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गर्भ के 24 सप्ताह बाद गर्भपात को मिलेगी कानूनी मंजूरी
पवन कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 16 Aug 2016 10:11 PM IST
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अभी कानूनी तौर पर 20 सप्ताह के गर्भ को कराया जा सकता है गर्भपात
- फोटो : getty
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गर्भ धारण करने के 24 सप्ताह बाद भी महिला कानूनी तौर पर गर्भपात करा सकती हैं, इसके लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय कानून में बदलाव की तैयारी कर रहा है। दुष्कर्म की वजह से गर्भवती होने पर गर्भपात की कोई सीमा तय नहीं करने पर बात चल रही है। पिछले दिनों ऐसे ही एक मामले में उच्चतम न्यायालय ने गर्भ के 24 सप्ताह हो जाने के बाद भी गर्भपात कराने की इजाजत दी थी।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गर्भपात कराने की कानूनी समय सीमा 20 सप्ताह से बढ़ा कर 24 सप्ताह करने की तैयारी की जा रही है। यही नहीं दुष्कर्म के मामले में गर्भवती होने पर गर्भपात के लिए कोई समय तय नहीं करने का निर्णय लिया गया है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह पर अदालत को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार रहेगा।
अधिकारी ने बताया कि कई मामलों में अदालत ने 20 सप्ताह के गर्भ के बाद भी गर्भपात कराने का आदेश दिया है। जिसके बाद से इस कानून में बदलाव की बात पर बहस हो रही है। लिहाजा चिकित्सकों और विशेषज्ञों से बातचीत के बाद कानून में बदलाव की तैयारी चल रही है।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्त्री और प्रसूति रोग विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नीरजा भाटला ने बताया कि यदि सरकार गर्भपात की अधिकतम समय सीमा 20 सप्ताह से 24 सप्ताह करती है तो यह अच्छा कदम होगा। उन्होंने कहा कई बार गर्भ में पल रहे भ्रूण में 20 सप्ताह तक गंभीर बीमारियों का पता नहीं चल पाता लेकिन 24 सप्ताह के भ्रूण में हृदय के अलावा मस्तिष्क संबंधी बीमारियों का भी पता लग जाता है। लिहाजा 24 सप्ताह में यदि गर्भपात को कानूनी मान्यता मिल जाए तो ऐसे खराब भ्रूण को विकसीत होने से पहले गर्भपात करके खत्म किया जा सकेगा।
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मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गर्भपात कराने की कानूनी समय सीमा 20 सप्ताह से बढ़ा कर 24 सप्ताह करने की तैयारी की जा रही है। यही नहीं दुष्कर्म के मामले में गर्भवती होने पर गर्भपात के लिए कोई समय तय नहीं करने का निर्णय लिया गया है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह पर अदालत को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार रहेगा।
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अधिकारी ने बताया कि कई मामलों में अदालत ने 20 सप्ताह के गर्भ के बाद भी गर्भपात कराने का आदेश दिया है। जिसके बाद से इस कानून में बदलाव की बात पर बहस हो रही है। लिहाजा चिकित्सकों और विशेषज्ञों से बातचीत के बाद कानून में बदलाव की तैयारी चल रही है।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्त्री और प्रसूति रोग विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नीरजा भाटला ने बताया कि यदि सरकार गर्भपात की अधिकतम समय सीमा 20 सप्ताह से 24 सप्ताह करती है तो यह अच्छा कदम होगा। उन्होंने कहा कई बार गर्भ में पल रहे भ्रूण में 20 सप्ताह तक गंभीर बीमारियों का पता नहीं चल पाता लेकिन 24 सप्ताह के भ्रूण में हृदय के अलावा मस्तिष्क संबंधी बीमारियों का भी पता लग जाता है। लिहाजा 24 सप्ताह में यदि गर्भपात को कानूनी मान्यता मिल जाए तो ऐसे खराब भ्रूण को विकसीत होने से पहले गर्भपात करके खत्म किया जा सकेगा।