तीन तलाक के मामले पर कोई फैसला नहीं कर पाई सरकार
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तीन तलाक के मामले पर केंद्र सरकार कोई फैसला नहीं ले पाई है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक मामले में केंद्र की राय मांग कर मोदी सरकार की उलझनें बढ़ा दी है। इस मसले पर बुधवार को मंत्रियों की मैराथन बैठक के बाद भी मामले पर सरकार का रुख तय नहीं हो सका।
तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सरकार का रुख तय करने के लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों की अहम बैठक हुई। सूत्र बताते हैं कि बैठक के बावजूद भी तीन तलाक के मामले पर सरकार अपना मत स्पष्ट नहीं कर पाई है। जल्द ही मामले को लेकर अलग से बैठक होगी।
दरअसल तीन तलाक के मामले पर केंद्र सरकार को शपथ पत्र के जरिए अपना पक्ष सर्वोच्च न्यायालय में रखना है। न्यायालय ने सरकार को पक्ष रखने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया है।
उदार कानून बनाने का है दबाव
उधर सरकार की मुश्किल है कि एक तरफ मुस्लिम संगठनों ने शरीयत कानून के तहत तीन तलाक की व्यवस्था का समर्थन किया है। तो महिलाओं के हित को सुरक्षित करने की मांग को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने सरकार से मुस्लिम महिलाओं के लिए उदार कानून की मांग की है।
संघ समेत भगवा परिवार के तमाम संगठनों का भी इस मामले में सरकार पर दबाव है कि वह तीन तलाक सरीखे कठोर नियम के बदले उदार कानून बनवाए। शायद यही वजह है कि सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने तीन तलाक के मामले के साथ समान नागरिक संहिता पर भी चर्चा की।
समान नागरिक संहिता पर सरकार पहले ही विधि आयोग से रिपोर्ट मांग चुकी है। बुधवार को गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली, मेनका गांधी और मनोहर परिकर भी मौजूद थे।