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Vande Mataram: 'सरकार अधिसूचना वापस ले, अनिवार्य करना सही नहीं', वंदे मातरम पर बोले मौलाना इमरान रशादी
Fri, 13 Feb 2026 07:05 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Fri, 13 Feb 2026 07:05 PM IST
सार
केंद्र सरकार ने हाल ही में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर नए दिशा निर्देश जारी किए हैं, इसी बीच मौलाना मौलाना मोहम्मद मकसूद इमरान रशादी ने कहा कि वंदे मातरम की कुछ पंक्तियां हमारी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि गैर-मुस्लिम भाई वंदे मातरम गाते हैं, तो हमें कोई ऐतराज नहीं है।
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मौलाना इमरान रशादी
- फोटो : आईएएनएस
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विस्तार
केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर नए दिशा निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन-गण-मन की तरह ही सम्मान देना अनिवार्य कर दिया गया है। नए प्रोटोकॉल के तहत सभी सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सभी छह छंद बजाए या गाए जाएंगे। इसी बीच वंदे मातरम गायन को लेकर केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के खिलाफ विरोध जारी है। मौलाना मौलाना मोहम्मद मकसूद इमरान रशादी ने कहा कि वंदे मातरम की कुछ पंक्तियां हमारी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ हैं।
यह भी पढ़ें- Parliament: नौ साल में जजों के खिलाफ मिलीं 8600 से ज्यादा शिकायतें, संसद में सरकार ने दी जानकारी
गैर-मुस्लिम भाई वंदे मातरम गाते हैं, तो हमें कोई ऐतराज नहीं है,
बेंगलुरु में आईएएनएस से बातचीत में मौलाना मोहम्मद मकसूद इमरान रशादी ने कहा कि देखिए, भारत एक सेक्युलर देश है और भारतीय संविधान में हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने और उसका पालन करने का अधिकार दिया गया है। हिंदू को अपने धर्म के अनुसार पूजा-पाठ करने की इजाजत है, तो वैसे ही मुसलमानों को भी अधिकार है। इसलिए, यदि हमारे गैर-मुस्लिम भाई वंदे मातरम गाते हैं, तो हमें कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन मुसलमान होने के नाते हमारी मान्यताओं के अनुसार, इस गीत में कुछ देवी-देवताओं का जिक्र है, जिस कारण हमारे बुजुर्गों ने इसे हमारे लिए मुनासिब नहीं माना। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार वंदे मातरम पर जो नया नोटिफिकेशन लाई है, यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के भी खिलाफ लगता है।
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यह भी पढ़ें- अजित पवार की मौत हादसा या साजिश?: भतीजे रोहित पवार के आरोपों के बीच NCP का बड़ा बयान; गहन जांच की मांग
इसे अनिवार्य बनाना उचित नहीं
मौलाना मोहम्मद मकसूद इमरान रशादी ने कहा कि हमारा विरोध केवल इतना है कि अगर गैर-मुस्लिम भाई इसे गाएं या पढ़ें, तो हमें कोई आपत्ति नहीं, लेकिन इसे अनिवार्य बनाना और स्कूलों में सभी बच्चों (जिनमें मुस्लिम बच्चे भी शामिल हैं) के लिए इसे पढ़ना जरूरी करना उचित नहीं है, क्योंकि गीत की कुछ पंक्तियां हमारी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध हैं। हम राष्ट्रगान पढ़ते हैं और उसे पढ़ने दिया जाए। हमें राष्ट्रगान से भी कोई दिक्कत नहीं है। वंदे मातरम के गायन को लेकर जबरदस्ती न की जाए। कर्नाटक में अमन चैन बना रहे, इसके जरिए तनाव पैदा न किया जाए।
इसके साथ ही मौलाना ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि वे इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचें। और अमन-चैन भंग न हो। उन्होंने मांग की कि सरकार इस नोटिफिकेशन को वापस ले। उन्होंने कहा कि हम सियासी मामलों में दखल नहीं देते। हमारा काम तालीम के सिलसिले में काम करना और लोगों के बीच मोहब्बत और एकता की भावना पैदा करना है।
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गैर-मुस्लिम भाई वंदे मातरम गाते हैं, तो हमें कोई ऐतराज नहीं है,
बेंगलुरु में आईएएनएस से बातचीत में मौलाना मोहम्मद मकसूद इमरान रशादी ने कहा कि देखिए, भारत एक सेक्युलर देश है और भारतीय संविधान में हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने और उसका पालन करने का अधिकार दिया गया है। हिंदू को अपने धर्म के अनुसार पूजा-पाठ करने की इजाजत है, तो वैसे ही मुसलमानों को भी अधिकार है। इसलिए, यदि हमारे गैर-मुस्लिम भाई वंदे मातरम गाते हैं, तो हमें कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन मुसलमान होने के नाते हमारी मान्यताओं के अनुसार, इस गीत में कुछ देवी-देवताओं का जिक्र है, जिस कारण हमारे बुजुर्गों ने इसे हमारे लिए मुनासिब नहीं माना। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार वंदे मातरम पर जो नया नोटिफिकेशन लाई है, यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के भी खिलाफ लगता है।
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इसे अनिवार्य बनाना उचित नहीं
मौलाना मोहम्मद मकसूद इमरान रशादी ने कहा कि हमारा विरोध केवल इतना है कि अगर गैर-मुस्लिम भाई इसे गाएं या पढ़ें, तो हमें कोई आपत्ति नहीं, लेकिन इसे अनिवार्य बनाना और स्कूलों में सभी बच्चों (जिनमें मुस्लिम बच्चे भी शामिल हैं) के लिए इसे पढ़ना जरूरी करना उचित नहीं है, क्योंकि गीत की कुछ पंक्तियां हमारी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध हैं। हम राष्ट्रगान पढ़ते हैं और उसे पढ़ने दिया जाए। हमें राष्ट्रगान से भी कोई दिक्कत नहीं है। वंदे मातरम के गायन को लेकर जबरदस्ती न की जाए। कर्नाटक में अमन चैन बना रहे, इसके जरिए तनाव पैदा न किया जाए।
इसके साथ ही मौलाना ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि वे इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचें। और अमन-चैन भंग न हो। उन्होंने मांग की कि सरकार इस नोटिफिकेशन को वापस ले। उन्होंने कहा कि हम सियासी मामलों में दखल नहीं देते। हमारा काम तालीम के सिलसिले में काम करना और लोगों के बीच मोहब्बत और एकता की भावना पैदा करना है।
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