{"_id":"638d417d74b75c1eff5dfcd4","slug":"gujarat-government-told-the-supreme-court-that-freedom-of-religion-not-include-the-right-to-convert-others","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: धर्म की स्वतंत्रता में धर्मांतरण कराने का अधिकार शामिल नहीं, सरकार ने कोर्ट से किया अनुरोध","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: धर्म की स्वतंत्रता में धर्मांतरण कराने का अधिकार शामिल नहीं, सरकार ने कोर्ट से किया अनुरोध
Mon, 05 Dec 2022 06:25 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Mon, 05 Dec 2022 06:25 AM IST
सार
गुजरात उच्च न्यायालय ने 19 अगस्त और 26 अगस्त, 2021 के अपने आदेशों के माध्यम से राज्य सरकार के धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 2003 की धारा 5 के संचालन पर रोक लगा दी थी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
विस्तार
गुजरात सरकार ने उच्चतम न्यायालय से कहा है कि धर्म की स्वतंत्रता में दूसरों का धर्मांतरण कराने का अधिकार शामिल नहीं है। सरकार ने शीर्ष अदालत से राज्य के कानून के प्रावधान (विवाह के माध्यम से धर्मांतरण के लिए जिलाधिकारी की अनुमति) पर उच्च न्यायालय की रोक हटाने का अनुरोध किया।
गुजरात उच्च न्यायालय ने 19 अगस्त और 26 अगस्त, 2021 के अपने आदेशों के माध्यम से राज्य सरकार के धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 2003 की धारा 5 के संचालन पर रोक लगा दी थी। अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा एक जनहित याचिका के जवाब में प्रस्तुत अपने हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा कि उसने एक आवेदन दायर किया है। इसमें हाईकोर्ट के स्टे को रद्द करने की मांग की गई है ताकि गुजरात में बल, प्रलोभन या धोखाधड़ी के माध्यम से धार्मिक रूपांतरण पर रोक लगाने के प्रावधानों को लागू किया जा सके। उन्होंने कहा, यह प्रस्तुत किया गया है कि धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार में अन्य लोगों को किसी विशेष धर्म में परिवर्तित करने का मौलिक अधिकार शामिल नहीं है।
उक्त अधिकार में निश्चित रूप से किसी व्यक्ति को धोखाधड़ी, धोखे, जबरदस्ती, प्रलोभन या अन्य तरह के धर्मांतरण का अधिकार शामिल नहीं है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 में प्रचार शब्द के अर्थ और तात्पर्य पर संविधान सभा में विस्तार से चर्चा की गई थी। इसे शामिल करने की वजहों को स्पष्ट करने के बाद ही अनुच्छेद 25 को पारित किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
गुजरात उच्च न्यायालय ने 19 अगस्त और 26 अगस्त, 2021 के अपने आदेशों के माध्यम से राज्य सरकार के धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 2003 की धारा 5 के संचालन पर रोक लगा दी थी। अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा एक जनहित याचिका के जवाब में प्रस्तुत अपने हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा कि उसने एक आवेदन दायर किया है। इसमें हाईकोर्ट के स्टे को रद्द करने की मांग की गई है ताकि गुजरात में बल, प्रलोभन या धोखाधड़ी के माध्यम से धार्मिक रूपांतरण पर रोक लगाने के प्रावधानों को लागू किया जा सके। उन्होंने कहा, यह प्रस्तुत किया गया है कि धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार में अन्य लोगों को किसी विशेष धर्म में परिवर्तित करने का मौलिक अधिकार शामिल नहीं है।
विज्ञापन
उक्त अधिकार में निश्चित रूप से किसी व्यक्ति को धोखाधड़ी, धोखे, जबरदस्ती, प्रलोभन या अन्य तरह के धर्मांतरण का अधिकार शामिल नहीं है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 में प्रचार शब्द के अर्थ और तात्पर्य पर संविधान सभा में विस्तार से चर्चा की गई थी। इसे शामिल करने की वजहों को स्पष्ट करने के बाद ही अनुच्छेद 25 को पारित किया गया था।
विज्ञापन