सरकारी कर्मियों को संपत्ति ब्योरा बताना जरूरी नहीं
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केंद्र ने सरकारी कर्मियों के लिए संपत्ति ब्योरे का खुलासा करने की समय सीमा बेमियादी अवधि तक बढ़ा दी है। लोकपाल कानून के प्रावधान के तहत उनके लिए अब संपत्ति ब्योरा देना जरूरी नहीं रह गया है। इस संबंध में सरकार नियमों का एक नया प्रारूप तैयार करने जा रही है।
संपत्ति का ब्योरा देने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर थी। लेकिन कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के बयान में कहा गया है, ‘केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अब संपत्तियों की घोषणा करना जरूरी नहीं है।
सरकार नियमों का नया मसौदा पेश करने की तैयारी में है। नए नियमों के अनुसार सरकारी कर्मचारियों द्वारा संपत्ति की घोषणा नए फॉर्म में नए तौर-तरीकों और नियमों से की जाएगी।’ देश में लगभग 50.68 लाख केंद्रीय कर्मचारी हैं।
कई बार बढ़ाई गई समय सीमा
लोकपाल कानून के तहत अधिसूचित नियमों के मुताबिक, प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को 31 मार्च तक सालाना आधार पर या उस वर्ष 31 जुलाई की तारीख तक अपनी संपत्ति का ब्योरा दाखिल करना जरूरी था। वर्ष 2014 में यह ब्योरा दाखिल करने की तारीख 15 सितंबर थी।
पहली बार इसकी समय सीमा दिसंबर तक फिर 30 अप्रैल 2015 तक और तीसरी बार 15 अक्तूबर तक बढ़ाई गई। इसके बाद फिर इसकी समय सीमा 15 अप्रैल 2016 तक और फिर 31 जुलाई तक बढ़ा दी।
संसद में लोकपाल और लोकायुक्त कानून, 2013 में संशोधन के लिए विधयेक पारित होने के बाद आखिरी बार संपत्ति ब्योरा दाखिल करने की समय सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ा दी गई।