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Gujarat Bridge Collapse: क्या आशंका के बाद भी प्रशासन ने मूंद रखी थी आंख? पुल हादसे को लेकर किया गया बड़ा दावा
Thu, 10 Jul 2025 05:09 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Thu, 10 Jul 2025 05:09 PM IST
सार
गुजरात के वडोदरा में महिसागर नदी पर बना चार दशक पुराना पुल गिरने से 18 लोगों की मौत हो गई। दरअसल एक कार्यकर्ता ने दावा किया है उन्होंने ने तीन साल पहले ही पुल की खराब हालत की चेतावनी दी थी। एक अधिकारी ने तब माना भी था कि पुल ज्यादा नहीं टिकेगा, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
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गुजरात में महिसागर नदी पर बना पुल ढहा
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
गुजरात के वडोदरा जिले में महिसागर नदी पर बना चार दशक पुराना पुल बुधवार को ढह गया। इस हादसे में अब तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। लेकिन अब एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने दावा किया है कि तीन साल पहले ही इस पुल की खतरनाक स्थिति को लेकर सरकार को चेताया था। एक अधिकारी ने उस वक्त माना भी था कि पुल ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जो अब एक बड़े हादसे का कारण बन गई।
‘युवा सेना’ नाम की संस्था चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता लखन दरबार ने अगस्त 2022 में एक सरकारी अधिकारी से बात कर इस पुल की हालत को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने पुल को जल्द दुरुस्त करने या नया पुल बनाने की मांग की थी। इसी बातचीत की ऑडियो क्लिप अब वायरल हो रही है। इसमें दरबार लगातार कह रहे हैं कि यह पुल लोगों की जान के लिए खतरा बन सकता है, लेकिन तब भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अधिकारी ने माना था कि पुल ज्यादा नहीं टिकेगा
वायरल ऑडियो क्लिप में सड़क एवं भवन विभाग के एक अधिकारी साफ तौर पर कहते सुने जा सकते हैं कि "हमें भी लगता है कि यह पुल ज्यादा दिन नहीं टिकेगा।" अधिकारी यह भी कहते हैं कि एक प्राइवेट कंसल्टेंट द्वारा कराए गए सर्वे में भी यही निष्कर्ष निकला था। इसके बावजूद विभाग ने सिर्फ प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दिया, लेकिन पुल को बंद नहीं किया गया।
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प्रभावित इलाके का मुख्य संपर्क मार्ग था यह पुल
जिस पुल की बात हो रही है, वह आनंद और वडोदरा जिलों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग था। हर दिन हजारों वाहन इस पर से गुजरते थे। बुधवार सुबह जब पुल का एक हिस्सा गिरा, तो कई गाड़ियां सीधे नदी में जा गिरीं। 17 लोगों की मौत हो चुकी है और रेस्क्यू टीम लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी है। यह हादसा सिर्फ प्रशासन की लापरवाही नहीं, बल्कि चेतावनी के बावजूद कार्रवाई न करने का गंभीर उदाहरण बन गया है।
अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ा संदेह
कार्यकर्ता लखन दरबार ने मीडिया से कहा कि अगर अधिकारियों को पुल की स्थिति के बारे में जानकारी थी, तो उन्होंने इसे तत्काल बंद क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई और पुल को चालू रखा गया, जिससे यह त्रासदी हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों ने जानबूझकर खतरे को नजरअंदाज किया या फिर सिर्फ कागजी कार्रवाई कर इतिश्री कर ली?
सरकारी विभाग का बचाव
हालांकि सड़क एवं भवन विभाग के कार्यकारी इंजीनियर नैनिश नायकवाला का कहना है कि विभाग ने पुल का निरीक्षण किया था और कोई बड़ी खराबी नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि पुल के एक हिस्से में बीयरिंग कोट की समस्या थी जिसे पिछले साल ठीक कर दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि पुल को बंद करने की कोई औपचारिक मांग नहीं की गई थी।
गुजरात में पुल हादसे लगातार
पिछले तीन वर्षों में गुजरात में पुल गिरने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। अक्टूबर 2022 में माच्छू नदी पर मोरबी पुल हादसे में 135 लोगों की मौत हुई थी। जून 2023 में तापी जिले में एक नया पुल गिरा। सितंबर और अक्टूबर 2023 में भी दो बड़े हादसे हुए, जिनमें जानमाल का नुकसान हुआ। अगस्त 2024 में सुरेंद्रनगर जिले में एक और पुल ढह गया. इन सभी हादसों से सरकार और प्रशासन ने कोई ठोस सबक नहीं लिया।
ये भी पढ़ें- केरल में यूनिवर्सिटी गेट पर हंगामा, राज्यपाल पर लगाए आरोप; पुलिस ने संभाला मोर्चा
कांग्रेस ने गुजरात सरकार पर बोला हमला
गुजरात के वडोदरा में पुल गिरने की घटना के एक दिन बाद कांग्रेस ने बड़ा दावा किया है। पार्टी ने कहा कि राज्य में पिछले चार वर्षों में 16 पुल हादसे हो चुके हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे बीजेपी सरकार की नाकामी, भ्रष्टाचार और असंवेदनशीलता का नतीजा बताया। पार्टी ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अगर सरकार ने SIT जांच नहीं कराई तो कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी।
कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने आरोप लगाया कि आम जनता पहले ही पुल की खतरनाक हालत को लेकर चेतावनी दे चुकी थी, लेकिन सरकार ने अनदेखी की। उन्होंने कहा कि गुजरात में दुर्घटना के बाद सिर्फ मुआवजे की राजनीति रह गई है। जनता की जान की कीमत सिर्फ 4 लाख बन गई है। कांग्रेस ने भ्रष्ट कंपनियों को ठेके देने के आरोप भी लगाए।
नोट: अमर उजाला किसी भी ऑडियो क्लिप की पुष्टि नहीं करता है।
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‘युवा सेना’ नाम की संस्था चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता लखन दरबार ने अगस्त 2022 में एक सरकारी अधिकारी से बात कर इस पुल की हालत को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने पुल को जल्द दुरुस्त करने या नया पुल बनाने की मांग की थी। इसी बातचीत की ऑडियो क्लिप अब वायरल हो रही है। इसमें दरबार लगातार कह रहे हैं कि यह पुल लोगों की जान के लिए खतरा बन सकता है, लेकिन तब भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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अधिकारी ने माना था कि पुल ज्यादा नहीं टिकेगा
वायरल ऑडियो क्लिप में सड़क एवं भवन विभाग के एक अधिकारी साफ तौर पर कहते सुने जा सकते हैं कि "हमें भी लगता है कि यह पुल ज्यादा दिन नहीं टिकेगा।" अधिकारी यह भी कहते हैं कि एक प्राइवेट कंसल्टेंट द्वारा कराए गए सर्वे में भी यही निष्कर्ष निकला था। इसके बावजूद विभाग ने सिर्फ प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दिया, लेकिन पुल को बंद नहीं किया गया।
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प्रभावित इलाके का मुख्य संपर्क मार्ग था यह पुल
जिस पुल की बात हो रही है, वह आनंद और वडोदरा जिलों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग था। हर दिन हजारों वाहन इस पर से गुजरते थे। बुधवार सुबह जब पुल का एक हिस्सा गिरा, तो कई गाड़ियां सीधे नदी में जा गिरीं। 17 लोगों की मौत हो चुकी है और रेस्क्यू टीम लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी है। यह हादसा सिर्फ प्रशासन की लापरवाही नहीं, बल्कि चेतावनी के बावजूद कार्रवाई न करने का गंभीर उदाहरण बन गया है।
अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ा संदेह
कार्यकर्ता लखन दरबार ने मीडिया से कहा कि अगर अधिकारियों को पुल की स्थिति के बारे में जानकारी थी, तो उन्होंने इसे तत्काल बंद क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई और पुल को चालू रखा गया, जिससे यह त्रासदी हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों ने जानबूझकर खतरे को नजरअंदाज किया या फिर सिर्फ कागजी कार्रवाई कर इतिश्री कर ली?
सरकारी विभाग का बचाव
हालांकि सड़क एवं भवन विभाग के कार्यकारी इंजीनियर नैनिश नायकवाला का कहना है कि विभाग ने पुल का निरीक्षण किया था और कोई बड़ी खराबी नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि पुल के एक हिस्से में बीयरिंग कोट की समस्या थी जिसे पिछले साल ठीक कर दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि पुल को बंद करने की कोई औपचारिक मांग नहीं की गई थी।
गुजरात में पुल हादसे लगातार
पिछले तीन वर्षों में गुजरात में पुल गिरने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। अक्टूबर 2022 में माच्छू नदी पर मोरबी पुल हादसे में 135 लोगों की मौत हुई थी। जून 2023 में तापी जिले में एक नया पुल गिरा। सितंबर और अक्टूबर 2023 में भी दो बड़े हादसे हुए, जिनमें जानमाल का नुकसान हुआ। अगस्त 2024 में सुरेंद्रनगर जिले में एक और पुल ढह गया. इन सभी हादसों से सरकार और प्रशासन ने कोई ठोस सबक नहीं लिया।
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कांग्रेस ने गुजरात सरकार पर बोला हमला
गुजरात के वडोदरा में पुल गिरने की घटना के एक दिन बाद कांग्रेस ने बड़ा दावा किया है। पार्टी ने कहा कि राज्य में पिछले चार वर्षों में 16 पुल हादसे हो चुके हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे बीजेपी सरकार की नाकामी, भ्रष्टाचार और असंवेदनशीलता का नतीजा बताया। पार्टी ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अगर सरकार ने SIT जांच नहीं कराई तो कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी।
कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने आरोप लगाया कि आम जनता पहले ही पुल की खतरनाक हालत को लेकर चेतावनी दे चुकी थी, लेकिन सरकार ने अनदेखी की। उन्होंने कहा कि गुजरात में दुर्घटना के बाद सिर्फ मुआवजे की राजनीति रह गई है। जनता की जान की कीमत सिर्फ 4 लाख बन गई है। कांग्रेस ने भ्रष्ट कंपनियों को ठेके देने के आरोप भी लगाए।
नोट: अमर उजाला किसी भी ऑडियो क्लिप की पुष्टि नहीं करता है।
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