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ग्राउंड रिपोर्ट : ऐसा गांव जहां एक ही मकान का एक हिस्सा भारत में है तो दूसरा बांग्लादेश में

Tue, 23 Jul 2019 08:54 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: जितेंद्र भारद्वाज Updated Tue, 23 Jul 2019 08:54 PM IST
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Ground Report of Haripukur village on India Bangladesh Border
हरिपुकुर गांव का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला

आपको यह जानकर कुछ हैरत हो रही होगी, मगर बात सौ फीसदी सच है। यहां एक ही मकान और एक ही गली में भारत और बांग्लादेश मौजूद हैं। दोनों देशों के बीच खींची गई अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा (आईबी) घरों और गलियों में से होकर गुजरती है। किसी घर का एक कमरा भारत में है तो दूसरा कमरा बांग्लादेश की सीमा में पहुंच गया।


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आपको यह जानकर कुछ हैरत हो रही होगी, मगर बात सौ फीसदी सच है। यहां एक ही मकान और एक ही गली में भारत और बांग्लादेश मौजूद हैं। दोनों देशों के बीच खींची गई अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा (आईबी) घरों और गलियों में से होकर गुजरती है। किसी घर का एक कमरा भारत में है तो दूसरा कमरा बांग्लादेश की सीमा में पहुंच गया।

घर का एक दरवाजा भारत में खुल रहा है तो दूसरा दरवाजा बांग्लादेश में खुलता है। एक जगह तो ऐसी है, जहां तीन फुट की गली के बीचों-बीच से आईबी रेखा गुजर रही है। ऐसे में जब कोई आदमी उस गली में चलता है तो उसका एक पांव भारत में टिकता है और दूसरा पांव बांग्लादेश में होता है।

अंदाजा लगा सकते हैं कि बीएसएफ को इतने सघन बॉर्डर पर चौकसी करने में कितना पसीना बहाना पड़ता होगा।

जिग-जैग आकार में खींची गई है सीमा रेखा

हरिपुकुर गांव
हरिपुकुर गांव - फोटो : अमर उजाला
भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर स्थित गांव हरिपुकुर में ऐसी स्थिति देखी जा सकती है। यह गांव बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले में पड़ता है। सीमा रेखा के दूसरी ओर पश्चिम बंगाल का दक्षिण दिनाजपुर जिला है। इस गांव में एक तालाब भी है। हालांकि सीमा रेखा के मुताबिक, वह भारत में है, लेकिन उसका इस्तेमाल दोनों देशों के लोग कर लेते हैं।

इस गांव में अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा जिग-जैग आकार में खींची गई है। तालाब के किनारे से होते हुए जब गांव में प्रवेश करते हैं तो एक गली आती है। इस गली की चौड़ाई मुश्किल से दो-तीन फुट है। गली के एक तरफ भारत है तो दूसरी ओर बांग्लादेश। जब भी कोई व्यक्ति इस गली से गुजरता है तो वह एक साथ भारत-बांग्लादेश में चल रहा होता है।

इसी तरह यहां पर जो मकान बने हैं, वे भी आधे भारत में हैं और आधे बांग्लादेश में हैं। एक मस्जिद है, जिसका आधा-आधा हिस्सा दोनों देशों में है। ग्रामीण सादिक इमरान बताते हैं, यहां कोई दिक्कत नहीं है। लोग घरों में जाते हैं और गली में भी चलते हैं। जब बीएसएफ या बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के जवान गश्त पर आते हैं तो हम सावधान हो जाते हैं। उन्होंने सवाल किया, अब इसमें हमारा क्या कसूर है?

खेतों के बीच खिंची है अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा

हरिपुकुर गांव का तालाब
हरिपुकुर गांव का तालाब - फोटो : अमर उजाला

गांव में खेत-खलिहान या पशुओं के बाड़े भी एक साथ बने हैं। खेतों में जब पानी दिया जाता है तो वह दस इंच चौड़ी आईबी को लांघ कर एक-दूसरे की सीमा में चला जाता है। पश्चिम बंगाल के लोग जब यहां खेती करने आते हैं तो हमसे बात करते हैं। एक साथ बैठते हैं। फसल कटती है तो कभी भारत की सीमा में गिरती है तो कभी बांग्लादेश में।

गांव के पशु सीमा पार जाकर एक-दूसरे देश के खेतों में चरते रहते हैं। उन्हें लाना होता है तो सीमा भी लांघनी पड़ती है। अगर कोई बीमार है या किसी के साथ कोई हादसा हो गया है तो उस वक्त गली के बीच से गुजर रही सीमा रेखा को नहीं देखा जाता। मदद के लिए तुरंत दौड़ पड़ते हैं।

इंटेलीजेंस का बड़ा जरिया हैं सीमा पर बसे ग्रामीण

गांव में गश्त करते बीएसएफ के जवान
गांव में गश्त करते बीएसएफ के जवान - फोटो : अमर उजाला

बीएसएफ के अधिकारी बताते हैं कि वे समय-समय पर यहां गश्त करते रहते हैं। चूंकि बॉर्डर इतनी सघन आबादी के बीच है कि वहां हर समय नजर रखना संभव नहीं हो पाता। उदाहरण के लिए आप मस्जिद को ही ले लें। यहां पर नमाज पढ़ने के लिए दोनों देशों के लोग आते हैं। मस्जिद का ढांचा भी दोनों देशों में बंटा है। सप्ताह में बीएसएफ के जवान कई बार ग्रामीणों के साथ बैठते हैं।

दरअसल, ये ग्रामीण इंटेलीजेंस का बड़ा जरिया हैं। जब भी कोई संदिग्ध व्यक्ति गांव में प्रवेश करता है या आसपास नजर आता है तो वे लोग बीएसएफ को बता देते हैं। कोई व्यक्ति संदिग्ध उपकरण या सामग्री लेकर गांव में आया है तो देर-सवेर इसकी जानकारी बीएसएफ तक पहुंच ही जाती है। बीएसएफ संदिग्ध व्यक्ति को पकड़कर पुलिस के हवाले कर देती है।

स्थिति का इस तरह  फायदा उठाते हैं तस्कर

ग्रामीणों से मिलते बीएसएफ के जवान
ग्रामीणों से मिलते बीएसएफ के जवान - फोटो : अमर उजाला

बीएसएफ के लिए इस बॉर्डर की चौकसी करना खासा मुश्किल है। अगर कोई तस्कर आगे भाग रहा है और उसके पीछे बीएसएफ है तो वह गली के किसी भी उस मकान में घुस जाता है जो बांग्लादेश की सीमा में पड़ता है। इसके बाद बीएसएफ वाले सिवाय इंतजार या चेतावनी देने के कुछ नहीं कर सकते। गांव के अनेक ऐसे घर हैं, जिनका आगे का दरवाजा भारत में खुलता है तो पीछे का बांग्लादेश में।

तस्कर इसी का फायदा उठाते हैं। जैसे ही उन्हें भनक लगती है कि पुलिस या बीएसएफ वाले आ रहे हैं तो वे संदिग्ध वस्तु या सामान को गली के पार फेंक देते हैं। यानी वह वस्तु अब सीमा के पार चली गई है। बीएसएफ के कमांडेंट बीएस नेगी बताते हैं, हमारे जवान संदिग्ध गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रखते हैं।

अगर हमारे पास इंटेलीजेंस से कोई ऐसी सूचना आई है कि बांग्लादेश की सीमा में गलत हरकत हो रही है या तस्कर कोई संदिग्ध वस्तु लाएं हैं तो हम बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश को सूचित कर देते हैं। वे पूरा सहयोग करते हैं और आरोपी पकड़ा जाता है। बीएसएफ और बीजीबी संयुक्त गश्त भी करती है।

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