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बिलकिस बानो केस: दोषियों की रिहाई पर पति ने जताई हैरानी, कहा- मीडिया के जरिए ही पता चला

Tue, 16 Aug 2022 05:23 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: Amit Mandal Updated Tue, 16 Aug 2022 05:23 PM IST
सार

गोधरा में साबरमती ट्रेन की घटना के बाद भड़की हिंसा से भागते समय बिलकिस बानो 21 साल की थी और पांच महीने की गर्भवती थी। इस मामले में 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली थी। 

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Got to know of convicts' release through media, says Bilkis Bano's husband; convict talks of starting a new li
गुजरात पुलिस - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के सामूहिक दुष्कर्म और उसके परिवार के सात लोगों की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा भुगत रहे 11 दोषियों की रिहाई के एक दिन बाद उनके पति ने कहा कि उन्हें मीडिया से इनकी रिहाई के बारे में पता चला। गोधरा जेल से सोमवार को रिहा होने के बाद गर्भवती बिलकिस की तीन साल की बेटी की हत्या के आरोपित दोषियों का जेल के बाहर मिठाई और माला पहनाकर स्वागत किया गया। बिलकिस बानो के पति याकूब रसूल ने बताया कि हमें यह जानकर हैरत हुई कि दोषियों को रिहा कर दिया गया है।

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गोधरा में साबरमती ट्रेन की घटना के बाद हुई थी हिंसा 
गोधरा में साबरमती ट्रेन की घटना के बाद भड़की हिंसा से भागते समय बिलकिस बानो 21 साल की थी और पांच महीने की गर्भवती थी। रसूल ने कहा कि हमें नहीं पता कि दोषियों ने अपना आवेदन कब आगे बढ़ाया और राज्य सरकार ने किस पर विचार किया। हमें कभी किसी तरह का नोटिस नहीं मिला। रसूल ने कहा कि गुजरात सरकार ने निर्देश के अनुसार परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। लेकिन अभी तक नौकरी या घर नहीं दिया गया है जैसा कि शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था। रसूल ने कहा कि वह अपनी पत्नी और पांच बेटों के साथ छिपकर रहता है, सबसे बड़ा बेटा 20 साल का है।
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2008 में मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने बिलकिस बानो के परिवार के सात सदस्यों के सामूहिक बलात्कार और हत्या के आरोप में 11 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखा। जिन 11 दोषियों को समय से पहले रिहा किया गया उनमें जसवंतभाई नई, गोविंदभाई नई, शैलेश भट्ट, राधेश्याम शाह, बिपिन चंद्र जोशी, केसरभाई वोहानिया, प्रदीप मोर्धिया, बकाभाई वोहानिया, राजूभाई सोनी, मितेश भट्ट और रमेश चंदना शामिल हैं।
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राधेश्याम शाह की याचिका से रिहाई का रास्ता खुला 
राधेश्याम शाह जिनकी समय से पहले रिहाई की याचिका ने सभी 11 उम्रकैद के दोषियों को जेल से बाहर निकलने का मार्ग प्रशस्त किया, उन्होंने कहा कि वह रिहा होने से खुश है। उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार ने हमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार रिहा कर दिया है। मुझे बाहर होने में खुशी हो रही है क्योंकि मैं अपने परिवार के सदस्यों से मिल सकूंगा और एक नया जीवन शुरू कर सकूंगा। हमें दोषी ठहराया गया था और जेल में बंद कर दिया गया था। 

शाह ने कहा, जब मुझे 14 साल की जेल पूरी करने के बाद रिहा नहीं किया गया, तो मैंने छूट के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार को फैसला लेने का निर्देश दिया, जिसके बाद हमें रिहा कर दिया गया। दोषियों को गुजरात सरकार की छूट नीति के तहत सोमवार को 15 साल से अधिक की जेल के बाद रिहा कर दिया गया। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उनकी रिहाई पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खिंचाई की।


वहीं, जेल से रिहा होने के एक दिन बाद एक दोषी शैलेश भट्ट ने दावा किया कि वे राजनीति के शिकार हुए हैं। 63 वर्षीय भट्ट ने कहा कि वह सत्तारूढ़ भाजपा के एक स्थानीय पदाधिकारी थे, जब उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उनके भाई और सह-दोषी मितेश सहित अन्य लोग गोधरा जेल से बाहर निकलने के बाद गुजरात के दाहोद जिले के सिंगोर गांव के लिए रवाना हो गए। इन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी और अब गुजरात सरकार की छूट नीति के तहत सोमवार को 15 साल से अधिक की जेल की सजा पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया।
 

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