गुजरात चुनावः इन दो फीसदी वोटों पर टिका सारा दारोमदार, ये पलटे तो पलट जाएगी भाजपा कांग्रेस की किस्मत
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गुजरात चुनावों के परिणाम आने में अब बस दो दिन का इंतजार और बाकी है। हालांकि इससे पहले गुरुवार को आए एग्जिट पोल्स के नतीजों ने गुजरात के साथ साथ हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की पूर्ण बहुमत से वापसी के संकेत दे दिए हैं।
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एग्जिट पोल के अनुसार दोनों ही राज्यों में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलता दिख रहा है, लेकिन गुजरात में एक फैक्टर ऐसा भी है जिसने भाजपा के शीर्ष प्रबंधन की सांसे अटका रखी हैं और यही फैक्टर ऐसा है जिसने एग्जिट पोल्स में पिछड़ने के बाद भी कांग्रेस की उम्मीदें कायम रखी हैं।
भाजपा-कांग्रेस के साथ साथ राजनीतिक पंडितों की निगाहें भी इसी फैक्टर पर टिकी हैं। और ये फैक्टर है भाजपा-कांग्रेस के बीच के दो से चार फीसदी वोटों का, जिसका थोड़ा बहुत बदलाव भी दोनों पार्टियों की नींदे उड़ाने के लिए काफी है। ऐसे में दोनों ही पार्टियों को बेसब्री से चुनाव परिणाम आने का इंतजार है जिससे तमाम अटकलों पर विराम लग सके।
घटता वोट शेयर बढ़ा रहा भाजपा की चिंता
असल में गुजरात में लगातार छठी बार सरकार बनाने का ख्वाब देख रही भाजपा के सामने बड़ी चुनौती सीटों के साथ साथ वोटों को बचाए रखने की भी है। लेकिन एग्जिट पोल्स के नतीजों पर गौर करें तो वोट शेयर के मामले में भाजपा के सामने खतरे की घंटी बजती दिख रही है। जबकि विपक्षी कांग्रेस इस मामले में थोड़ा राहत महसूस कर सकती है।
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तमाम न्यूज चैनलों और पोल करने वाली एजेंसियों के परिणामों में एक बात कॉमन रही, सभी ने इस बात पर मुहर लगाई की बहुमत पाने के बाद भी भाजपा का वोट प्रतिशत पिछली बार के मुकाबले कम रह सकता है, जबकि सीटों के मामले में पिछड़ती दिख रही कांग्रेस वोट प्रतिशत पाने के मामले में फायदे में है।
पिछली बार के चुनावों में भाजपा को 47.9 फीसदी वोट के साथ 115 सीटें मिली थी जबकि 61 सीटें पाने वाली कांग्रेस को 38.9 फीसदी वोट मिले थे।
कांग्रेस के वोट शेयर में बढोत्तरी की उम्मीद
एग्जिट पोल में जहां कांग्रेस को 60 से 80 तक सीट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है वहीं पार्टी को मिलने वाले वोट शेयर में काफी उछाल देखने को मिल रहा है। एग्जिट पोल को मानें तो कांग्रेस को इस बार 43 से 44 फीसदी तक वोट मिल सकते हैं, जो उसके पिछली बार के 38.8 से 5 फीसदी तक ज्यादा है।
खास बात ये है कि सीटों के इस गणित में वोट शेयर का उछाल दोनों पार्टियों में हार जीत का अंतर भी तय कर सकता है। मसलन दोनों पार्टियों के बीच वोट शेयर में मात्र दो से चार फीसदी का ही अंतर है, ऐसे में अगर ये चार फीसदी वोट भाजपा के पक्ष में जाता है तो भाजपा की एकतरफा जीत का राश्ता तय हो सकता है और अगर यह अंतर कांग्रेस के पक्ष में गया तो हर कोई हैरान भी रह सकता है।
साफ है कि कांग्रेस के पक्ष में जाते ही यह वोट शेयर पार्टी का गुजरात में 22 साल का वनवास खत्म कर सकता है। ऐसे में सभी की निगाहें इसी वोट शेयर पर टिकी हैं।