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केंद्र सरकार के लाखों कर्मियों को बड़ी राहत, मुश्किल की घड़ी में फैमिली पेंशन के लिए नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर  

Sun, 16 Aug 2020 05:25 PM IST
मुकेश कुमार झा डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Sun, 16 Aug 2020 05:25 PM IST
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Good News for central government employees related Family Pension 
- - फोटो : social media

केंद्र सरकार ने अपने लाखों कर्मियों को मुश्किल घड़ी के लिए एक बड़ी राहत दी है। अगर किसी कर्मी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उसके परिजनों को प्रोविजनल पेंशन के लिए कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। एक मेज से दूसरी मेज तक कछुआ गति से आने वाली फाइलों का इंतजार नहीं होगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने सीसीएस (पेंशन) नियम 1972 के रूल 80ए के तहत लागू कई प्रावधानों में ढील दी हैं। 

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फार्म 14 के साथ यदि संबंधित कर्मी का मृत्यु प्रमाण पत्र और बैंक डिटेल दी जाती है व इससे मुख्यालय संतुष्ट है तो उसी वक्त फेमिली पेंशन जारी कर दी जाएगी। मृत्यु ग्रेच्युटी जारी होने के नियमों में बदलाव नहीं किया गया है। यदि किसी कर्मी की प्रोविजनल पेंशन ज्यादा चली गई है तो बाद में उसे मृत्यु ग्रेच्युटी की राशि में से काट लिया जाएगा। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए यह नियम बनाया गया है कि सेवाकाल के दौरान उनकी मृत्यु होने पर तुरंत प्रोविजनल पेंशन प्रदान की जाएगी। इसके लिए फाइनल ऑपरेशनल केजुअल्टी रिपोर्ट आने का इंतजार नहीं होगा।
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बता दें कि यदि सेवा में रहते हुए किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार को पारिवारिक पेंशन और मृत्यु ग्रेच्युटी मिलती है। इसके लिए एक सरकारी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।कई बार इसमें लंबा वक्त गुजर जाता है। इससे मृतक कर्मी के परिजनों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। कार्यालय का एचओडी प्रोविजनल पेंशन को मंजूरी देता है। नियम 80 के तहत एचओडी, पे एंड अकाएंट कार्यालय के पास वह केस भेजता है। इसके लिए कई तरह के दस्तावेज मांगे जाते हैं। अगर दस्तावेज भी समय पर मिल जाएं तो फाइल को आगे सरकने में ही लंबा वक्त लग जाता है।
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ऐसे केसों की संख्या भी ज्यादा होती है, इससे मामला निपटने में बहुत अधिक देरी होती है। संबंधित कर्मी के परिजनों को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। केंद्र सरकार ने अब इन सभी बातों के मद्देनजर यह निर्णय लिया है कि रूल 54 (2) (ii) सीसीएस (पेंशन) रूल के अंतर्गत पेंशन उस व्यक्ति को भी मिलेगी, जिसने अपनी सेवा का एक साल भी पूरा नहीं किया था।

इसके पक्ष में यह तर्क दिया गया है कि जिस वक्त संबंधित कर्मी का मेडिकल हुआ था, उस दौरान वह बिल्कुल ठीक था। किसी कर्मी का सेवाकाल कितना भी रहा हो, मुश्किल घड़ी में उसकी पेंशन पर इसका असर नहीं पड़ेगा। पेंशन जारी होने के लिए सर्विस जांच कोई मायने नहीं रखती। ग्रेच्युटी मामले में सेवाकाल देखा जाता है। यदि किसी कर्मी का विभाग की ओर कोई बकाया है तो वह राशि मृत्यु ग्रेच्युटी में से काट ली जाएगी।

इन सभी कार्यों में परिजनों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए अब 80ए ऑफ सीसीएस (पेंशन) नियम 1972 में ढील दी गई है। अभी प्रोविजनल पेंशन जारी कराने के लिए एफ14, एफ 18 व दूसरे दस्तावेज पे एंड अकाउंट्स कार्यालय को भेजने पड़ते हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए यह नियम बनाया गया है कि सेवाकाल के दौरान उनकी मृत्यु होने पर तुरंत प्रोविजनल पेंशन प्रदान की जाएगी।


इसके लिए फाइनल ऑपरेशनल केजुअल्टी रिपोर्ट आने का इंतजार नहीं होगा। एचओडी के आग्रह पर पे एंड अकाउंट्स शाखा प्रोविजनल पेंशन जारी करेगी। सर्विस बुक व अन्य दस्तावेज न मिलने के आधार पर पेंशन नहीं रोकी जाएगी। स्वीकृत पारिवारिक पेंशन का भुगतान शुरू में कर्मचारी की मृत्यु की तारीख से छह महीने बाद तक जारी रहेगा। वेतन और लेखा कार्यालय की सलाह पर व विभाग प्रमुख (एचओडी) की मंजूरी के साथ, इस तरह के अंतरिम पारिवारिक पेंशन की अवधि को एक समय में छह महीने से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है।

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