इसरो के GSLV मार्क-3 के साथ क्रायोजेनिक क्लब में पहुंचा भारत, PM मोदी ने दी बधाई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वैज्ञानिक इस लॉन्चिंग को स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़े बदलाव लाने वाले मिशन के तौर पर देख रहे हैं। ये विमान पूरी तरह से स्वदेशी तकनीकी पर आधारित है। जीएसएलवी मार्क-3 क्रायोजेनिक इंजन से लैस है और अपने साथ जीसैट-19 कम्युनिकेशन सेटेलाइट लेकर अंतरिक्ष की यात्रा पर निकला है। जीएसएलवी मार्क-3 को आंध्र प्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा से लांच किया गया।
जीएसएलवी मार्क-3 का प्रक्षेपण पूरी तरह से सफल रहा। जीएसएलवी मार्क-3 का वजन 640 टन है और वो अपने साथ जीसैट-19 सेटेलाइट को लेकर गया है। जीसैट-19 का वजन 3,136 किलोग्राम है।ISRO launches GSLV Mark III carrying GSAT-19
— ANI
communication satellite from Sriharikota, AP pic.twitter.com/MvoRhyD9To
(@ANI_news) June 5, 2017
Launch of ISRO GSLV Mark III carrying GSAT-19 communication satellite was successful
— ANI (@ANI_news) June 5, 2017
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसएलवी मार्क-3 के सफलतापूर्वक लांचिंग पर इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी है।ISRO launches its most powerful rocket GSLV Mark III carrying GSAT-19 communication satellite from Sriharikota, AP #GSLVMK3 pic.twitter.com/3Tnme9Qlz5
— ANI (@ANI_news) June 5, 2017
पीएम मोदी ने कहा कि जीएसएलवी मार्क-3-जीसैट 19 मिशन भारत को अगली पीढ़ी के लांचिंग वीकल और सेटेलाइट प्रक्षेपण के करीब ले जाएगा। इस राष्ट्र को गर्व है।Congratulations to the dedicated scientists of ISRO for the successful launch of GSLV – MKIII D1/GSAT-19 mission.
— Narendra Modi (@narendramodi) June 5, 2017
देश के महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी जीएसएलवी मार्क-3 के ऐतिहासिक प्रक्षेपण पर इसरो को बधाई दी है।The GSLV – MKIII D1/GSAT-19 mission takes India closer to the next generation launch vehicle and satellite capability. The nation is proud!
— Narendra Modi (@narendramodi) June 5, 2017
Heartiest congratulations to ISRO on historic launch of GSLV-Mk III. Nation is proud of this significant achievement: President Mukherjee pic.twitter.com/kfI5Qj9fSV
— ANI (@ANI_news) June 5, 2017
इसरो के पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा सलाहकार के. राधाकृष्णन ने कहा कि यह प्रक्षेपण बड़ा मील का पत्थर है क्योंकि इसरो प्रक्षेपण उपग्रह की क्षमता 2.2-2.3 टन से करीब दोगुना करके 3.5-04 टन कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज अगर भारत को 2.3 टन से अधिक के संचार उपग्रह का प्रक्षेपण करना हो तो हमें विदेश जाना पड़ता था। पर जीएसएलवी मार्क-3 की सफलता से हमनें खुद की क्षमता विकसित कर ली।
GSLV मार्क-3 सफलतापूर्वक प्रक्षेपित, इसरो की सफलता से अंतरिक्ष में भारत की धमक से दुनिया सन्न
जीएसएलवी मार्क-3 के कामकाज शुरू करने के बाद हम संचार उपग्रहों के प्रक्षेपण में आत्मनिर्भर हो जाएंगे और हमें विदेशी ग्राहकों को लुभाने में भी सफल होंगे। 2000 में मंजूर जीएसएलवी मार्क-3 कार्यक्रम से करीबी रूप से जुड़े रहे राधाकृष्णन ने कहा कि यह भविष्य में इसरो का मजबूत प्रक्षेपण यान होने वाला है। इस अभियान के सफल होने से चार टन वजनी उपग्रहों का प्रक्षेपण करने वाले देशों की कतार में भारत भी शामिल हो गया। इस सफलता से हम विदेशी उपभोक्ताओं को आकर्षित करने में सफल होंगे।