ग्राउंड रिपोर्ट मैनपुरी: संपन्न परिवार भी नहीं जानते...बच्चों को क्या खिलाएं
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
इस जिले में कुपोषण के खिलाफ जंग में अशिक्षा, गरीबी, और कम उम्र में शादी बड़ी वजह है। लॉकडाउन के बाद से पुष्टाहार वितरण भी प्रभावित मिला। महिलाओं में गर्भधारण के वक्त और शिशुओं को क्या पोषक तत्व खिलाएं इसकी जानकारी का अभाव था।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
इस जिले में कुपोषण के खिलाफ जंग में अशिक्षा, गरीबी, और कम उम्र में शादी बड़ी वजह है। लॉकडाउन के बाद से पुष्टाहार वितरण भी प्रभावित मिला। महिलाओं में गर्भधारण के वक्त और शिशुओं को क्या पोषक तत्व खिलाएं इसकी जानकारी का अभाव था।
इसके चलते संपन्न परिवार के भी महीने में एक-दो बच्चे एनआरसी में भर्ती होने के लिए आ जाते हैं। गांवों में लॉकडाउन के बाद से पुष्टाहार वितरण प्रभावित मिला। एक गांव में तो केंद्र ही बंद था। ग्रामीणों ने कभी-कभार ही पुष्टाहार मिलने की बात कही।
पुष्टाहार मिलता नहीं, मां-बाप भी अशिक्षित
गांव रमईहार में आठ साल की छाया कमजोर और पतली दिखी। मां-बाप मजदूरी करने गए थे तो चाचा मोहरपाल मिलने आए। बताया कि भइया-भाभी मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। इसको पेट भर के खिलाते हैं, लेकिन शरीर को कुछ लगता नहीं है। जब उनसे आंगनबाड़ी केंद्र से पुष्टाहार के बारे में पूछा तो बताया ज्यादातर बंद रहता है, खुलता है तो कभी-कभार मिल जाता है। पढ़ाई-लिखाई के बारे में पूछा तो भाई-भाभी को अशिक्षित बताया। मैनपुरी के जिला अस्पताल के एनआरसी प्रभारी डॉ. गौरव दुबे ने बताया कि महिलाओं में कुपोषण के खिलाफ जागरूकता कम है। बच्चा बीमार होने पर जब दिखाने आते हैं, तब उन्हें पता चलता है कि उनका बच्चा कुपोषित है।
15 साल की उम्र में शादी, मां समेत दोनों बच्चे कुपोषित
गरीबी के कारण नहीं दे पाते अच्छा भोजन
उद्दैतपुर अभई में साढ़े चार साल की खुशी अतिकुपोषित है। वजन कराने पर 11 किलो मिला, लंबाई कम थी। इसकी मां ज्ञानवती अशिक्षित है। पिता प्रताप सिंह ढकेल लगाता है। 250-300 रुपये रोजाना कमाता है। परिवार में सात सदस्य हैं। गरीबी के कारण बच्चों को पौष्टिक भोजन नहीं दे पाए। छह महीने तक शिशु को स्तनपान कराने में भी लापरवाही बरती। शिशु को गाय-बकरी का दूध भी पिलाया। आंगनबाड़ी केंद्र की टीम जब गांवों में पहुंची तो इसका वजन कराने पर कुपोषण की जानकारी हुई। इनकी दादी मार्गश्री ने बताया कि मेहनत-मजदूरी के कारण बमुश्किल परिवार चल पाता है।
बंद मिला आंगनबाड़ी केंद्र
कुपोषण क्या है गांव वालों को नहीं पता
उद्दैतपुर अभई गांव में आंगनबाड़ी केंद्र पर कार्यकर्ती साधना त्रिवेदी बच्चों का वजन करते मिली। इनसे पता चला कि गांव में छह बच्चे कुपोषित हैं। तीन इसी मजरे और दूसरे अन्य मजरे के हैं। यहां से कुपोषित बच्चे के घर गए तो उसकी मां प्रिंयका मिली। 30 साल की प्रियंका के तीन बच्चे हैं। सबसे छोटा डेढ़ साल का अतिकुपोषित है। इन्होंने छह माह का शिशु होने पर पोषक भोजन नहीं दिया। पूछने पर उन्होंने बताया कि कुछ खाता-पीता नहीं था, तो उसे स्तनपान और बकरी-गाय का दूध पिलाते रहे। बच्चे का वजन और लंबाई पर कोई असर नहीं हुआ। जब आंगनबाड़ी केंद्र से आईं तो उन्होंने बच्चे के कुपोषण होने की जानकारी दी। कुपोषण क्या होता है, इससे पहले नहीं पता था।