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सरकार को चार साल बाद याद आए गांधी शांति पुरस्कार

Thu, 17 Jan 2019 12:11 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Thu, 17 Jan 2019 12:11 AM IST
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Government remembers Gandhi peace award four years later
Mahatma Gandhi Peace Prize

केंद्र सरकार को चार साल बाद आखिरकार गांधी शांति पुरस्कार की याद आ ही गई। सरकार ने बुधवार को 2015 से 2018 तक के लिए इस पुरस्कार को पाने वालों के नाम घोषित किए। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 125वें जन्मशती वर्ष में 1995 में शुरू किए गए इस पुरस्कार को आखिरी बार वर्ष 2014 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को दिया गया था, लेकिन इसके बाद सरकार ने इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया था। 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्षी दल कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की मौजूदगी वाले चयन पैनल ने बुधवार को एक बैठक में 2015 से 2018 तक इस पुरस्कार को पाने वाले नामों पर विचार किया। बैठक के बाद बताया गया कि 2015 के लिए ग्रामीण विकास व शिक्षा के क्षेत्र में अहम काम करने वाले कन्याकुमारी के विवेकानंद केंद्र को चुना गया है, जबकि 2016 का पुरस्कार पूरे देश में बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराने वाले अक्षय पात्र फाउंडेशन व हाथ से मैला ढोने वालों के उद्धार का काम करने वाले सुलभ इंटरनेशनल को संयुक्त रूप से मिलेगा। 
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सरकार की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, 2017 के लिए आदिवासी बच्चों की शिक्षा का अभियान चलाने वाले एकल अभियान ट्रस्ट को तथा पिछले साल यानी 2018 के लिए कुष्ठ रोग निवारण में अहम भूमिका निभाने वाले जापान के योहेई सासाकावा को चुना गया है। सासाकावा विश्व स्वास्थ्य संगठन के गुडविल एंबेसडर भी हैं।
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मिल चुका है नामी लोगों को

गांधी शांति पुरस्कार के विजेताओं को 1 करोड़ रुपये, एक प्रशस्ति पत्र पट्टिका और हस्तशिल्प उत्पाद दिया जाता है। पिछले 25 साल में यह पुरस्कार कई मशहूर लोगों को दिया जा चुका है, जिनमें वर्ष 2000 में दक्षिण अफीका के पूर्व राष्ट्रपति व मशहूर गांधीवादी नेल्सन मंडेला, वर्ष 2005 में आर्कबिशप डेसमंड टुटु और वर्ष्ज्ञ 2013 में चिपको आंदोलन के प्रणेता चंडी प्रसाद भट्ट जैसे नाम शामिल हैं।

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