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खुशखबर: इलाहाबाद का नाम बदलने पर होगी ये सुविधा, जानिए इससे जुड़ी पूरी जानकारी
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 17 Oct 2018 05:09 PM IST
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आखिर 10 सालों के इंतजार के बाद 1.6 किलोमीटर के दायरे में निर्मित रानी झांसी फ्लाइओवर (ग्रेड सेपरेटर) दिल्लीवासियों को समर्पित कर दिया गया है। उप राज्यपाल अनिल बैजल ने कहा है कि 1.6 किलोमीटर के फ्लाइओवर की शुरुआत से रोजाना पांच लाख लोगों को राहत मिलेगी।
बता दें कि 2008 में परियोजना की आधारशिला रखी गई थी, जो अब पूरी हुई है। वहीं केन्द्रीय मंत्री विजय गोयल ने कहा कि इसकी शुरुआत से दिल्ली की बड़ी आबादी को आने-जाने में सुविधा होगी।
जिस रास्ते को तय करने में एक घंटा लगता था अब उसे पांच मिनट से भी कम वक्त में तय किया जा सकेगा।
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बता दें कि 2008 में परियोजना की आधारशिला रखी गई थी, जो अब पूरी हुई है। वहीं केन्द्रीय मंत्री विजय गोयल ने कहा कि इसकी शुरुआत से दिल्ली की बड़ी आबादी को आने-जाने में सुविधा होगी।
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जिस रास्ते को तय करने में एक घंटा लगता था अब उसे पांच मिनट से भी कम वक्त में तय किया जा सकेगा।
Allahabad Name Change
इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने के फैसले से लोगों के मन में कई प्रकार कि आशंकाएं हैं। खासतौर पर, खुद के परिचय या पते के प्रमाणपत्र के रूप में इस्तेमाल होने वाले आधार कार्ड, पैन कार्ड जैसे दस्तावेजों को लेकर दुविधा की स्थिति बन गई है।
राहत की खबर ये है कि इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने से आम लोगों के दस्तावेजों पर कोई असर नहीं होने जा रहा है। मंडलायुक्त डॉ. आशीष कुमार गोयल का स्पष्ट तौर पर कहना है कि लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक एकाउंट समेत अन्य किसी भी दस्तावेजों में नाम परिवर्तित कराने की जरूरत नहीं है। किसी तरह के हलफनामे की भी जरूरत नहीं होगी। सभी तरह के दस्तावेज वैसे ही मान्य होंगे। केवल नए सिरे से जारी परिचय पत्रों या अन्य दस्तावेजों में जरूर इलाहाबाद के स्थान पर प्रयागराज दर्ज हो जाएगा।
राहत की खबर ये है कि इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने से आम लोगों के दस्तावेजों पर कोई असर नहीं होने जा रहा है। मंडलायुक्त डॉ. आशीष कुमार गोयल का स्पष्ट तौर पर कहना है कि लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक एकाउंट समेत अन्य किसी भी दस्तावेजों में नाम परिवर्तित कराने की जरूरत नहीं है। किसी तरह के हलफनामे की भी जरूरत नहीं होगी। सभी तरह के दस्तावेज वैसे ही मान्य होंगे। केवल नए सिरे से जारी परिचय पत्रों या अन्य दस्तावेजों में जरूर इलाहाबाद के स्थान पर प्रयागराज दर्ज हो जाएगा।
Open defecation free
स्वच्छता के मोर्चे पर सरकार के लिए अच्छी खबर है। देश में शौचालय का इस्तेमाल न करने वाले लोगों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। खास बात यह है कि शहरों में अब मात्र चार प्रतिशत ऐसे लोग हैं जो शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
हालांकि गांवों में अब भी ऐसे लोगों का अनुपात एक-तिहाई के आस-पास है। नेशनल सेंपल सर्वे के मुताबिक मई-जून 2015 में देश के गांवों में 52 प्रतिशत लोग ऐसे थे जो शौचालय का इस्तेमाल नहीं करते थे, जुलाई-दिसंबर 2017 में इनका अनुपात घटकर मात्र 33 प्रतिशत रह गया है।
साथ ही शहरों में शौचालय इस्तेमाल न करने वाले लोगों का अनुपात भी 8 प्रतिशत से घटकर मात्र 4 प्रतिशत रह गया है। एनएसएसओ ने जुलाई-दिसंबर 2017 के दौरान देश के 4043 गांवों और 3091 शहरी क्षेत्रों के 71,205 परिवारों का सर्वे कर यह निष्कर्ष निकाला है।
हालांकि गांवों में अब भी ऐसे लोगों का अनुपात एक-तिहाई के आस-पास है। नेशनल सेंपल सर्वे के मुताबिक मई-जून 2015 में देश के गांवों में 52 प्रतिशत लोग ऐसे थे जो शौचालय का इस्तेमाल नहीं करते थे, जुलाई-दिसंबर 2017 में इनका अनुपात घटकर मात्र 33 प्रतिशत रह गया है।
साथ ही शहरों में शौचालय इस्तेमाल न करने वाले लोगों का अनुपात भी 8 प्रतिशत से घटकर मात्र 4 प्रतिशत रह गया है। एनएसएसओ ने जुलाई-दिसंबर 2017 के दौरान देश के 4043 गांवों और 3091 शहरी क्षेत्रों के 71,205 परिवारों का सर्वे कर यह निष्कर्ष निकाला है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- फोटो : Getty
इलाहाबाद विश्वविद्यालय सोमवार को सौर ऊर्जा से संचालित होने वाला देश का पहला विश्वविद्यालय बन गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.रतन लाल हांगलूं ने लॉ फैकल्टी की छत पर इस परियोजना का उद्घाटन किया।
विश्वविद्यालय ने आज वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में देशभर में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। बिजली की खपत को कम करने के लिए और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सौर उर्जा प्लेट को स्थापित करने की यह परियोजना सोलर एनर्जी कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) भारत सरकार के निर्देशानुसार जून 2018 से विश्वविद्यालय में आरंभ हुई थी।
मात्र पाँच महीने में ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने यह कार्य पूरा कर लिया।अब विश्वविद्यालय के हर विभाग की छत पर तथा महिला छात्रावास की छत पर पूरी तरह सौर प्लेट लग चुके हैं।
इस सौर परियोजना से इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रतिदिन 6000 यूनिट बिजली उत्पन्न होगी और विश्वविद्यालय को इससे हर माह लगभग बीस लाख रूपये का लाभ होगा। विश्वविद्यालय में बनी हुई बिजली का लाभ शहरवासियों को भी मिलेगा।
विश्वविद्यालय ने आज वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में देशभर में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। बिजली की खपत को कम करने के लिए और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सौर उर्जा प्लेट को स्थापित करने की यह परियोजना सोलर एनर्जी कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) भारत सरकार के निर्देशानुसार जून 2018 से विश्वविद्यालय में आरंभ हुई थी।
मात्र पाँच महीने में ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने यह कार्य पूरा कर लिया।अब विश्वविद्यालय के हर विभाग की छत पर तथा महिला छात्रावास की छत पर पूरी तरह सौर प्लेट लग चुके हैं।
इस सौर परियोजना से इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रतिदिन 6000 यूनिट बिजली उत्पन्न होगी और विश्वविद्यालय को इससे हर माह लगभग बीस लाख रूपये का लाभ होगा। विश्वविद्यालय में बनी हुई बिजली का लाभ शहरवासियों को भी मिलेगा।