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Gujarat: गुजरात सरकार ने आईएएस अधिकारी राजेंद्रकुमार पटेल को किया निलंबित, पहले ही ईडी कर चुकी है गिरफ्तार

Tue, 06 Jan 2026 07:43 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 06 Jan 2026 07:43 AM IST
सार

गुजरात सरकार ने IAS अधिकारी और सुरेंद्रनगर के पूर्व कलेक्टर राजेंद्रकुमार पटेल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद निलंबित कर दिया है। पटेल को 2 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था और अब उन्हें 2 जनवरी से अगले आदेश तक निलंबित माना जाएगा।

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Gujarat government suspended IAS officer Rajendrakumar Patel who had already been arrested by the ED
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुजरात सरकार ने आईएएस अधिकारी और सुरेंद्रनगर के पूर्व कलेक्टर राजेंद्रकुमार पटेल को निलंबित कर दिया है। प्रदेश सरकार ने यह कार्रवाई रिश्वतखोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पटेल को गिरफ्तार किए जाने के बाद की। ईडी ने 2015 बैच के आईएएस अधिकारी पटेल को 2 जनवरी को गिरफ्तार किया था। इसी दिन, विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें 7 जनवरी तक ईडी की हिरासत में भेज दिया था।

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राज्य सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने रविवार को जारी एक आदेश में कहा कि पटेल को निलंबित कर दिया गया है क्योंकि उनकी हिरासत की अवधि 48 घंटे से ज्यादा हो गई है। इसलिए, अब पटेल को अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के नियम 3 के उपनियम 2 के तहत 2 जनवरी से अगले आदेश तक निलंबित माना जाएगा।
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कलेक्टर का किया गया था तबादला
बता दें कि सुरेंद्रनगर के कलेक्टर रहे पटेल को पिछले महीने बिना किसी पोस्टिंग के तबादला कर दिया गया था। यह तबादला रिश्वतखोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की ओर से डिप्टी मामलतदार (राजस्व अधिकारी) चंद्रसिंह मोरी को उनके कार्यालय से गिरफ्तार किए जाने के बाद हुआ था। बाद में ईडी ने पटेल को 2 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया था।
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ईडी का आरोप है कि पटेल ने कथित तौर पर जमीन के इस्तेमाल में बदलाव (सीएलयू) के आवेदनों को मंजूरी देने के लिए 5 रुपये से 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक रिश्वत की दरें तय की थीं। सीएलयू आवेदन को जल्दी आगे बढ़ाने के लिए स्पीड मनी के तौर पर सुनियोजित तरीके से रिश्वत मांगी और वसूली गई। इसे गुजरात में जिला कलेक्टर के कार्यालय से काम करने वाले बिचौलियों के एक नेटवर्क के जरिये भेजा गया।


बयान से पता चला रिश्वत के बंटवारे का मामला
पीएमएलए के तहत दर्ज बयानों से कथित तौर पर रिश्वत की रकम के बंटवारे का पता चलता है। कुल रिश्वत में से कथित तौर पर 50 प्रतिशत पटेल को मिला, 10 प्रतिशत एक बिचौलिए ने रखा और बाकी रकम कलेक्टर कार्यालय के दूसरे अधिकारियों में बांटी गई, जिसमें रेजिडेंट एडिशनल कलेक्टर, एक मामलतदार और एक क्लर्क शामिल थे।

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