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राजनीति ही नहीं राष्ट्रवादी साहित्य का भी चल रहा है स्वर्ण यु्ग

Fri, 02 Jun 2017 10:07 PM IST
संजय मिश्र
संजय मिश्र Updated Fri, 02 Jun 2017 10:07 PM IST
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GOLDEN ERA OF NATIONALISM literature and politics

देश की राजनीति ही नहीं मोदी राज में राष्ट्रवादी साहित्य का भी स्वर्ण युग चल रहा है। देश में जहां एक ओर राष्ट्रवादी साहित्य की ब्रिकी में भारी उछाल है। तो विदेशों से भी भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद से जुडे साहित्यों की मांग बढी है। सबसे बडी बात यह है कि राष्ट्रवादी साहित्य की मांग केवल संघ और उसके संस्थानों की जानकारी तक ही सीमित नहीं हैं। बल्कि देश की अन्य संस्कृति और देशभक्ति से जुडी साहित्यों की भी मांग बढी है। 

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ऑन लाईन के जरिए भारतीय साहित्य की मांग विदेशों में भी 
सुरूचि प्रकाशन के मुखिया राकेश अग्रवाल ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि बीते चार वर्षों में राष्ट्रीय साहित्य और सांस्कृतिक विरासत से जुडी साहित्य की बिक्री में ढाई से तीन गुना ज्यादा का उछाल है। इसकी स्वीकार्यता बढी है। अमेजन और फ्लीपकार्ट सरीखे ऑनलाईन व्यापार के माध्यमों से विदेशों में बैठे लोग भी भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय साहित्य से जुडी पुस्तकें मंगवा रहे हैं। अग्रवाल का कहना है कि 22 से 24 देशों में वे लोगों को भारतीय राष्ट्रयिता और संस्कृति से जुडी किताबे पहुंचा रहे हैं। उनका कहना है कि ये खुला नजर आ रहा है कि लोगों में राष्ट्र के प्रति प्रेम बढ रहा है। 

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राष्ट्रीय विचारों के किताबों की छपाई बढी

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ - फोटो : getty

प्रभात प्रकाशन के प्रमुख प्रभात अग्रवाल का कहना है कि बीते 4—5 वर्षों में राष्ट्रीय विचार के किताबों की छपाई और बिक्री दोनों बढी हैं। उनका कहना है कि वे हर तरह के किताबों का प्रकाशन करते हैं। मगर हाल के वर्षों में राष्ट्रीय विचार के किताब और चेहरों से जुडी किताबों की छपाई की संख्या में बढोत्तरी देखी जा रही है। 

संघ मुखपत्र पांचजन्य और आर्गनाइजर के बिक्री में भी भारी उछाल 
आंकडों पर गौर करें तो पीएम मोदी के राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने के साथ ही संघ के मुखपत्र पांचजन्य और आर्गनाइजर की बिक्री में भी भारी उछाल आया है। हालांकि बढती शाखाओं की तरह साहित्य की बिक्री को भी संघ स्वयं सेवकों की कोशिश का परिणाम बता रहा है। मगर आकंडे बता रहे हैं कि देश की राजनीति में मोदी की बढती साख के साथ राष्ट्रीय साहित्य की बिक्री में उछाल आया है। वर्ष 2013 में पांचजन्य की बिक्री 60 हजार थी तो आर्गनाइजर की बिक्री महज 14 हजार थी।

आज के दिन पांचजन्य की बिक्री नया रिकार्ड बनाते हुए 1 लाख के पार कर गई है। आर्गनाइजर भी अपने सर्कुलेसन का नया कीर्तिमान बनाते हुए 25 हजार के पार पहुंच गया है। अकेले दिल्ली में ही पांचजन्य और आर्गनाइजर दोनों की संयुक्त ​बिक्री 20हजार के उपर पहुंच गई है। पांचजन्य और आर्गनाइजर की देश में वर्षवार बिक्री के आंकडों पर नजर डालें तो भारी उछाल है। वर्ष 2014 में पांचजन्य 66 हजार और आर्गनाइजर 18 हजार, वर्ष 2015 में पांचजन्य 73 हजार और आर्गनाइजर 20 हजार और वर्ष 2016 में पांचजन्य 86 हजार और आर्गनाइजर की 22 हजार प्रति बेची जाती थी। 

आम जन की रूचि बढाने के लिए संघ का विशेष अभियान 

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संघ दिल्ली प्रांत के प्रचार प्रमुख राजीव तूली के अनुसार पांचजन्य और आर्गनाइजर की ओर से विशेष सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 12 जून तक जारी रहेगा। अभियान के तहत संघ के स्वयंसेवक पांचजन्य और आर्गनाइजर की सदस्यता दिलवाने के लिए लोगों के बीच घर—घर जाएंगे। इस कार्य के लिए संघ ने दिल्ली में 180 बस्तियों की पहचान की है। इन बस्तियों में संघ के स्वयंसेवक घर—घर जाकर लोगों से पांचजन्य और आर्गनाइजर की सदस्यता लेने का आह्वान करेंगे। ताकि संघ के मुखपत्र की पहुंच आम जन तक सुनिश्चित की जा सके। 

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