जीएसटी में दोहरे नियंत्रण पर नहीं बन पाई सहमति
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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के तहत असेसी पर दोहरे नियंत्रण को लेकर काउंसिल की चौथी बैठक के अंतिम दिन कोई फैसला नहीं हो पाया। हालांकि, इसी मसले पर दिन भर चर्चा हुई, लेकिन केंद्र और राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई। अब केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस मसले पर आगामी 20 नवंबर को सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों से अलग-अलग मिलने का मन बनाया है। इसी वजह से इसी महीने की नौ एवं 10 तारीख को जीएसटी काउंसिल की प्रस्तावित बैठक भी रद्द कर दी गई है।
काउंसिल की चौथी बैठक की समाप्ति के बाद जेटली ने बताया कि शुक्रवार को काउंसिल की बैठक का मूल अजेंडा दोहरा नियंत्रण (क्रॉस एंपावरमेंट) ही था। इस मसले पर दिन भर चर्चा हुई लेकिन सहमति नहीं बन पाई। उनका कहना है कि जीएसटी प्रणाली लागू करने का उद्देश्य असेसी को दोहरे नियंत्रण से राहत देना है।
जब उनके ऊपर केंद्र और राज्य, दोनों का नियंत्रण होगा तो फिर इसका उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मामले में अलग-अलग पांच सुझाव आए लेकिन हॉरिजेंटल और वर्टिकल, दो सुझावों पर ज्यादा चर्चा हुई। पहला डेढ़ करोड़ से नीचे टर्नओवर पर राज्य के अधिकारी और उसके बाद बारी-बारी से केंद्र और राज्य के अधिकारी असेसमेंट करेंगे और दूसरा कि सभी असेसी को दो हिस्सों में बांटकर असेसमेंट का जिम्मा दिया जाए।
काउंसिल की अगली बैठक रद्द
अलग-अलग मिलेंगे जेटली
वित्त मंत्री ने बताया कि अब राज्य के वित्त मंत्रियों से अलग अलग मुलाकात की जाएगी। इसी महीने की 20 तारीख को सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों से मुलाकात की तारीख तय की गई है। उस मुलाकात के दौरान सभी मंत्रियों से अनौपचारिक बातचीत होगी। इस बारे में जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।
काउंसिल की अगली बैठक रद्द
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक नौ एवं 10 नवंबर 2016 को होनी थी। लेकिन अब इसे रद्द कर दिया गया है। 20 नवंबर को राज्यों के वित्त मंत्रियों से मुलाकात कर लेने के बाद कोई सहमति बनाई जाएगी और उस पर औपचारिक सहमति के लिए काउंसिल की बैठक अब 24 एवं 25 नवंबर 2016 को बुलाई गई है।
चार कानूनों का बनाया जाना है मसौदा
जेटली ने बताया कि अगले सप्ताह से अधिकारी सी जीएसटी, एस जीएसटी, आई जीएसटी और क्षतिपूर्ति से संबंधित नियमों का मसौदा तैयार करने में जुट जाएंगे। इन मसौदों को 14-15 नवंबर तक तैयार कर लेना होगा। ऐसा इसलिए ताकि राज्यों को इस पर कम से कम एक सप्ताह का समय मिल सके। उसके बाद ही तो इस पर चर्चा हो सकेगी।