Gujarat Election: गुजरात में इस सीट को कहते हैं 'भाजपा की जागीर', जानिए क्या है इसकी वजह?
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विस्तार
कहने को तो गुजरात के विधानसभा चुनावों में बहुत सी ऐसी सीटें हैं, जिन पर भाजपा अपना परचम लहराती आई है। लेकिन गुजरात में एक ऐसी सीट भी है, जिसे भाजपा की जागीर की सीट के तौर पर जाना जाता है। गुजरात की सबसे चर्चित और चुनिंदा सीटों में यह सीट है राजकोट पश्चिम की सीट। दरअसल यह सीट कभी गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हुआ करती थी। गुजरात की इस अहम सीट पर भाजपा का वह दबदबा है कि सन 1967 से लेकर अब तक इस सीट पर कोई दूसरा प्रत्याशी चुनाव जीता ही नहीं। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि इस सीट पर जातीय समीकरण कुछ इस तरह का है कि भाजपा को सिर्फ राजकोट पश्चिम ही नहीं, बल्कि इसका फायदा पूरे गुजरात में बीते कई सालों से मिल रहा है। यह सीट इस बार भाजपा ने अपने पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी से भी ले ली है।
1967 से ही भारतीय जनसंघ और भाजपा का दबदबा
गुजरात की कुछ चुनिंदा विधानसभा सीटों की जब भी चर्चा होती है, तो उसमें सबसे अहम राजकोट पश्चिम सीट ही है। दरअसल राजकोट सीट पर 1967 से ही पहले भारतीय जनसंघ और उसके बाद भाजपा का दबदबा बना हुआ है। गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार और सियासी जानकार मनसुखभाई दवे कहते हैं कि राजकोट की ये अहम सीट भाजपा के लिए लिए पूरे प्रदेश में माहौल बनाने के लिए पर्याप्त होती है। दवे कहते हैं कि 2001 में जब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री बने तो, वे राजकोट पश्चिम से ही चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे थे। सियासी जानकारों का कहना है कि पार्टी ने इस बार जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की यह सीट बदली है, उससे यहां का समीकरण बदला हुआ नजर आ रहा है।
सियासी जानकारों का कहना है कि दरअसल पूरे राजकोट में जातिगत समीकरणों के आधार पर जो माहौल बना है, वह पूरे गुजरात के चुनावों को प्रभावित करता है। दरअसल राजकोट पश्चिम की इस सीट पर करीब तीन लाख 14 हजार मतदाता हैं। पाटीदारों की संख्या इस विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा है। अनुमान लगाया जाता है कि 75 हजार के करीब पाटीदार इस विधानसभा सीट पर मतदाता हैं। इसी सीट पर ब्राह्मण लोहाना माणिक और कोली समुदाय के भी मतदाताओं की संख्या चुनाव की दशा दिशा तय करने के लिए पर्याप्त है। वरिष्ठ पत्रकार हरीश भट्ट कहते हैं कि अगर बीते कुछ समय के चुनावों के नतीजे देखे जाएं, तो अंदाजा लगता है कि सवर्ण वोटों ने जो माहौल बनाना शुरू किया उसी के आधार पर इस सीट पर परिणाम आते हैं। क्योंकि भाजपा के पक्ष में सवर्णों का इस सीट पर झुकाव रहता है और नतीजा भाजपा के प्रत्याशी की विजय के तौर पर सामने आता है।
डॉक्टर दर्शिता शाह को दिया टिकट
इस बार भाजपा ने राजकोट पश्चिम से पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी को टिकट नहीं दिया है। भाजपा ने इस बार राजकोट की दो बार डिप्टी मेयर रही डॉक्टर दर्शिता शाह को प्रत्याशी बनाया है। डॉक्टर दर्शिता शाह के बारे में कहा जाता है कि उनके परिवार का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहुत पारिवारिक रिश्ता रहा है और पूरा परिवार संघ से जुड़ा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा के लिए राजकोट पश्चिम किसी वरदान सीट के तौर पर मानी जाती है। चूंकि जातिगत समीकरणों के आधार पर यहां पर एक बड़ा मजबूत जुड़ाव भाजपा के लिए शुरुआती दौर से दिखता आया है, इसीलिए बीते कई सालों से यह सीट भाजपा की झोली में ही गिरती आई है। हरीश भट्ट बताते हैं कि 1985 से लेकर 2002 तक भाजपा के वजूभाई वाला इस सीट पर हमेशा जीत दर्ज करते आए हैं।