Immigration: प्रवासन को लेकर नया कानून लाने की तैयारी में सरकार, संसदीय समिति की रिपोर्ट से खुलासा
यह विधेयक विदेश में रोजगार के लिए सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन को बढ़ावा देगा। इस नए विधेयक के जरिए 1983 के प्रवासन अधिनियम को बदला जाएगा। बता दें कि यह बात कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय समिति की रिपोर्ट से सामने आई है।
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अमेरिका से 104 अवैध अप्रवासी भारतीयों को वापस भेजने को लेकर इस समय विपक्ष सरकार के खिलाफ हमलावर है। इस बीच, सरकार ने बताया है कि वह सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवासन के लिए नए कानून पर काम कर रही है। प्रवासन पर प्रस्तावित कानून विदेशी गतिशीलता सुविधा और कल्याण विधेयक, 2024 के बारे में सरकार ने यह जानकारी दी है।
यह विधेयक विदेश में रोजगार के लिए सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन को बढ़ावा देगा। इस नए विधेयक के जरिए 1983 के प्रवासन अधिनियम को बदला जाएगा। बता दें कि यह बात कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय समिति की रिपोर्ट से सामने आई है। इस रिपोर्ट को सोमवार को संसद में पेश किया गया।
अपनी रिपोर्ट में संसदीय पैनल ने यह भी कहा कि इस विधेयक में उन राज्यों में PoE (प्रवासियों के संरक्षक) कार्यालयों की स्थापना करने का भी प्रावधान किया गया है, जहां ऐसे कार्यालय वर्तमान में मौजूद नहीं हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अब तक मुंबई, चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता, चंडीगढ़, हैदराबाद, कोचीन, तिरुवनंतपुरम, जयपुर, रायबरेली, पटना, बेंगलुरु, गुवाहाटी और रांची में स्थित प्रोटेक्टर ऑफ इमिग्रेंट्स (पीओई) के 14 कार्यालय हैं। पीओई की पहुंच का विस्तार करने के लिए, मंत्रालय ने पटना, बेंगलुरु और गुवाहाटी में अतिरिक्त पीओई कार्यालय स्थापित किए हैं, जो पूरी तरह कार्यात्मक हैं।रिपोर्ट में कहा गया है कि त्रिपुरा, भुवनेश्वर और अहमदाबाद में अतिरिक्त कार्यालयों की योजना बनाई जा रही है।
इसके अलावा, समिति ने आग्रह किया है कि भारत से प्रस्थान करने वाले सभी नागरिकों को आव्रजन काउंटरों पर बुनियादी जानकारी दी जानी चाहिए।
समिति ने कहा है कि वह चाहती है कि विधेयक की मुख्य विशेषताओं पर परामर्श किया जाए। साथ ही बदली हुई वैश्विक प्रवासन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक संशोधित अधिनियम समयबद्ध तरीके से लाया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि इस संबंध में हुई प्रगति के बारे में अपडेट तीन महीने के भीतर समिति को प्रस्तुत किया जा सकता है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि आंतरिक परामर्श के बाद मसौदे को 15/30 दिनों के लिए सार्वजनिक परामर्श के लिए रखा जाएगा, उसके बाद संशोधित मसौदे पर कैबिनेट नोट के मसौदे के साथ अंतर-मंत्रालयी परामर्श किया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी बताया है कि प्रोटेक्टर जनरल ऑफ इमिग्रेंट्स (पीजीई) पूरे भारत में सभी प्रोटेक्टर ऑफ इमिग्रेंट्स (पीओई) कार्यालयों के कामकाज की देखरेख करता है।
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