फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Government preparing to give equal status like Supreme Court judges to Election Commissioners

संसद: चुनाव आयुक्तों को शीर्ष कोर्ट के जज के बराबर दर्जा देने की तैयारी में सरकार, जानिए क्या है पूरा मामला

Tue, 19 Sep 2023 05:45 AM IST
जलज मिश्रा हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 19 Sep 2023 05:45 AM IST
सार

विधेयक में सीईसी और ईसी को कैबिनेट सचिव के बराबर दर्जा दिए जाने का प्रावधान है। ऐसा किए जाने पर हालांकि इनके वेतन और सुविधाओं में कोई कमी नहीं होगी, मगर ये जज के अनुरूप नहीं बल्कि नौकरशाह माने जाएंगे।

विज्ञापन
Government preparing to give equal status like Supreme Court judges to Election Commissioners
संसद - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सोमवार से शुरू हुए संसद के विशेष सत्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्त (ईसी) की नियुक्ति संबंधी विधेयक पेश किए जाने पर संशय है। दरअसल विपक्ष के विरोध के बाद सरकार ने इस विधेयक पर पुनर्विचार करना शुरू किया है। सरकार सीईसी और ईसी को पहले की तरह सुप्रीम कोर्ट के जज के बराबर दर्जा दिए जाने संबंधी प्रावधान तय करने के लिए विधेयक में संशोधन पर विचार कर रही है।

विज्ञापन

दरअसल, इस विधेयक में सीईसी और ईसी को कैबिनेट सचिव के बराबर दर्जा दिए जाने का प्रावधान है। ऐसा किए जाने पर हालांकि इनके वेतन और सुविधाओं में कोई कमी नहीं होगी, मगर ये जज के अनुरूप नहीं बल्कि नौकरशाह माने जाएंगे। इसी आशय का हवाला दे कर रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा था। इस संबंध में  सरकारी सूत्र ने स्वीकार किया कि बीते सत्र में राज्यसभा में पेश किए गए विधेयक में इस आशय का संशोधन पर विचार किया जा रहा है। सीईसी-ईसी को पहले की तरह सुप्रीम कोर्ट के बराबर दर्जा दिए जाने पर हालांकि सैद्धांतिक सहमति है, मगर इस पर फिलहाल अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यही कारण है कि सर्वदलीय बैठक में सरकार ने विशेष सत्र में पेश किए जाने वाले आठ विधेयकों की सूची विपक्ष को दी थी, उसमें इस विधेयक का नाम नहीं है।

विज्ञापन

तय नहीं है इसी सत्र में पेश होना
विधेयक को इसी सत्र में पेश किए जाने पर संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने सीधा जवाब नहीं दिया। जब उनसे पूछा गया कि पेश किए जाने वाले आठ विधेयकों की सूची में नियुक्ति विधेयक को शामिल क्यों नहीं किया गया है तो  उन्होंने कहा कि कौन से विधेयक पेश होंगे, इस संदर्भ में जितना बताना था उतना बता दिया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

विपक्ष को कई दूसरे प्रावधानों पर भी है आपत्ति
विपक्ष को इस विधेयक के दूसरे कई प्रावधानों पर भी आपत्ति है। पहली आपत्ति नियुक्ति संबंधी कमेटी में देश के मुख्य न्यायाधीश को शामिल नहीं किए जाने की है। सरकार की प्रस्तावित कमेटी में पीएम, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता और एक केंद्रीय मंत्री को रखा गया है। इसी प्रकार सर्च कमेटी में भी नौकरशाहों की भूमिका तय की गई है। विपक्ष का कहना है कि बहुमत के साथ सरकार मनमाने तरीके से सीईसी-ईसी की नियुक्ति कर सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed