि वह मनमाने आदेशों को जल्द से जल्द ठीक करे और जनता के भरोसे की नींव को बनाए रखे।'

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