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Gujarat: सूरत के जंगलों में 50 चीतल क्यों छोड़े गए? प्राकृतिक शिकार उपलब्ध कराने के लिए वन विभाग की पहल

Mon, 20 Jul 2026 11:30 AM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सूरत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सूरत Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 20 Jul 2026 11:30 AM IST
सार

तेंदुओं और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के लिए गुजरात वन विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। सूरत के मांडवी जंगल में सासणगिर से लाए गए 50 चीतल छोड़े गए हैं। इस पहल का उद्देश्य जंगल में तेंदुओं के लिए प्राकृतिक शिकार उपलब्ध कराना और जैवविविधता को मजबूत बनाना है।

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Gujarat: 50 Spotted Deer Released in Surat Forests Know the Objective Behind the Initiative
चीतल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुजरात वन विभाग ने सूरत जिले के मांडवी जंगलों में 50 चीतल (स्पॉटेड डियर) छोड़े हैं। इस पहल का उद्देश्य तेंदुओं जैसे वन्यजीवों को जंगल में प्राकृतिक शिकार उपलब्ध कराना, जैवविविधता को बढ़ावा देना और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है।

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सूरत वन विभाग ने सासणगिर से 50 चीतल लाकर मांडवी के जंगलों में छोड़े हैं। वन विभाग के अनुसार, इस पहल का मकसद तेंदुओं जैसे वन्यजीवों के लिए जंगल में प्राकृतिक भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि वे भोजन की तलाश में मानव बस्तियों की ओर न आएं और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी लाई जा सके। वन अधिकारियों के अनुसार, चीतलों का स्थानांतरण मई और जून के दौरान तीन चरणों में किया गया। 23 मई को 21 चीतल, 18 जून को 16 और 24 जून को 13 चीतल जंगल में छोड़े गए। इस तरह कुल 50 चीतलों को उनके नए प्राकृतिक आवास में बसाया गया।
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सरकार ने इस पहल को लेकर क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि वन्यजीव संरक्षण और विकास साथ-साथ चल सकते हैं तथा मनुष्य और वन्यजीव दोनों का एक साथ समृद्ध होना जरूरी है। इसी दृष्टिकोण से प्रेरित होकर गुजरात सरकार जैवविविधता संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान आधारित वन संरक्षण उपाय लागू कर रही है।
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गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में वन विभाग मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए विज्ञान आधारित संरक्षण उपाय लागू कर रहा है। उन्होंने बताया कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत किया गया यह स्थानांतरण तृणाहारी वन्यजीवों की आबादी बढ़ाकर पर्यावरणीय संतुलन बहाल करने की राज्य की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि यदि शिकारी वन्यजीवों को जंगल में ही उनका प्राकृतिक भोजन मिलता रहेगा, तो उनके मानव बस्तियों की ओर आने की घटनाएं कम हो सकती हैं।

चीतलों की सुरक्षा और निगरानी के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन जयपाल सिंह ने बताया कि मांडवी वन रेंज में पहले से चल रहे संरक्षण कार्यों को आगे बढ़ाते हुए चीतल प्रजनन केंद्र भी स्थापित किया गया है, ताकि स्थानीय तृणाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ाई जा सके।

सूरत सर्कल के वन संरक्षक पुनीत नैय्यर ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों से लैस एक समर्पित क्विक रिस्पॉन्स टीम तैनात की गई है। उन्होंने बताया कि चीतलों को जंगल में छोड़ने से पहले विस्तृत आवासीय मूल्यांकन किया गया था। उनके लिए पूरे वर्ष पानी उपलब्ध रहे, इसके लिए जंगल में 10 स्थायी वाटर प्वॉइंट विकसित किए गए हैं।


वन विभाग ने चीतलों की पोस्ट-रिलीज मॉनिटरिंग के लिए भी विशेष कार्यक्रम तैयार किया है। समर्पित वन रक्षक और प्रशिक्षित ट्रैकर्स लगातार निगरानी कर रहे हैं, जबकि उनकी गतिविधियों, स्वास्थ्य और आवास के उपयोग पर नजर रखने के लिए रणनीतिक स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। वन विभाग के अनुसार, यह पहल दक्षिण गुजरात में पर्यावरणीय संतुलन मजबूत करने, जैवविविधता संरक्षण को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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