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Presidential Candidate: द्रौपदी मुर्मू होंगी एनडीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार, आदिवासी और महिला समीकरणों को साधने की कवायद

Tue, 21 Jun 2022 11:45 PM IST
Jeet Kumar अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Tue, 21 Jun 2022 11:45 PM IST
सार

द्रौपदी मुर्मू का नाम सामने आने के बाद पार्टी इन वोटरों के बीच भी अपनी पकड़ बनाने में कामयाब हो सकेगी। आदिवासी समुदाय की एक बड़ी आबादी झारखंड, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में निवास करती है।

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Governor of Jharkhand Draupadi Murmu will be NDA presidential candidate
द्रौपदी मुर्मू - फोटो : ANI

विस्तार

झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू एनडीए की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार होंगी। भाजपा ने संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी के तौर पर उनके नाम का ऐलान किया। माना जा रहा है कि देश के आदिवासी समुदाय को साधने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने मुर्मू के नाम का दांव खेला है।

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चूंकि मुर्मू ओडिशा से आती हैं, इसलिए उनके नाम के सामने आ जाने से ओडिशा की नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल भी उनके समर्थन के लिए आसानी से तैयार हो जाएगी और एनडीए प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित हो सकती है। द्रौपदी मुर्मू के नाम के सहारे भाजपा ने अपने दक्षिण भारत मिशन को भी साधने की कोशिश की है।
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क्योंकि दक्षिण के आंध्र प्रदेश कर्नाटक तेलंगाना तमिलनाडु में आदिवासी समुदाय की खासी संख्या है। एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनाकर मोदी सरकार ने महिलाओं के बीच भी एक सकारात्मक संदेश देने की रणनीति अपनाई है।
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दरअसल, प्रधानमंत्री के अपने राज्य गुजरात में आदिवासी समुदाय के वोटरों के बीच भाजपा की पकड़ अब तक मजबूत नहीं हो पाई है। इन वोटरों के बीच अभी भी पारंपरिक तौर पर कांग्रेस की जड़ें मजबूत हैं। गुजरात विधानसभा के चुनाव इसी साल के अंत में होने हैं, लिहाजा द्रौपदी मुर्मू का नाम सामने आ जाने के बाद भाजपा इस वोट बैंक को साधने में भी कामयाब हो सकेगी।

साथ ही, आदिवासी समुदाय की बड़ी आबादी तेलंगाना में भी निवास करती है। भाजपा इस बार तेलंगाना में अपने लिए बड़ी संभावनाएं खोज रही है। द्रौपदी मुर्मू का नाम सामने आने के बाद पार्टी इन वोटरों के बीच भी अपनी पकड़ बनाने में कामयाब हो सकेगी। आदिवासी समुदाय की एक बड़ी आबादी झारखंड, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में निवास करती है। भाजपा ने द्रौपदी मुर्मू का नाम आगे कर इन वोटरों तक एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है।

 दक्षिण भारत मिशन होगा कामयाब
पहले से कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा इस बार दक्षिण भारत मिशन को सफल बनाने के लिए इसी क्षेत्र से किसी व्यक्ति को राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ा सकती है। दक्षिण भारत के राज्यों में द्रविड़ राजनीति की मजबूती के कारण भी भाजपा के लिए यह ज्यादा अपेक्षित था कि वह किसी आदिवासी समुदाय के व्यक्ति को राष्ट्रपति के तौर पर पेश करे। अंततः पार्टी ने उसी रणनीति पर काम करते हुए द्रौपदी मुर्मू के नाम पर मुहर लगा दी। वे ओडिशा से विधायक और सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं।

जीवन परिचय
द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा में हुआ था। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण तुडू था। उनका विवाह श्याम चरण मुर्मू के साथ हुआ था। उनकी बेटी इतिश्री मुर्मू हैं। उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की है। वे ओडिशा की पहली महिला नेता हैं जिन्हें राष्ट्रपति जैसे प्रतिष्ठित पद के लिए प्रत्याशी बनाया गया है।  


 उन्होंने जूनियर असिस्टेंट के रूप में 1979 में ओडिशा सरकार में काम के साथ अपने करियर की शुरूआत की थी। बाद में वे राजनीति में आ गईं और विधायक चुनी गईं। भाजपा-बीजेडी सरकार में मंत्री पद संभालने के बाद उन्हें राज्यपाल के तौर पर काम करने का अनुभव भी मिला। अब उन्हें राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाया गया है। माना जा रहा है कि विपक्ष के प्रत्याशी यशवंत सिन्हां को टक्कर देंगी। तमाम समीकरणों को देखते हुए द्रौपदी मुर्मू की जीत तय मानी जा रही है।

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