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सोने-चांदी की कीमतों में रिकॉर्डतोड़ उछाल क्यों?: सालभर की बढ़त के बाद भी शिखर पर भाव, जानिए अब आगे क्या होगा

Tue, 13 Jan 2026 06:36 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 13 Jan 2026 06:36 PM IST
सार

सोना-चांदी की कीमतें बीते 12 महीने में किस तरह से बढ़ी हैं? सोना-चांदी की कीमतों में हालिया तेजी की वजह क्या है? दुनिया में किस देश के पास कितना सोना है? इसके अलावा आने वाले दिनों में सोना-चांदी की कीमतों को लेकर क्या अनुमान जताया गया है? आइये जानते हैं...

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Gold Silver Price Rise 2025 and 2026 know reason of increase of Valuable Metals Conflicts Venezuela to Greenla
सोना-चांदी की कीमतों में तीव्र उछाल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोना और चांदी के दामों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अगर इसी हफ्ते के आंकड़ों की बात कर लें तो सामने आता है कि भारतीय सर्राफा बाजार में वैश्विक अनिश्चितताओं और राजनीतिक तनावों के बीच सोने और चांदी की कीमतों ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। सोमवार को ही चांदी की कीमतों में 15 हजार रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज हुई। इस बढ़त का असर यह हुआ कि चांदी एक दिन में छह फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2,65,000 रुपये प्रति किग्रा के नए शिखर पर पहुंच गई। दूसरी ओर सोने की चमक भी और तीखी हो गई है। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 2,900 रुपये (2.05%) की तेजी के साथ 1,44,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। आइये इस बारे में विस्तार से जानते हैं...
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भारत में बीते साल से अब तक कैसे बढ़े हैं सोना-चांदी के दाम?

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2025 में क्यों बढ़े थे सोना-चांदी के दाम?


1. चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ी, क्रिटिकल मिनरल की लिस्ट में शामिल
2025 में चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण केवल निवेश में इजाफा नहीं रहा। 2025 में इसे 'ग्रीन मेटल' के रूप में नई पहचान मिली। अमेरिका की ओर से चांदी को 'क्रिटिकल मिनरल' की सूची में शामिल करने और सोलर पैनल/ईवी बैटरी सेक्टर में मांग बढ़ने से लंदन और न्यूयॉर्क के वॉल्ट्स में चांदी की भारी कमी देखी गई।

2. सेंट्रल बैंकों ने की आक्रामक खरीदारी
चीन, रूस और ब्रिक्स देशों के केंद्रीय बैंकों ने 2025 में डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने के भंडार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की। 'वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल' के मुताबिक, यह खरीदारी पिछले 50 वर्षों में सबसे अधिक रही।

3. ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव
साल भर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और मध्य-पूर्व में जारी तनाव ने निवेशकों को शेयर बाजार के जोखिम से हटाकर सोने की सुरक्षा की ओर मोड़ा।

अब 2026 में क्यों बढ़ रहे हैं सोना-चांदी के दाम?  

अमेरिकी फेडरल रिजर्व में ऊहापोह की स्थिति
  • बाजार में यह प्रबल संभावना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व 2026 में ब्याज दरों में कटौती करेगा। जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो बॉन्ड जैसे निवेशों पर रिटर्न कम हो जाता है, जिससे निवेशक सोने और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर आकर्षित होते हैं।
  • अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से अमेरिकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख जेरोम पॉवेल के खिलाफ संभावित आपराधिक जांच शुरू की है। इससे फेड की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस राजनीतिक दखल से डॉलर में कमजोरी आई है और निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। इससे कीमती धातुओं की मांग बढ़ी है।

सुरक्षित निवेश का सबसे बेहतर विकल्प
  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, व्यापार युद्ध और उच्च मुद्रास्फीति के डर से निवेशक सोने और चांदी को एक सुरक्षित ठिकाना मान कर इसमें निवेश बढ़ा रहे हैं। यह संपत्ति उनके पोर्टफोलियो को आर्थिक उतार-चढ़ाव से बचाने में मदद करती है। 
  • दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने और अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं। डॉलर और अन्य मुद्राओं में गिरावट के दौर में सोना-चांदी ज्यादा स्थिर रहे हैं।
  • खासतौर पर चांदी के मामले में, इसकी औद्योगिक स्तर पर मांग काफी ज्यादा है, जबकि उत्पादन और आपूर्ति सीमित है। इससे इसकी कीमतों में सोने के मुकाबले और भी ज्यादा उछाल दर्ज किया गया है।

यह भी पढ़ें: सोना-चांदी में ऐतिहासिक उछाल: चांदी ₹2.65 लाख और सोना ₹1.44 लाख के पार; वैश्विक तनाव के कारण भाव परवान पर

दुनिया में किस देश के पास कितना सोना?
अगर पूरी दुनिया की बात की जाए तो इस वक्त अमेरिका के पास सबसे बड़ा गोल्ड रिजर्व है। उसके फेडरल रिजर्व में मौजूदा समय में इतना सोना मौजूद है, जितना उसके बाद के स्थानों मौजूद तीन देशों के पास कुल सोने से ज्यादा है। यानी जर्मनी, इटली, फ्रांस के लगभग बराबर है। 

सोने की कीमतों को लेकर आगे क्या अनुमान?

अनुमान है कि कीमतें फिलहाल कम नहीं होंगी। विश्लेषकों और वैश्विक वित्तीय संस्थाओं के मुताबिक, 2026 में सोने की कीमतों में और अधिक उछाल आने की संभावना है।
  1. वॉल स्ट्रीट से जुड़ी कई फर्मों और विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
  2. गोल्डमैन सैक्स के एक सर्वे में 36% संस्थागत निवेशकों ने उम्मीद जताई है कि कीमतें इस 5,000 डॉलर के स्तर को पार कर जाएंगी।
  3. डायचे बैंक ने 2026 में अल्पकालीन अवधि के लिए अपने अनुमान को बढ़ाकर 4,450 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। इसके अधिकतम 4,950 तक जाने की संभावना जताई गई है।
  4. यूबीएस ने 2026 के मध्य तक 4,500 डॉलर का लक्ष्य रखा है। कुछ अन्य विश्लेषकों ने 4,706 डॉलर प्रति औंस और 4,803 डॉलर प्रति औंस के स्तरों का भी अनुमान लगाया है।
  5. भारतीय बाजार (एमसीएक्स) के अनुमान के मुताबिक, भारत में सोना 12 जनवरी को रिकॉर्ड स्तर छू चुका है। बाजार की स्थिति को देखते हुए सोने में आगे और तेजी की उम्मीद है।

चांदी की कीमतों को लेकर क्या संभावनाएं?

विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का अनुमान चांदी को लेकर और भी सकारात्मक है। यानी कई मामलों में यह सोने की तुलना में भी अधिक मजबूती दिखा रहा है। जनवरी 2026 में चांदी की कीमतों ने 2,65,000 रुपये प्रति किलोग्राम का नया सर्वकालिक उच्च स्तर छू लिया है।
  1. वित्तीय फर्म मोतीलाल ओसवाल ने चांदी के 3.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की संभावना जताई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशेषज्ञों का मानना है कि स्पॉट सिल्वर की कीमतें 87.30 से 89.33 डॉलर प्रति औंस तक बढ़ सकती हैं। हालांकि, यह तब मुमकिन है, जब अमेरिकी मुद्रास्फीति (सीपीआई) के आंकड़े उल्टी दिशा में न भागें।
  2. 2025 के दौरान चांदी ने सोने को काफी पीछे छोड़ दिया था, जहां चांदी में 138% की बढ़ोतरी देखी गई, वहीं सोने में लगभग 68% की बढ़त हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सकारात्मक गति 2026 में भी बनी रह सकती है।
  3. सोने के उलट, चांदी की मांग न केवल एक सुरक्षित निवेश के रूप में है, बल्कि औद्योगिक विनिर्माण में भी इसका जबरदस्त इस्तेमाल होता है। औद्योगिक मांग और आपूर्ति की कमी मिलकर इसकी कीमतों को ऊपर ले जा रही हैं।

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