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Service Charge: रेस्टोरेंट-होटलों की मनमानी पर रोक लगाने की तैयारी, सेवा शुल्क वसूली रोकने के लिए बनेगा कानूनी ढांचा
Thu, 02 Jun 2022 08:54 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 02 Jun 2022 08:54 PM IST
सार
अधिकारी ने कहा कि हम जल्द ही एक कानूनी ढांचे पर काम करेंगे क्योंकि 2017 के दिशानिर्देश थे जिन्हें उन्होंने लागू नहीं किया है।
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होटल-रेस्टोरेंट में सेवा शुल्क
- फोटो : PTI
विस्तार
उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने गुरुवार को कहा कि सरकार जल्द ही ग्राहकों से सेवा शुल्क वसूलने वाले रेस्तरां को रोकने के लिए एक कानूनी ढांचा लाएगी क्योंकि यह प्रथा गलत है। रेस्तरां और उपभोक्ताओं के संघों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक के बाद सिंह ने कहा कि हालांकि संघों का दावा है कि यह प्रथा कानूनी है, उपभोक्ता मामलों के विभाग का विचार है कि यह उपभोक्ताओं के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और यह अनुचित है। उन्होंने कहा कि हम जल्द ही एक कानूनी ढांचे पर काम करेंगे क्योंकि 2017 के दिशानिर्देश थे जिन्हें उन्होंने लागू नहीं किया है। दिशानिर्देश आमतौर पर कानूनी रूप से लागू करने योग्य नहीं होते हैं।
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होटल प्रतिनिधियों ने कहा, सेवा शुल्क लगाना गैर-कानूनी नहीं
बैठक में नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI), फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FHRAI) और मुंबई ग्राहक पंचायत और पुष्पा गिरिमाजी सहित उपभोक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस प्रथा को रोकने के लिए बनने वाला कानूनी ढांचा उन पर कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा। उन्होंने कहा कि आमतौर पर उपभोक्ता सेवा शुल्क और सेवा कर के बीच भ्रमित हो जाते हैं और भुगतान करना बंद कर देते हैं। बैठक के दौरान एनआरएआई और एफएचआरएआई के प्रतिनिधियों ने कहा कि सेवा शुल्क लगाना गैर कानूनी नहीं है।
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उपभोक्ता संगठनों ने कहा, सेवा शुल्क लगाना पूरी तरह से मनमाना
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि बैठक के दौरान विभाग की राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर उपभोक्ताओं द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई। ये सेवा शुल्क के अनिवार्य लेवी से संबंधित थे, जिसमें ग्राहकों की स्पष्ट सहमति के बिना शुल्क जोड़ना, इस तरह का शुल्क वैकल्पिक और स्वैच्छिक होने और ऐसे शुल्क का भुगतान करने का विरोध करने पर उपभोक्ताओं को शर्मिंदा करना जैसे मामले शामिल थे।
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विज्ञप्ति के अनुसार, उपभोक्ता संगठनों ने पाया कि सेवा शुल्क लगाना पूरी तरह से मनमाना है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत एक अनुचित और साथ ही गलत व्यापार प्रथा को बढ़ावा देता है। इस तरह के आरोप की वैधता पर सवाल उठाते हुए इस बात पर प्रकाश डाला गया कि चूंकि रेस्तरां/होटलों में भोजन की कीमतें तय करने पर कोई रोक नहीं है, जिसमें सेवा शुल्क के नाम पर अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है, जो उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन है।