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बिजली की बढ़ी मांग पूरी करने को हरकत में केंद्र, आदेश जारी कर कहा इन कंपनियों को मिले प्राथमिकता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 26 May 2018 08:30 AM IST
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गर्मी के मौसम में बिजली की बढ़ती मांग की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। उसने कोल इंडिया और एससीसीएल को केंद्र और राज्य की बिजली कंपनियों को प्राथमिकता पर कोयला उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। साथ ही कोयला पहुंचाने के लिए यातायात सुनिश्चित करने को कहा है।
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कोयला मंत्रालय का मौजूदा आदेश इस माह की शुरुआत में जारी किए गए निर्देश का अनुसरण करता है। इसमें महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड जैसी कंपनियों को केवल बिजली संयंत्रों के लिए कोयले की रैक मुहैया कराने को कहा गया था। जबकि अन्य निजी उद्योगों की आपूर्ति रोकने को कहा गया था। कोल इंडिया को 24 मई को भेजे गए पत्र में मंत्रालय ने कहा कि ग्रीष्मकाल के दौरान मांग में बढ़ोतरी के कारण कोयले की मांग बढ़ सकती है, जिसके लिए बिजली कंपनियों को प्राथमिकता पर आपूर्ति कराई जाए।
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बिजली कंपनियों में कोयले की कमी
आदेश में कहा गया है कि थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की कमी नहीं हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किया जाए। इसके लिए विभिन्न आधार आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए तय किए गए हैं। कोयला आपूर्ति के लिए समुचित यातायात व्यवस्था और स्थान, केंद्रीय और राज्य की बिजली कंपनियों को प्राथमिकता पर कोयले का आवंटन किया जाए। ताकि बिजली उत्पादन को बढ़ाने के लिए कोयले की जरूरत को पूरा किया जा सके। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, देश की बिजली कंपनियों में कोयले की कमी हो रही है, क्योंकि भयंकर गर्मी होने से बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
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बिजली की मांग 8 फीसदी बढ़ी
बिजली संयंत्रों में मौजूदा समय में 12 दिन का कोयला है और बुधवार को बिजली की मांग 1,70,121 मेगावाट रही थी। अप्रैल में बिजली का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था, लेकिन लगातार मांग बढ़ने के चलते बिजली कंपनियों को कोयले की कमी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, गर्मी के मौसम में बिजली की मांग पिछले साल के मुकाबले 8 प्रतिशत बढ़ गई है और भारतीय ऊर्जा एक्सचेंज पर बिजली की औसत दर प्रति किलोवाट 5.69 रुपये है।
उत्तर भारत में सर्वाधिक बिजली की मांग उत्तर प्रदेश में 19,082 मेगावाट, दिल्ली में 6,029 मेगावाट और राजस्थान में 10,395 मेगावाट है। जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तराखंड में बिजली की कमी नहीं है, जबकि देश के अन्य सभी राज्यों में गर्मी का मौसम आते ही मांग बढ़ी है और बिजली की कमी हो रही है। गौरतलब है कि उत्तर भारत में 56,752 मेगावाट, दक्षिण में 42,543 मेगावाट, पूर्व में 21,144 मेगावाट, पश्चिम में 24,148 और पूर्वोत्तर में 2,481 मेगावाट की मांग है।