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Goa election 2022: गोवा को लेकर राज्यसभा में क्या-क्या बोले मोदी, कैसे साधा चुनावी समीकरण?
Tue, 08 Feb 2022 01:43 PM IST
जयदेव सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जयदेव सिंह
Updated Tue, 08 Feb 2022 01:43 PM IST
सार
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर सरदार पटेल से प्रेरणा लेकर गोवा की आजादी की रणनीति बनती तो वहां के लोगों को 15 साल तक गुलाम नहीं रहना पड़ता। प्रधानमंत्री जब ये बात कह रहे थे उस वक्त कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया था।
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राज्यसभा में पीएम मोदी
- फोटो : संसद टीवी
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। मोदी ने सभी मुद्दों पर कांग्रेस को घेरा। अपने भाषण के जरिए उन्होंने चुनावी राज्य गोवा को भी साध लिया। गोवा के स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र करते हुए मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की नीतियों की जमकर आलोचना की।
पीएम ने गोवा को लेकर क्या-क्या कहा?
प्रधानमंत्री बोले, 'अगर सरदार पटेल से प्रेरणा लेकर गोवा की आजादी की रणनीति बनती तो वहां के लोगों को 15 साल तक गुलाम नहीं रहना पड़ता।' प्रधानमंत्री जब ये बात कह रहे थे उस वक्त कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया था। इसलिए उन्होंने गोवा के जिक्र की शुरुआत करते हुए कहा कि हमारे कांग्रेस के मित्र जहां भी होंगे जरूर सुन रहे होंगे। गोवा के लोग जरूर सुन रहे होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार सरदार पटेल ने हैदराबाद के लिए रणनीति बनाई, जिस प्रकार उन्होंने जूनागढ़ के लिए रणनीति बनाई। अगर उनसे प्रेरणा लेकर गोवा के लिए भी वैसी ही रणनीति बनाई होती तो गोवा को हिन्दुस्तान की आजादी के 15 साल बाद तक गुलाम नहीं रहना पड़ता।
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पीएम ने कहा, उस समय के अखबार बताते हैं कि तब के प्रधानमंत्री अपनी वैश्विक नेता की छवि खराब होने का डर था। इसलिए उन्हें लगता था कि गोवा की उपनिवेशिक सरकार पर आक्रमण नहीं किया गया। इसलिए जब वहां सत्याग्रहियों पर गोलियां चल रही थी। तब हमारे देश के प्रधानमंत्री ने कहा था कि मैं सेना नहीं दूंगा। सत्याग्रहियों की मदद करने से उन्होंने इनकार कर दिया था। ये गोवा के साथ किया गया कांग्रेस का जुल्म है।
पं. नेहरू के भाषण का भी जिक्र किया
प्रधानमंत्री मोदी ने पंडित जवहार लाल नेहरू का एक भाषण कोट करते हुए कहा, 'नेहरू जी ने 15 अगस्त 1955 को लाल किले से कहा था, कोई धोखे में ना रहे कि हम वहां फौजी कार्रवाई करेंगे। कोई फौज गोवा के आसपास नहीं है। अंदर के लोग चाहते हैं कि वो शोर मचाकर ऐसे हालात पैदा करें कि हम मजबूर हो जाएं फौज भेजने के लिए, हम फौज नहीं भेजेंगे, हम शांति से सब तय करेंगे। इस बात को सब लोग समझ लें।'
प्रधानमंत्री ने नेहरू के भाषण को कोट करते हुए कहा कि पंडित नेहरू ने लोहिया जी समेत सभी सत्याग्रहियों के लिए कहा था, 'जो लोग वहां जा रहे हैं, उनको वहां जाना मुबारक हो, लेकिन ये भी याद रखें कि अपने को सत्याग्रही कहते हैं तो सत्याग्रह से उसूल, सिद्धांत और रास्ते भी याद रखें। सत्याग्रह के पीछे फौजें नहीं चलतीं।' प्रधानमंत्री ने कहा कि गोवा की जनता को असहाय कर दिया गया। गोवा की जनता कांग्रेस के इस कृत्य को भूल नहीं सकती है।
लता जी का जिक्र करते हुए भी गोवा को साधा
प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यक्ति स्वतंत्रता की बातें करने वालों का आज मैं इतिहास खोल रहा हूं। ये घटना भी गोवा के एक बेटे की कथा है। लता मंगेशकर जी के निधन से पूरा देश दुखी है। लता मंगेशकर जी का परिवार गोवा का है, लेकिन उनके परिवार के साथ कैसा सलूक किया गया ये भी देश को जानना चाहिए। उनके छोटे भाई ह्रदयनाथ मंगेशकर जी गोवा की धरती का बेटा, उन्हें ऑल इंडिया रेडियो से निकाल दिया गया। उनका गुनाह क्या था, उनका गुनाह ये था कि उन्होंने वीर सावरकर की देशभक्ति से भरी कविता को ऑल इंडिया रेडियो पर सुनाया था। मंगेशकर जी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब उन्हें सावरकर जी से कहा कि वे रेडियो शो पर उनकी कविता पढ़ेंगे, तो सावरकर जी ने उनसे कविता पढ़ने को लेकर कहा था कि क्या आप मेरी कविता पढ़कर जेल जाना चाहते हो। जब उन्होंने कविता पढ़ी तो सात दिन के अंदर उन्हें ऑल इंडिया रेडियो से निकाल दिया गया। ये आपका फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन था।
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पीएम ने गोवा को लेकर क्या-क्या कहा?
प्रधानमंत्री बोले, 'अगर सरदार पटेल से प्रेरणा लेकर गोवा की आजादी की रणनीति बनती तो वहां के लोगों को 15 साल तक गुलाम नहीं रहना पड़ता।' प्रधानमंत्री जब ये बात कह रहे थे उस वक्त कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया था। इसलिए उन्होंने गोवा के जिक्र की शुरुआत करते हुए कहा कि हमारे कांग्रेस के मित्र जहां भी होंगे जरूर सुन रहे होंगे। गोवा के लोग जरूर सुन रहे होंगे।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार सरदार पटेल ने हैदराबाद के लिए रणनीति बनाई, जिस प्रकार उन्होंने जूनागढ़ के लिए रणनीति बनाई। अगर उनसे प्रेरणा लेकर गोवा के लिए भी वैसी ही रणनीति बनाई होती तो गोवा को हिन्दुस्तान की आजादी के 15 साल बाद तक गुलाम नहीं रहना पड़ता।
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पीएम ने कहा, उस समय के अखबार बताते हैं कि तब के प्रधानमंत्री अपनी वैश्विक नेता की छवि खराब होने का डर था। इसलिए उन्हें लगता था कि गोवा की उपनिवेशिक सरकार पर आक्रमण नहीं किया गया। इसलिए जब वहां सत्याग्रहियों पर गोलियां चल रही थी। तब हमारे देश के प्रधानमंत्री ने कहा था कि मैं सेना नहीं दूंगा। सत्याग्रहियों की मदद करने से उन्होंने इनकार कर दिया था। ये गोवा के साथ किया गया कांग्रेस का जुल्म है।
पं. नेहरू के भाषण का भी जिक्र किया
प्रधानमंत्री मोदी ने पंडित जवहार लाल नेहरू का एक भाषण कोट करते हुए कहा, 'नेहरू जी ने 15 अगस्त 1955 को लाल किले से कहा था, कोई धोखे में ना रहे कि हम वहां फौजी कार्रवाई करेंगे। कोई फौज गोवा के आसपास नहीं है। अंदर के लोग चाहते हैं कि वो शोर मचाकर ऐसे हालात पैदा करें कि हम मजबूर हो जाएं फौज भेजने के लिए, हम फौज नहीं भेजेंगे, हम शांति से सब तय करेंगे। इस बात को सब लोग समझ लें।'
प्रधानमंत्री ने नेहरू के भाषण को कोट करते हुए कहा कि पंडित नेहरू ने लोहिया जी समेत सभी सत्याग्रहियों के लिए कहा था, 'जो लोग वहां जा रहे हैं, उनको वहां जाना मुबारक हो, लेकिन ये भी याद रखें कि अपने को सत्याग्रही कहते हैं तो सत्याग्रह से उसूल, सिद्धांत और रास्ते भी याद रखें। सत्याग्रह के पीछे फौजें नहीं चलतीं।' प्रधानमंत्री ने कहा कि गोवा की जनता को असहाय कर दिया गया। गोवा की जनता कांग्रेस के इस कृत्य को भूल नहीं सकती है।
लता जी का जिक्र करते हुए भी गोवा को साधा
प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यक्ति स्वतंत्रता की बातें करने वालों का आज मैं इतिहास खोल रहा हूं। ये घटना भी गोवा के एक बेटे की कथा है। लता मंगेशकर जी के निधन से पूरा देश दुखी है। लता मंगेशकर जी का परिवार गोवा का है, लेकिन उनके परिवार के साथ कैसा सलूक किया गया ये भी देश को जानना चाहिए। उनके छोटे भाई ह्रदयनाथ मंगेशकर जी गोवा की धरती का बेटा, उन्हें ऑल इंडिया रेडियो से निकाल दिया गया। उनका गुनाह क्या था, उनका गुनाह ये था कि उन्होंने वीर सावरकर की देशभक्ति से भरी कविता को ऑल इंडिया रेडियो पर सुनाया था। मंगेशकर जी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब उन्हें सावरकर जी से कहा कि वे रेडियो शो पर उनकी कविता पढ़ेंगे, तो सावरकर जी ने उनसे कविता पढ़ने को लेकर कहा था कि क्या आप मेरी कविता पढ़कर जेल जाना चाहते हो। जब उन्होंने कविता पढ़ी तो सात दिन के अंदर उन्हें ऑल इंडिया रेडियो से निकाल दिया गया। ये आपका फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन था।