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Govt Employees: सरकारी जॉब को हल्के में लेना पड़ेगा महंगा, 49 लाख कर्मियों की समीक्षा, रिटायरमेंट की तैयारी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 29 Jun 2024 01:03 PM IST
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सार
डीओपीटी ने अगस्त 2020 में भी एक ऐसा ही आदेश जारी किया था। अब देखने में आ रहा है कि विभिन्न मंत्रालय और विभाग, उक्त आदेश का पालन सही से नहीं कर रहे हैं। तय नियम के अनुसार, कर्मियों और अधिकारियों के कामकाज की आवधिक समीक्षा नहीं हो रही है। 
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government planning early retirement for 49 lakh employees after performance assessment
सरकारी कर्मचारियों को जबरन रिटायर करने की तैयारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार की नौकरी को हल्के में लेने वाले कर्मचारी/अधिकारी फंस सकते हैं। सरकार ने 49 लाख कर्मियों की आवधिक समीक्षा को गंभीरता से लिया है। जिन कर्मियों का कामकाज ठीक नहीं होगा, उन्हें जबरन रिटायर करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा 27 जून को इस बाबत एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया गया है। उसमें सभी मंत्रालयों और विभागों से कहा गया है कि जिनकी कर्मियों की ईमानदारी संदिग्ध है, उनके कामकाज की रिपोर्ट ठीक नहीं है, उनकी सूची तैयार करें। हर माह ऐसे कितने कर्मचारी हैं, जिनके खिलाफ जबरन रिटायरमेंट देने का आदेश जारी हुआ है, उसकी सूची बनाकर डीओपीटी को प्रेषित करें।


तीसरे कॉलम में लिखनी है कर्मियों की संख्या
डीओपीटी ने इसके लिए एक फॉरमेट भी तैयार किया है। उसमें चार कॉलम शामिल किए गए हैं। पहले कॉलम में ग्रुप वाइज ए, बी, सी कर्मियों की संख्या बतानी है, जिनकी 'मूल नियम (एफआर) 56 (j)/(1)/रूल 42 ऑफ सीसीएस (पेंशन) रूल्स 2021' के तहत आवधिक समीक्षा की गई है। दूसरे कॉलम में भी ग्रुप वाइज ए, बी, सी के ऐसे कर्मियों की संख्या बतानी है, जिनकी एफआर 56 (j)/(1)/रूल 42 ऑफ सीसीएस (पेंशन) रूल्स 2021' के अंतर्गत समीक्षा की गई है। तीसरे कॉलम में ऐसे कर्मियों की संख्या लिखनी है, जिनके खिलाफ एफआर 56 (j)/(1)/रूल 42 ऑफ सीसीएस (पेंशन) रूल्स 2021' को लागू/सिफारिश किया गया है। चौथे कॉलम में ऐसे कर्मियों की ग्रुप वाइज ए, बी, सी संख्या बतानी है कि जिन्हें एफआर 56 (j)/(1)/रूल 42 ऑफ सीसीएस (पेंशन) रूल्स 2021' के तहत समय पूर्व रिटायरमेंट दी गई है।


हर माह 15वें दिन तक रिपोर्ट
डीओपीटी ने अगस्त 2020 में भी एक ऐसा ही आदेश जारी किया था। अब देखने में आ रहा है कि विभिन्न मंत्रालय और विभाग, उक्त आदेश का पालन सही से नहीं कर रहे हैं। तय नियम के अनुसार, कर्मियों और अधिकारियों के कामकाज की आवधिक समीक्षा नहीं हो रही है। ऐसे में डीओपीटी ने अब केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को उक्त नियमों का पालन करने के लिए कठोर शब्दों में एक पत्र लिखा है। इसके लिए बाकायदा एक फॉर्मेट भी जारी किया गया है। आवधिक समीक्षा की रिपोर्ट हर माह में 15वें दिन तक पहुंच जानी चाहिए। यह प्रक्रिया जुलाई 2024 से शुरू होगी। माकूल अथॉरिटी को यह अधिकार है कि वह किसी भी सरकारी कर्मचारी को नियमों के तहत रिटायर कर सकती है। बशर्ते वह केस जनहित के लिए आवश्यक हो। इस तरह के मामलों में संबंधित कर्मचारी को तीन माह का अग्रिम वेतन देकर रिटायर कर दिया जाता है। कई मामलों में उन्हें तीन महीने पहले अग्रिम 'लिखित नोटिस' भी देने का नियम है।

तीन माह का नोटिस देकर रिटायर
ग्रुप 'ए' और 'बी' में तदर्थ या स्थायी क्षमता में कार्यरत किसी कर्मी ने 35 साल की आयु से पहले सरकारी सेवा में प्रवेश किया है या उसकी आयु 50 साल पूरी होने पर रिटायरमेंट का नोटिस दिया जा सकता है। अन्य मामलों में 55 साल की आयु के बाद का नियम है। अगर कोई कर्मी ग्रुप 'सी' में है और वह किसी पेंशन नियमों द्वारा शासित नहीं है, तो उसे 30 साल की नौकरी के बाद तीन माह का नोटिस देकर रिटायर किया जा सकता है। केंद्र सरकार के कर्मियों का सेवाकाल कितना होगा, यह उनके कामकाज की आवधिक समीक्षा पर निर्भर करेगा। अगर कामकाज ठीक नहीं है, तो संबंधित कर्मचारी को समय पूर्व रिटायरमेंट दी जा सकती है। केंद्र सरकार ने अब यह साफ कर दिया है कि आवधिक समीक्षा को सख्ती से लागू किया जाएगा। अगर जनहित में किसी कर्मचारी को समय पूर्व रिटायरमेंट दिया जाता है तो वह कोई पेनाल्टी नहीं है। नियमों में ऐसा प्रावधान है।  

केंद्रीय मंत्रालयों ने गंभीरता से नहीं लिया
केंद्र सरकार ने कामकाज को लेकर कई बार अपने कर्मियों को चेताया है। चार साल पहले भी इस तरह के आदेश जारी किए गए थे। सभी मंत्रालयों को कर्मचारियों की समीक्षा रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया था। उसके बाद कई मंत्रालयों ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया। कुछ विभागों ने तो जानकारी ही नहीं दी। केंद्र के बार-बार दोहराने के बाद भी तय फॉर्मेट में सूचना नहीं दी गई। अब डीओपीटी ने दोबारा से कार्यालय ज्ञापन जारी किया है। इससे वे कर्मचारी, जिन्होंने सेवा के तीस वर्ष पूरे कर लिए हैं और उनके कामकाज की रिपोर्ट ठीक नहीं रहती, ज्यादा भयभीत हैं। डीओपीटी ने सभी मंत्रालयों और विभागों को जो कार्यालय ज्ञापन भेजा है, उसमें समीक्षा रिपोर्ट तैयार करने के बारे में विस्तार से समझाया गया है।

समय पूर्व रिटायरमेंट, जबरन सेवानिवृत्ति नहीं है
कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक, जनहित में विभागीय कार्यों को गति देने, अर्थव्यवस्था के चलते और प्रशासन में दक्षता लाने के लिए मूल नियमों में समय पूर्व रिटायरमेंट देने का प्रावधान है। चार वर्ष पहले जो कार्यालय ज्ञापन जारी किया गया था, उसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए फैसलों का हवाला भी दिया है। माकूल अथॉरिटी के पास यह अधिकार है कि वह किसी भी सरकारी कर्मचारी को डीओपीटी के नियमों के तहत रिटायर कर सकती है। केंद्र सरकार में ग्रुप 'ए' और 'बी' में तदर्थ या स्थायी क्षमता में कार्यरत किसी कर्मी ने 35 साल की आयु से पहले सरकारी सेवा में प्रवेश किया है या उसकी आयु 50 साल पूरी होने पर उसे रिटायरमेंट का नोटिस दिया जा सकता है। अन्य मामलों में 55 साल की आयु के बाद रिटायरमेंट का नोटिस देने का नियम है। अगर कोई कर्मी ग्रुप 'सी' में है और वह किसी पेंशन नियमों द्वारा शासित नहीं है, तो उसे 30 साल की नौकरी के बाद तीन माह का नोटिस देकर रिटायर किया जा सकता है। किसी भी उस कर्मचारी को, जिसने तीस साल की सेवा पूरी कर ली है, उसे भी सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। इस श्रेणी में वे कर्मचारी शामिल होते हैं, जो पेंशन के दायरे में आते हैं। ऐसे कर्मियों को रिटायरमेंट की तिथि से तीन महीने पहले नोटिस या तीन महीने का अग्रिम वेतन और भत्ते देकर उसे सेवानिवृत्त किया जा सकता है। खास बात है कि इन केसों में भी जनहित के नियम को देखा जाता है।

जनहित में किसी कर्मी को सेवा में रखा भी जा सकता है
डीओपीटी ने सभी विभागों को एक रजिस्टर तैयार करने के लिए कहा था। इसमें उन कर्मचारियों का ब्योरा होता है, जो 50/55 साल की आयु पार कर चुके हैं। इनकी तीस साल की सेवा भी पूरी होनी चाहिए (नियम 48)। ऐसे कर्मियों के कामकाज की समय-समय पर समीक्षा की जाती है। सरकार ने यह विकल्प अपने पास रखा है कि वह जनहित में किसी भी अधिकारी को सेवा में रख सकती है, जिसे उसकी माकूल अथॉरिटी ने समय पूर्व सेवानिवृत्ति पर भेजने के निर्णय की दोबारा समीक्षा करने के लिए कहा हो। ऐसे केस में यह बताना होगा कि जिस अधिकारी या कर्मी को सेवा में नियमित रखा गया है, उसने पिछले कार्यकाल में कौन सा विशेष कार्य किया था। केंद्र ने ऐसे मामलों की समीक्षा के लिए प्रतिनिधि समिति गठित की थी। इसमें उपभोक्ता मामलों के विभाग की सचिव और कैबिनेट सचिवालय के संयुक्त सचिव को सदस्य बनाया गया था। आवधिक समीक्षा का समय पहले जनवरी से मार्च, अप्रैल से जून, जुलाई से सितंबर और अक्तूबर से दिसंबर तक तय किया था है।  

कौन होगा समीक्षा कमेटी का हेड
ग्रुप 'ए' के पदों के लिए समीक्षा कमेटी का हेड संबंधित सीसीए का सचिव रहता है। सीबीडीटी, सीबीईसी, रेलवे बोर्ड, पोस्टल बोर्ड व टेलीकम्युनिकेशन आदि विभागों में बोर्ड का चेयरमैन कमेटी का हेड होता है। ग्रुप 'बी' के पदों के लिए समीक्षा कमेटी के हेड की जिम्मेदारी अतिरिक्त सचिव/संयुक्त सचिव को सौंपी गई है। अराजपत्रित अधिकारियों के लिए संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को कमेटी का हेड बनाया गया है। सभी सरकारी सेवाओं की प्रतिनिधि समिति में एक सचिव स्तर का अधिकारी रहता है। उसका नामांकन कैबिनेट सचिव द्वारा होना चाहिए। कैबिनेट सचिवालय में एक अतिरिक्त सचिव व संयुक्त सचिव के अलावा सीसीए द्वारा नामित एक सदस्य भी होता है। जिन कर्मियों को समय पूर्व रिटायरमेंट पर भेजा जाता है, वे आदेश जारी होने की तिथि से तीन सप्ताह के भीतर समिति के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं। संबंधित विभाग से इन अफसरों की जो रिपोर्ट तलब की जाती है, उसमें भ्रष्टाचार, अक्षमता व अनियमितता के आरोप देखे जाते हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो अफसरों को रिटायरमेंट दे दी जाती है। ऐसे अधिकारियों को नोटिस और तीन महीने का वेतन-भत्ता देकर घर भेजा जा सकता है।

रिव्यू कमेटी, इन तथ्यों पर कर सकती है रिटायर
जिन शासकीय सेवकों की सत्यनिष्ठा संदिग्ध होगी, उन्हें सेवानिवृत्त किया जाएगा। अप्रभावी पाए जाने वाले सरकारी सेवक भी सेवानिवृत्त होंगे। यहां इस बात को देखा जाएगा कि संबंधित कर्मचारी की उपयुक्तता और क्षमता, उस पद को वहन करने के योग्य है या नहीं। हालांकि किसी कर्मी को केवल अप्रभावी आधार पर रिटायर नहीं किया जाएगा। एक तय अवधि तक उसकी अक्षमता को देखा जाएगा। ऐसे मामले में जहां एक सरकारी कर्मचारी की क्षमता, दक्षता या प्रभावशीलता में अचानक भारी गिरावट आती है, तो उसे समय पूर्व सेवानिवृत्ति देने के लिए समीक्षा करने का विकल्प खुला रहेगा। यह भी कहा गया है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को सामान्य रूप से अक्षमता के आधार पर सेवानिवृत्त नहीं किया जाना चाहिए। पिछले 5 वर्ष के दौरान यदि उस कर्मी को पदोन्नत किया गया है और वहां उसकी सेवा संतोषजनक पाई गई है। ऐसे मामलों में संबंधित कर्मचारी को राहत मिल सकती है। उन सरकारी सेवकों के मामले में, जिन्हें पांच वर्ष के दौरान पदोन्नत किया गया है, उनकी एसीआर में पिछली प्रविष्टियों को ध्यान में रखा जा सकता है। बशर्ते उन्हें वरिष्ठता सह फिटनेस के आधार पर पदोन्नत किया गया हो, न कि योग्यता के आधार पर।

संपूर्ण सेवा अभिलेख पर विचार किया जाना चाहिए
समीक्षा के समय, सरकारी सेवक के संपूर्ण सेवा अभिलेख पर विचार किया जाना चाहिए। अभिव्यक्ति 'सेवा रिकॉर्ड', सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड को संदर्भित करता है, इसलिए, समीक्षा एसीआर/एपीएआर डोजियर के विचार तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। सरकारी कर्मचारी की निजी फाइल में बहुमूल्य सामग्री हो सकती है। इसी तरह, उनका काम और उसके द्वारा निपटाई गई फाइलों या उसके द्वारा तैयार व जमा किए गए किसी भी कागजात या रिपोर्ट को देखकर भी प्रदर्शन का आकलन किया जा सकता है। यह उसी स्थिति में उपयोगी होगा, अगर संबंधित मंत्रालय/विभाग/संवर्ग, सरकारी कर्मचारी के बारे में उपलब्ध सभी डाटा को एक साथ रखता हो। यह रिपोर्ट, समीक्षा समिति को मामले पर विचार करने के लिए एक व्यापक विवरण प्रस्तुत करती है। यहां तक कि संबंधित कर्मचारी की एसीआर/एपीएआर में असंप्रेषित टिप्पणियों पर भी विचार किया जा सकता है
 
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