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आंदोलन की तैयारी: जीएसटी का रिकॉर्ड कलेक्शन,पर कर्मियों-पेंशनर्स को 18 माह का बकाया डीए-डीआर देने को पैसे नहीं
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Amar Ujala
विस्तार
देश में जीएसटी का रिकॉर्ड कलेक्शन हो रहा है, मगर केंद्र एवं राज्य सरकारों के पास करोड़ों कर्मचारियों का 18 माह का बकाया डीए/डीआर देने के लिए पैसे नहीं हैं। कोविड के दौरान केंद्र सरकार ने कर्मियों का लगभग 35 हजार करोड़ रुपये का डीए/डीआर रिलीज नहीं किया था। राज्य सरकार के कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को इसमें जोड़ा जाए तो यह राशि लगभग एक लाख करोड़ रुपये बनती है। उसके बाद कई बार कर्मचारी संगठनों ने सरकार से उक्त राशि को जारी करने की गुहार लगाई, लेकिन केंद्र सरकार ने आर्थिक स्थिति ठीक न होने की बात कहकर डीए/डीआर का बकाया भुगतान करने से मना कर दिया।
इस बाबत संसद में भी सवाल उठा है, मगर सरकार का जवाब नकारात्मक ही रहा। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि फ्रिज किए गए डीए/डीआर की राशि जारी नहीं की गई तो इसके विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन होगा। सरकार के खिलाफ देशभर के करोड़ों कर्मियों व पेंशनर्स में भारी आक्रोश व्याप्त है।
सरकार ने दिया था ये आश्वासन
सुभाष लांबा के मुताबिक, सरकार ने कोरोना काल में जीएसटी कलेक्शन न होने के नाम पर देशभर के करोड़ों कर्मचारियों एवं पेंशनर्स का जनवरी, 2020 से जून 2021 तक 18 महीने का 11 प्रतिशत महंगाई भत्ता/महंगाई राहत को फ्रीज कर दिया गया था। केंद्र की तर्ज पर सभी राज्य सरकारों ने भी अपने कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के 18 महीने के डीए/डीआर को फ्रिज कर दिया था।
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के रोके गए 18 महीने के डीए-डीआर की यह राशि लगभग 35 हजार करोड़ रुपये है। राज्य सरकार के कर्मचारियों एवं पेंशनर्स मिलाकर यह राशि लगभग एक लाख करोड़ रुपये बनती है।
सरकार ने आश्वासन दिया था कि जीएसटी कलेक्शन व अर्थव्यवस्था सामान्य होने पर कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के फ्रिज किए गए डीए-डीआर को रिलीज कर दिया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अनुसार अक्तूबर महीने में 1.72 लाख करोड़ रुपये जीएसटी कलेक्शन प्राप्त हुआ है। अक्तूबर महीने का जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 13 प्रतिशत बढ़ा है।
मासिक जीएसटी 1.66 लाख करोड़
अक्तूबर 2022 में जीएसटी कलेक्शन 1.52 लाख करोड़ रुपये था। वित्त मंत्रालय के दावे के अनुसार 2023-24 वित्त वर्ष में औसतन मासिक जीएसटी कलेक्शन 1.66 लाख करोड़ रहा है। यह वित्तीय वर्ष 2022-23 की तुलना में 11 प्रतिशत ज्यादा है।
लांबा ने कहा कि सरकार का दावा है कि भारत पांचवीं सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है। रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन और मजबूत अर्थव्यवस्था के बावजूद देश के करोड़ों कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के बकाया 18 महीने के डीए डीआर का भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा है। इसके विपरित चालू वित्त वर्ष में ही सरकार ने बड़े पूंजीपतियों 2.14 लाख करोड़ रुपए बट्टे खाते में डाल दिए हैं। यह राशि 2014 से 2022 तक बट्टे खाते में डाले गए 15.32 लाख करोड़ से अलग है। सरकार के उक्त दोहरे रवैए से केंद्र एवं राज्य सरकार के कर्मियों और पेंशनर्स में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अगर शीघ्र डीए डीआर का भुगतान नहीं किया गया तो केंद्र एवं राज्य कर्मचारी और पैंशनर्ज राष्ट्रव्यापी विरोध आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
डीए डीआर का अतिशीघ्र भुगतान हो
कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्पलाइज एंड वर्कर्स के महासचिव रहे आरएन पाराशर के अनुसार, नेशनल काउंसिल जेसीएम की स्टेंडिंग कमेटी की मीटिंग में स्टाफ साइड द्वारा 18 महीने के बकाया डीए-डीआर का भुगतान करने की मांग की गई थी। प्रारंभ में व्यय विभाग के वित्त सचिव ने नकारात्मक जवाब दिया, जिसका स्टाफ साइड में तीखा विरोध किया गया। इसके बाद 18 महीने के बकाया डीए डीआर देने की मांग पर पुनर्विचार करने के आदेश दिए गए। यह मांग अब केंद्रीय वित्त मंत्रालय के पास लंबित हैं। अब औसतन प्रति माह 1.50 लाख करोड़ जीएसटी और 16.61 लाख रुपये आयकर कलेक्शन हो रहा है तो सरकार को करोड़ों कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के बकाया डीए-डीआर का अतिशीघ्र भुगतान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया तो इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा।