इच्छामृत्यु पर सरकार ने पेश किया विधेयक, आपसे भी मांगी राय
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बीते कई वर्षों से चर्चा और कानूनी बहसों का विषय बन रहे निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने बीते सोमवार को विधेयक का प्रस्ताव रखा है। बता दें कि इसके तहत इच्छामृत्यु में मरीजों को जीवित रखने वाली जीवन रक्षक प्रणाली अथवा उससे जुड़ी चिकित्सा को बंद कर दिया जाता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इससे जुड़ा एक विधेयक अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है और लोगों से 19 जून तक इस पर राय मांगी है। इस विधेयक के अंतर्गत सक्रिय इच्छामृत्यु पर अब भी रोक जारी है जिसके अंतर्गत मरीजों की मर्जी से उनके लिए जहर का इंतजाम किया जाता है।
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 2011 में निष्क्रिय इच्छामृत्यु के पक्ष में सुरक्षा प्रावधान और कुछ दिशानिर्देशों के तहत फैसला सुनाय था। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद ही इस पर कानून बनाए जाने की कवायद शुरु कर दी गई थी। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले के अनुसार कानून बनने तक यह वैध रहेगा। 2011 में केंद्र सरकार ने न्यायालय से कहा था कि जब तक इस संबंध में कोई कानून नहीं बन जाता तब तक सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश ही माना जाएगा।
Terminally Ill Patients(Protection of Patients and Medical Practitioners ) Bill नाम से पेश किया गए विधेयक में इस बात की सिफारिश की गई है कि निष्क्रिय इच्छामृत्यु की इजाजत उन 'सक्षम मरीजों' के लिए होनी चाहिए जो बिना किसी नियंत्रक असुविधा के स्वयं फैसला लेने में सक्षम हों। वैसे जो मरीज अक्षम हैं और स्वयं से इस संबंध में फैसला नहीं ले सकते, वो अपने डॉक्टर,रिश्तेदार अथवा दोस्तों की मदद से सर्वोच्च न्यायालय में मामला दर्ज करा सकते हैं। इसके अतंर्गत सर्वोच्च न्यायालय एक माह में फैसला सुना सकता है।
हालांकि मरीज को इस तरह की कोई आज्ञा देने से पहले न्यायालय को तीन डॉक्टरों से राय लेनी होगी। न्यायालय से इस बात की उम्मीद भी कि जाएगी कि वो मरीज के रिश्तेदारों जैसे जीवनसाथी अथवा अभिभावक की इच्छाओं को भी ध्यान में रख कर फैसला सुनाए। जिन तीन डॉक्टरों से न्यायालय राय लेगा उनका चयन सर्वोच्च न्यायालय डॉक्टरों के पैनल से करेगा। डॉक्टरों के पैनल के गठन में केंद्र सरकार के साथ-साथ मरीज से संबंधित राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। अगर आप इस पर अपनी कोई राय देना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक कर के बिल को पढ़ें और फिर सरकार को अपनी राय से अवगत कराएं।
Brief on Euthanasia
Circular Euthanasia
Explanatory Note
Terminally Ill Patients(Protection of Patients and Medical Practitioners ) Bill
इस मुद्दे पर आप अपनी राय passiveeuthanasia@gmail.com पर भेज सकते हैं।