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Gujarat Election 2022: इन 13 जिलों से मिलेगी गांधीनगर की गद्दी! क्या मोदी का 'फ्लैशबैक' कनेक्शन करेगा कोई मैजिक?

Fri, 10 Jun 2022 06:22 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Fri, 10 Jun 2022 06:22 PM IST
सार

भाजपा रणनीतिकारों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी का नवसारी दौरा पूरे प्रदेश के 14 फ़ीसदी आदिवासियों को सीधे तौर पर कनेक्ट करेगा। जो आंदोलन चल रहा है उसमें भाजपा को गांधीनगर तक पहुंचने का रास्ता आसान बनेगा...

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Gujarat Election 2022: BJP strategist says, PM Modi visit to Navsari will connect 14 percent tribals of the entire state
नवसारी- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पारंपरिक स्वागत - फोटो : Agency

विस्तार

गुजरात में भी देश के अन्य राज्यों की तरह जातिगत समीकरणों को साध करके ही गांधीनगर की गद्दी मिलती है। लेकिन इस बार भाजपा समेत तमाम राजनीतिक पार्टियों ने गांधीनगर की गद्दी तक पहुंचने का रास्ता गुजरात के उन 13 जिलों से होकर निकला है, जहां के 14 फीसदी वोटर गुजरात के चुनावों की दशा और दिशा बदलने वाले हैं। क्योंकि बीते कुछ समय से आदिवासियों के गढ़ में लगातार आंदोलन चल रहा है। ऐसे में 14 फीसदी वोटरों की अहमियत किसी भी राजनीतिक दल के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इन्हीं 14 फीसदी वोटरों को टारगेट करते हुए 'फ्लैशबैक' मोड में ले जाकर न सिर्फ अपनी बात रखी बल्कि उनको पुराने दिनों में कांग्रेस सरकार की खामिया गिनाकर 13 जिलों के वोटरों को अपने पाले में करने का पूरा खाका खींचा।

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शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के आदिवासी बाहुल्य जिले नवसारी में थे। नवसारी जिला गुजरात का वह इलाका है जहां पर बीते कुछ समय से आदिवासियों का उनके अपने इलाके के और लोगों के बड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन चल रहा है। गुजरात के तकरीबन 13 जिलों की 14 फीसदी आबादी आदिवासी है। इस इलाके में लगातार हो रहे आंदोलन के चलते प्रधानमंत्री मोदी की यह रैली बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भाजपा रणनीतिकारों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी का नवसारी दौरा पूरे प्रदेश के 14 फ़ीसदी आदिवासियों को सीधे तौर पर कनेक्ट करेगा। जो आंदोलन चल रहा है उसमें भाजपा को गांधीनगर तक पहुंचने का रास्ता आसान बनेगा। गुजरात के बनासकांठ, साबरकांठा, महिसागर पंचमकाल दाहोद, नर्मदा, अरवली, छोटा उदयपुर, भरूच, तापी, वलसाड, नवसारी, डांग और सूरत जैसे जिलों में आदिवासियों का वोट बैंक हमेशा से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।

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तीन हजार करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास

प्रधानमंत्री मोदी भी शुक्रवार को हुई रैली में इस बात का जिक्र करना नहीं भूलते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान आदिवासी इलाके के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पुरानी सरकारों ने किस तरह से इस इलाके में लाखों आदिवासियों को पानी तक की सुविधा मुहैया नहीं कराई। प्रधानमंत्री ने नवसारी जिले में तकरीबन 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं का शिलान्यास और शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों से आदिवासी बाहुल्य इलाके को जोड़ते हुए सीधा संपर्क भी बनाने की कोशिश की। गुजरात में भाजपा से जुड़े वरिष्ठ नेता हीरानंद पटेल कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी और गुजरात की भाजपा सरकार ने हमेशा से लोगों के विकास और उनकी मूलभूत सुविधाओं के लिए काम किया है। सुमित कहते हैं कि भाजपा सरकार ने इलाके के लोगों के लिए मूलभूत सुविधाओं में आने वाली सबसे बड़ी चीज पानी को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया है।

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गुजरात की राजनीति के जानकार उमेश रावल कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आदिवासी बाहुल्य इलाकों में जाना न सिर्फ राजनीतिक तौर पर इस वक्त की सबसे बड़ी मांग भी है। वह कहते हैं कि जिस तरीके से इस इलाके में आंदोलन चल रहा है उस लिहाज से भी भाजपा का फोकस 13 जिलों पर होना लाजिमी भी है। वह कहते हैं कि इस बार के केंद्रीय बजट में जब वित्त मंत्रालय ने तकरीबन 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की पार तापी रिवर लिंक प्रोजेक्ट की घोषणा की। प्रोजेक्ट के साथ ही आदिवासियों के तकरीबन 70 से ज्यादा गांव और कई हजार एकड़ जमीन इस परियोजना में शामिल हो गई। इस पूरे आंदोलन को गुजरात कांग्रेस ने आदिवासियों के साथ मिलकर बड़ा रूप दिया।

आदिवासी इलाकों पर सरकार का फोकस

उमेश कहते हैं कि भाजपा को इस बात का बखूबी अंदाजा है कि गुजरात के आदिवासी बहुल इलाकों में चले आंदोलन का कहीं न कहीं आने वाले विधानसभा के चुनावों में असर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी की हर गुजरात यात्रा पर आदिवासियों से जुड़े इलाकों पर पूरा फोकस बना हुआ है। मई के आखिरी सप्ताह में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्रा में भी आदिवासी इलाकों पर पूरा फोकस करते हुए विकास का खाका खींचा गया था। शुक्रवार को भी प्रधानमंत्री मोदी ने आदिवासी इलाकों के लिए बड़ी परियोजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास किया। उमेश रावल के मुताबिक भाजपा आदिवासी बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत कर लेती है तो पार्टी के लिए गांधीनगर की राह और आसान हो जाएगी।



गुजरात में सिर्फ भाजपा ही नहीं बल्कि कांग्रेस समेत अन्य दूसरी राजनीतिक पार्टियां आदिवासियों को अपने साथ जोड़ने की हमेशा से कोशिश करते रहे हैं। कांग्रेस के बड़े नेताओं को भी आदिवासी इलाके में चलाए जा रहे आंदोलन से गुजरात की सत्ता को वापस पाने का बड़ा रास्ता नजर आ रहा है। कांग्रेस के नेता धीरूभाई पटेल कहते हैं की भाजपा ने जिस तरीके से आदिवासियों को विस्थापित किया और उसके बाद उनका हक नहीं दिया, इससे लोगों में नाराजगी है। पटेल के मुताबिक सिर्फ एक परियोजना में ही नहीं बल्कि इलाके में आदिवासियों का शोषण भाजपा की सरकार में लगातार होता रहा है। गुजरात के राजनीतिक जानकार उमेश राहुल कहते हैं कि अगर जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए गुजरात का खाका खींचा जाए तो सबसे ज्यादा आबादी 52 फीसदी ओबीसी की है। नौ फीसदी मुस्लिम, 14 फीसदी आदिवासी हैं। ऐसे में आने वाले गुजरात विधानसभा के चुनावों में यह 14 फीसदी आदिवासियों की आबादी बहुत बड़ा रोल अदा करने वाली है।

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