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'नीति बुरी तरह नाकाम': तेजाब हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा हलफनामा; क्या कहा?

Tue, 27 Oct 2026 07:55 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 27 Oct 2026 07:55 PM IST
सार

तेजाब हमलों की घटनाएं रोकने में नाकामी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि दिशानिर्देशों के बावजूद हमले हो रहे हैं, यानी नीति बुरी तरह नाकाम रही है। कोर्ट ने केंद्र से तेजाब के दुरुपयोग को रोकने के उपायों का ब्योरा मांगा है। शीर्ष कोर्ट ने क्या कहा, पढ़िए इस रिपोर्ट में। 

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'Guidelines have miserably failed': SC tells Centre to ensure acid sale ban
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देश में तेजाब हमलों की घटनाओं पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ एक सर्कुलर जारी करना काफी नहीं है। उसमें तेजाब की बिक्री पर रोक लगाने की बात संवेदनशील और जोरदार भाषा में लिखने से मकसद पूरा नहीं होगा।
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मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह बात कही। पीठ ने कहा, केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी राज्य तेजाब की बिक्री पर रोक लगाने वाले उसके दिशानिर्देश लागू करें।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
पीठ ने मौखिक टिप्पणी में कहा, आपके दिशानिर्देशों (खुदरा बिक्री पर रोक लगाने वाले) के बावजूद दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हो रही हैं। इसका मतलब है कि कहीं न कहीं कोई कमी है। आपके दिशानिर्देश अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पाए हैं। यह अपने आप में पूरे मामले पर दोबारा विचार करने का एक अच्छा आधार है। आप सिर्फ इस बात से खुश और संतुष्ट नहीं हो सकते कि आपने दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं और अपनी जिम्मेदारी राज्यों पर डाल दी है। 
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शीर्ष कोर्ट ने कहा, नियमों में कई ऐसी खामियां हैं, जिनका लोग गलत फायदा उठा रहे हैं। केंद्र और राज्यों को आपस में तालमेल बिठाना होगा। उन्हें मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा। 

पीठ ने आगे कहा, 'हमें एक ऐसा सर्कुलर दिखाइए, जो आपने किसी राज्य को जारी किया हो। उसमें राज्य से यह पूछा गया हो कि आपके दिशानिर्देशों के बावजूद वहां ऐसी घटनाएं कैसे हुईं? वहां नियम लागू कराने वाली एजेंसियों के अधिकारियों की जवाबदेही कहां है? सर्कुलर में बेहद संवेदनशील भाषा का इस्तेमाल करना और ये सभी निर्देश देना मकसद पूरा नहीं करेगा। हम समझते हैं कि देश में संघीय व्यवस्था है, लेकिन उन्हें याद दिलाने के लिए आपको भी जिम्मेदारी का कुछ हिस्सा साझा करना होगा। अगर ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, तो इसका मतलब है कि नीति बुरी तरह नाकाम रही है'। 

केंद्र सरकार ने क्या बताया?
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने कोर्ट को बताया कि तेजाब की खुदरा बिक्री पर रोक लगाने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश राज्यों को भेजे गए थे। राज्यों ने नियम भी बनाए हैं। लेकिन उन्हें लागू करने की स्थिति बेहद कमजोर है। 

शीर्ष कोर्ट ने केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें उन उपायों का ब्योरा देना होगा, जिन्हें तेजाब के दुरुपयोग को रोकने के लिए लागू करना जरूरी है। तेजाब बाजार में आसानी से उपलब्ध है।


तेजाब हमलों की सजा बढ़ाने का भी सुझाव
शीर्ष कोर्ट ने तेजाब हमलों के मामलों में 'खतरनाक बढ़ोतरी' पर चिंता जताई थी। उसने इन हमलों को 'बर्बर' बताया था। कोर्ट ने पहले केंद्र सरकार को ऐसे अपराधों की सजा बढ़ाने पर विचार करने का सुझाव दिया था। साथ ही, उसने यह भी सुझाव दिया था कि आरोपी पर यह साबित करने की जिम्मेदारी डाली जाए कि वह दोषी नहीं है।

किस याचिका पर सुनवाई कर रही थी कोर्ट?
शीर्ष कोर्ट ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। यह याचिका तेजाब हमले की पीड़िता शाहीन मलिक ने दायर की है। उन्होंने मांग की है कि तेजाब हमले के पीड़ितों को दिव्यांग व्यक्तियों की श्रेणी में रखा जाए। इससे उन्हें कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
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