BJP: इन समूहों ने की पीएम मोदी से अपील, भाजपा के घोषणापत्र में जरूर शामिल करें यह बात
दुर्लभ बीमारियों के रोगियों के लिए वकालत करने वाले समूहों ने पीएम मोदी से अपील की है कि भाजपा के घोषणापत्र में दुर्लभ बीमारी के रोगियों के लिए निरंतर धन सहायता को शामिल करने की बात शामिल करें।
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लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर सपोर्ट सोसाइटी (एलएसडीएसएस), रेयर डिजीज इंडिया फाउंडेशन (आरडीआईएफ) और नीमन पिक डिजीज चैरिटेबल ट्रस्ट (एनपीडीसीटी) द्वारा पीएम मोदी को एक पत्र लिखा गया है। बता दें कि ये सभी समूह दुर्लभ बीमारियों के रोगियों के लिए वकालत करते हैं। इस पत्र में भाजपा के घोषणापत्र में ऐसे रोगियों के लिए स्थायी धन सहायता को शामिल करने का आग्रह किया गया है। पत्र में लिखा गया है कि दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे रोगियों के जब उनके मुद्दों को एक घोषणापत्र में देखेंगे तो उनकी परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव आएगा और सुधार की आशा जगेगी। इससे यह भी पता चलेगा कि उन रोगियों की आवाज मायने रखती है।
‘नई चुनौतियां पेश कर रही हैं ये बीमारियां’
पत्र में लिखा गया है कि दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति-2021 (एनपीआरडी) ने एक रूपरेखा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त रोगियों की हालत में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समूहों द्वारा कहा गया है कि लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर (एलएसडी), म्यूकोपॉलीसेकेराइडोसिस (एमपीएस) और फैब्री जैसी दुर्लभ बीमारियां अब नई चुनौतियां पेश कर रही हैं।
पत्र में लिखी गई ये बातें
पत्र में लिखा गया है कि सरकार ने अति दुर्लभ रोगियों के लिए धन सहायता का प्रावधान किया है, इससे दुर्लभ रोग के रोगियों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। आगे लिखा गया है कि इन प्रयासों ने न केवल रोगियों को अपना जीवन रक्षक उपचार शुरू करने में मदद की है, बल्कि उन्हें आशा और आश्वासन भी प्रदान किया है। पूरे देश में ऐसे अनगिनत परिवार हैं। समूहों द्वारा लिखा गया है कि पुरानी-दुर्लभ बीमारियों के लिए स्थायी उपचार सहायता अगला महत्वपूर्ण कदम है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पुरानी स्थितियों वाले मरीजों को मापदंडों के आधार पर चल रहे उपचार तक पहुंच प्राप्त हो, जिससे वे पूर्ण जीवन जीने में सक्षम हो सकें। उन्होंने कहा कि बजट में 50 लाख रुपये तक का मौजूदा प्रावधान केवल एक बार का है, जिससे गंभीर और दुर्लभ स्थितियों से पीड़ित रोगियों का जीवन बचाने की प्रक्रिया में बाधा आती है। पत्र में उन्होंने एनपीआरडी-2021 के तहत सभी अधिसूचित रोगियों को समान महत्व प्रदान करने पर जोर दिया है।